Old Testament
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1 तीमुथियुस 4:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
कोई तेरी जवानी को तुच्छ न समझने पाए*; पर वचन, चाल चलन, प्रेम, विश्वास, और पवित्रता में विश्वासियों के लिये आदर्श बन जा।
1 तीमुथियुस 4:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 तीमुथियुस 4:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 तीमुथियुस 2:22 (HINIRV) »
जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उनके साथ धार्मिकता, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर।

2 तीमुथियुस 2:15 (HINIRV) »
अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करनेवाला ठहराने का प्रयत्न कर, जो लज्जित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो।

1 तिमुथियुस 4:12 — प्रारम्भिक संदर्भ और शब्दार्थ
यहेुन्नायुस मसीह-उत्पत्ति की प्रेरित पौलुस की पहली पत्री का यह खण्ड युवा टीमुथियुस को निर्देश देता है। अध्याय 4 में पौलुस येसु-क्राइस्ट के अनुयायियों के साहस, आचरण और विश्वास के बारे में स्पष्ट मार्गदर्शन देते हैं। इस पद में विशेषकर युवाओं को न केवल अपने आचरण से परखाने की अनुमति, बल्कि बताने का लक्ष्य है कि वे विश्वस्त समुदाय में एक नजीर बनें।
ईश्वर और विश्वास के प्रति पाठ का तात्पर्य
यह पद कहता है कि कोई भी तुम्हारी जवानी से तुच्छ न समझे। इसका अर्थ है कि युवा होने से क्षमा-योग्य नहीं हो सकता कि आप कमजोर या प्रभावहीन माने जाएं; बल्कि आपकी आचरण में दृढ़ता, ईमानदारी और बुलावा का प्रकट होना चाहिए। साथ ही, “वचन, चाल चलन, प्रेम, विश्वास, और पवित्रता” में आदर्श बनना आवश्यक है—यही एक सुसंगत जीवन की कसौटी है।
शब्दार्थ और चित्रण स्पष्ट करना
अनुवर्ती पाठ और संबंधी आयतें
यही संदेश अन्य खुले तौर पर युवाओं के लिए प्रेरित आयतों के साथ संगत है, जैसे कि लूका 18:27 (जो ईश्वर के लिए असंभव कुछ भी नहीं दिखता), और रोमियों 12:2 (दुनिया की रीति-रिवाज से न जड़ना, पर मन-परिवर्तन से सत्य को अपनाना)। इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परिवर्तन आंतरिक परिवर्तन से आता है, न कि बाहरी दबाव से।
2-3 प्रासंगिक क्रॉस-रेफरंसेस
- लूका 18:27 — प्रभु ने कहा: जो कुछ मनुष्य के लिए असम्भव है, वह परमेश्वर के लिए संभव है; युवाओं के लिए भी यह विश्वास का रास्ता दिखाता है।
- रोमियों 12:2 — संसार की रीति से न ढलकर, नवीन मस्तिष्क के अनुसार जीवन जीना।
- याकूब 4:7 —Submit to God, resist the devil, and he will flee.
नोट: ऊपर के वास्तविक टेक्स्ट का संक्षिप्त सार दिया गया है; पंक्तियों के पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण नहीं हैं।
आज के संदर्भ में लागू करने योग्य बातें
युवा विश्वासियों के लिए यह पद एक बुलाहट है कि वे अपने समय, शिक्षा और सामाजिक स्थान का सही उपयोग करें। अध्ययन, नम्रता और दूसरों के लिए खड़े रहने के बारे में स्पष्ट लक्ष्य बनाएं। आप कैसे “वचन” को अपने दैनंदिन निर्णयों में प्रभुत्व देते हैं, इसे देखने दें। “चाल-चलन” में संयम रखें, ताकि आप अपने शब्दों और कार्यों से ईश्वरीय गुणों को प्रतिबिंबित करें। प्रेम, विश्वास और पवित्रता की दिशा में निरंतर अभ्यास—यही आज का वास्तविक अनुशासन है।
सार निष्कर्ष
इस पाठ में प्रेरित पौलुस युवाओं को निरपेक्ष दृष्टि से बुलाते हैं कि वे अपनी उम्र को तुच्छ न समझें, बल्कि इमानदारी, प्रेम और पवित्र आचरण द्वारा एक आदर्श व्यवहार प्रस्तुत करें। यह संदेश आज भी उतना हीLiving है क्योंकि विश्वास-यात्रा हर पीढ़ी के लिए है।
उद्धरण स्रोत के रूप में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से प्रकाशित विचारों के छोटे-छोटे प्रतिपादन उपलब्ध हैं—परंतु यहाँ मूल संदर्भ को सुरक्षित रखते हुए एक संयुक्त, समेकित व्याख्या प्रस्तुत की गई है।