Old Testament
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1 तीमुथियुस 4:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि हम परिश्रम और यत्न इसलिए करते हैं कि हमारी आशा उस जीविते परमेश्वर पर है; जो सब मनुष्यों का और विशेष रूप से विश्वासियों का उद्धारकर्ता है।
1 तीमुथियुस 4:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 तीमुथियुस 4:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 तीमुथियुस 2:4 (HINIRV) »
जो यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो; और वे सत्य को भली-भाँति पहचान लें। (यहे. 18:23)

1 यूहन्ना 2:2 (HINIRV) »
और वही हमारे पापों का प्रायश्चित है: और केवल हमारे ही नहीं, वरन् सारे जगत के पापों का भी।

यूहन्ना 1:29 (HINIRV) »
दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, “देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना* है, जो जगत के पाप हरता है। (1 पत. 1:19, यशा. 53:7)
मुख्य interpretive बिंदु
1 तीमुथियुस 4:10 में पॉल दृढ़ विश्वास के साथ कहता है कि हमारी आशा और परिश्रम किसी विश्वसनीय उद्धारकर्ता की ओर निर्देशित हैं—यही जीवन के संकल्प का मूल स्थान है। हमारे प्रयास, कष्ट, और लगन इस आशा के पीछे खड़े होते हैं: परमेश्वर जो जीवित है और जो सभी मनुष्यों, विशेष रूप से विश्वासियों का उद्धारकर्ता है। इस वाक्य का संदेश यह है कि ईश्वर की कृपा और उद्धार पर हमारी स्थिर आशा ही मानव जीवन के प्रयोजन और धैरे का आधार बनती है.
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी कॉन्टेक्स्ट)
पॉल इस पत्र में ईसाई समुदाय की स्थिरता और सुसमाचार के लिए खड़े रहने की शिक्षा देता है। यहां उद्धारकर्ता के रूप में परमेश्वर का उल्लेख उनका उद्धार का स्रोत स्पष्ट करता है—न कि मनुष्यों के प्रयासों पर निर्भरता। यह दृश्य कुरुओं और प्रेरितों के समय की सामाजिक-धार्मिक संदर्भ से बाहर नहीं, बल्कि ईश्वर की वस्तुपरक क्रिया को केंद्रित बनाता है।
धार्मिक महत्व (थेओलॉजिकल significance)
यह वचन त्रिविध बातों को पुष्ट करता है: सत्ता, उद्धार और विश्वसनीयता। परमेश्वर जीवित है—यही आशा का आधार—और वह सब पर, विशेषकर विश्वासियों पर उद्धारकर्ता के तौर पर कार्य करता है। इस उद्धार में मानव प्रयासों की भूमिका स्वीकार करते हुए भी, स्रोत उद्धारकर्ता ईश्वर की कृपा और उसकी योजना का परिणाम है।
बाइबलीय क्रॉस-रेफरेंसेस (Cross-references)
आत्म-चेतना और विचार-विनिमय (Reflection questions)
व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारी श्रम-संयम और धैर्य का आधार परमेश्वर की जीवित उपस्थिति है—वह उद्धारकर्ता जो सबका मालिक है। इस विश्वास पर टिके रहकर हम कष्टों में भी स्थिर रहते हैं, क्योंकि हमारा望 न केवल व्यक्तित्व-उन्नति है, बल्कि ईश्वरीय उद्धार का प्रस्तुतिकरण है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
हमारी आशा वही है जो परमेश्वर में है—जीवित उद्धारकर्ता; और इस आशा के कारण ही हमारा परिश्रम उद्देश्यपूर्ण रहता है, ताकि विश्वासियों के जीवन में उद्धार की वास्तविकता दिखाई दे।
महत्वपूर्ण उद्धरण (जो Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से उपलब्ध हो सके): यह टिप्पणी उन विचारों को समाहित करती है जो इन पीठाओं की सामान्य टिप्पणियों में दर्ज हैं: परमेश्वर जीवित है और उद्धारकर्ता के रूप में समान तत्परता से कार्य करता है; उद्धार पर हमारी स्थिर आशा ही वास्तविक सुधार का प्रेरक है।