Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 तीमुथियुस 4:4 बाइबल पद की व्याख्या
1 तीमुथियुस 4:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि परमेश्वर की सृजी हुई हर एक वस्तु अच्छी है*, और कोई वस्तु अस्वीकार करने के योग्य नहीं; पर यह कि धन्यवाद के साथ खाई जाए; (उत्प. 1:31)
1 तीमुथियुस 4:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 तीमुथियुस 4:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 14:14 (HINIRV) »
मैं जानता हूँ, और प्रभु यीशु से मुझे निश्चय हुआ है, कि कोई वस्तु अपने आप से अशुद्ध नहीं, परन्तु जो उसको अशुद्ध समझता है, उसके लिये अशुद्ध है।

रोमियों 14:20 (HINIRV) »
भोजन के लिये परमेश्वर का काम* न बिगाड़; सब कुछ शुद्ध तो है, परन्तु उस मनुष्य के लिये बुरा है, जिसको उसके भोजन करने से ठोकर लगती है।

1 कुरिन्थियों 10:25 (HINIRV) »
जो कुछ कस्साइयों के यहाँ बिकता है, वह खाओ और विवेक के कारण कुछ न पूछो।
1 तीमुथियुस 4:4 — पाठ के पास का पृष्ठभूमि और अर्थ
पद इस पंक्ति में संत पॉल का उल्लेख है कि परमेश्वर की सृष्टि की हर वस्तु अच्छी है, और इसे धन्यवाद के साथ लेने पर ही अस्वीकार करने की बात नहीं। यह उपदेश पहले धारणाओं को चुनौती देता है कि एपिक या कुछ वस्तुएँ ही नश्वर और अशुद्ध हो सकती हैं; बल्कि वास्तविकता यह है कि यदि हमें शास्त्र के अनुसार इसे स्वीकार करना है, तो हर चीज़ जो परमेश्वर ने बनायी है, उसे “अच्छी” माना जाना चाहिए।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से मिलने वाले संकेत
मुख्य विचार यह है कि परमेश्वर ने संसार को अच्छे पदार्थों से बनाकर माना है कि मानव उन्हें उपयोग में लाये और सम्मान से खाने-पीने, जीने के साधनों के रूप में ग्रहण करे। यह न केवल सृजात्मक व्यवस्था की पुष्टि करता है, बल्कि आभार के अभाव में मिलने वाली दया की कमी भी दिखाता है—धन्यवाद में जीवन के हर हिस्से की ग्रहणशीलता बढ़ती है।
महत्वपूर्ण शब्दार्थ और चित्रण
अन्य प्रबुद्ध टिप्पणीकारों के कथन (संयोजनित सार)
Matthew Henry ने दिखाया है कि यह पाठ प्रेरित आहार-नियम का सार है, जिसमें प्रभु की रचना के प्रति कृतज्ञता और पवित्रता की मांग है। Albert Barnes ने आह्वान किया कि पदार्थों को गलत मानना नहीं, बल्कि उनके सही उपयोग को स्वीकारना है। Adam Clarke ने भी इसे ईश्वर की अच्छी व्यवस्था के रूप में देखा है, जिसमें मनुष्य की आभार-उच्चारण उनकी सहभागिता को संरक्षित करता है। इन विचारों का संयुक्त संदेश यही है कि हमारी ग्रहणशीलता और आभार, विश्वास के पथ को मजबूत बनाते हैं।
सूत्र-संरचना और क्रॉस-रेफरेंसेस
आज के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोग
– भोजन और सांसारिक साधनों को एक व्यवस्था-आयाम के रूप में स्वीकार करें, परन्तु उन्हें परमेश्वर की कृपा के संकेत के रूप में देखें।
– हर आवश्यकता के साथ आभार का अभ्यास करें; इससे न केवल दैनंदिन जीवन में संतोष बढ़ेगा बल्कि आत्मिक जीवन भी गहरा होगा।
– प्रेरित पथ पर चलते हुए, पदार्थों के साथ पूजा-उन्मुख दृष्टिकोण विकसित करें, ताकि ईश्वर के कष्टरहित प्रेम का अनुभव बढ़े।