Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 तीमुथियुस 6:1 1 तीमुथियुस 6:2 1 तीमुथियुस 6:3 1 तीमुथियुस 6:4 1 तीमुथियुस 6:5 1 तीमुथियुस 6:6 1 तीमुथियुस 6:7 1 तीमुथियुस 6:8 1 तीमुथियुस 6:9 1 तीमुथियुस 6:10 1 तीमुथियुस 6:11 1 तीमुथियुस 6:12 1 तीमुथियुस 6:13 1 तीमुथियुस 6:14 1 तीमुथियुस 6:15 1 तीमुथियुस 6:16 1 तीमुथियुस 6:17 1 तीमुथियुस 6:18 1 तीमुथियुस 6:19 1 तीमुथियुस 6:20 1 तीमुथियुस 6:21



1 तीमुथियुस 6:18 का विस्तृत सार-संवाद
यह verse एक प्रेरक निर्देश देता है जो ईसाई जीवन के व्यवहारिक मोर्चे को छूता है: समृद्धि के वास्तविक उद्देश्य क्या हों, और धन के साथ हमारा दृष्टिकोण कैसा होना चाहिए। पवित्र शास्त्र में धन का स्थान स्थिर है—यह हमारे लिए आशीर्वाद भी है और दायित्व भी। इस पद में प्रेरक संदेश तीन छोटे लेकिन गहरे कदम देता है: भलाई करें, भलाई और उद्धत हों, उदारता और सहायता के लिए तत्पर रहें।
पद का संदर्भ और अध्याय के भीतर स्थान
1 तीमुथियुस के पत्र का यह भाग: एक विश्वासी समुदाय में आर्थिक योग्यताओं और कार्यशील ईमानदारी के इतिहास के रूप में पड़ता है। पॉल यहाँ युवा संरक्षक तीमुथियुस को यह याद दिलाते हैं कि धन-धारित समाज में खड़े रहने के बजाए उसका उद्देश्य ईश्वर के Kingdom के लिए प्रयोग करना है। भलाई और उदारता के साथ होने वाला योगदान न केवल आवश्यकताओं की पूर्ति करता है, बल्कि आत्मिक विकास और समुदाय के निर्माण में सहायक होता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य बाइबिल संदर्भ से संरेखण
यह तीनों पहलू पुराने नियम और नए नियम दोनों में बार-बार देखे जाते हैं:
व्यावहारिक अनुप्रयोग
थोड़े से उद्धरण—इतिहास के प्रकाश
यह संदर्भ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के पारंपरिक व्याख्यानों के चुने हुए विचारों को संक्षेप में समाहित करता है। ध्यान दें कि नीचे दिए गए शब्द उनके पूर्ण उद्धरण नहीं हैं, केवल संक्षिप्त सार हैं:
मुख्य निष्कर्ष: यह verse धन के नैतिक उपयोग पर स्पष्ट निर्देश देता है—भलाई के पलों में पुरुषार्थ, उदारता, और सहायता-पुनःवितरण की इच्छा के साथ समाज के भीतर ईश्वर-राज्य को प्रकट करना।
संक्षेप.summary
1 तीमुथियुस 6:18 हमें सिखाता है कि धन एक साधन है, लक्ष्य नहीं; भलाई करने, अच्छे कार्यों में धन-सम्पदा को लगाकर, और जरूरतमंदों के प्रति तत्पर रहकर ख्रीष्टीय जीवन का नमूना बनता है। यह संदेश पुराने और नए नियम की सामूहिक यात्रा के अनुरूप है: विश्वास के साथ कर्मों का संयोजन आवश्यक है; हमारा धन और समय परमेश्वर के सामर्थ्य से मिलने वाले आशीर्वाद के उत्तर के रूप में देना चाहिए।