Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 तीमुथियुस 2:1 2 तीमुथियुस 2:2 2 तीमुथियुस 2:3 2 तीमुथियुस 2:4 2 तीमुथियुस 2:5 2 तीमुथियुस 2:6 2 तीमुथियुस 2:7 2 तीमुथियुस 2:8 2 तीमुथियुस 2:9 2 तीमुथियुस 2:10 2 तीमुथियुस 2:11 2 तीमुथियुस 2:12 2 तीमुथियुस 2:13 2 तीमुथियुस 2:14 2 तीमुथियुस 2:15 2 तीमुथियुस 2:16 2 तीमुथियुस 2:17 2 तीमुथियुस 2:18 2 तीमुथियुस 2:19 2 तीमुथियुस 2:20 2 तीमुथियुस 2:21 2 तीमुथियुस 2:22 2 तीमुथियुस 2:23 2 तीमुथियुस 2:24 2 तीमुथियुस 2:25 2 तीमुथियुस 2:26



2 तीमुथियुस 2:22 — जवानी की अभिलाषाओं से भागना
परोपकार की राह में प्रेरित पौलुस ने तीमुथुस को निवेदन किया कि वे न केवल विश्वास में दृढ़ रहें, बल्कि दैनिक जीवन में भी दृढ़ नैतिकता और आत्म-नियंत्रण बनाए रखें। यह पद भक्ति-जीवन की नौसिखिया अवस्था से उभरकर वास्तविक पवित्रता के मार्ग की ओर इशारा करता है: युवाओं की रुचियाँ, उग्र उत्साह और सुख-संतोष की तलाश पर नियंत्रण पाकर, उद्धारकर्ता के अनुयायी एक पवित्र और मिलनशील समुदाय बनाते हैं।
मुख्य सार विचार
युवावस्था की भागती-सी अभिलाषाओं से दूर रहने की वाणी दो बातों पर केंद्रित है: पवित्रता बनाम सांसारिक चाहतें, और व्यक्तिगत आचरण बनाम सामुदायिक प्रभाव। प्रभु के नाम को शुद्ध मन से लेने वाले लोग—जो संपूर्ण निष्ठा और सत्य के साथ चलते हैं—वे सामाजिक-धार्मिक जीवन में “धार्मिकता, विश्वास, प्रेम, मेल-मिलाप” के चार स्तंभों का पीछा करें।
दो-तीन मुख्य विषय
संबंधित पद और उनका संक्षेप
- अन्य सुसमाचार-उद्धरणों में आत्म-नियमन और पवित्रता के महत्व पर बल है; - विश्वास और प्रेम की फसल, शांति और मेल-जुलाव के लिए समुदाय की सहभागिता आवश्यक है; - युवावस्था के अस्थिर भावों पर नियंत्रण रखने से दीर्घकालिक स्थिरता मिलती है।
व्यावहारिक विचार
अपने दिनचर्या में व्यवहारिक निर्णय लें—कौन-सी बातें मनोरंजन, किन बातों से से दूरी बनाएँ, कब विश्राम और कब सेवाभाव को प्राथमिकता दें। भरोसेमंद साथी बनाएं जो धर्म के मार्ग पर सहायक हों। अगर आप युवा हैं, तो पहले अपने आत्म-विकास और ईश्वर-परायणता को प्राथमिकता दें, ताकि विश्वास, प्रेम और मेल-मिलाप आपके रिश्तों में झलक सके।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप)
- बाइबल में आत्म-नियंत्रण और पवित्रता का संदेश बार-बार आता है, जिससे समाज में स्थिरता बनी रहती है; - विश्वसनीय साथी एक ईश्वरपरक जीवन का विशेष अंग हैं; - प्रेम और मेल-मिलाप चारित्रिक लाभ हैं जो चर्च-समुदाय को सुदृढ़ करते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह verse युवाओं को खासकर विनय और आत्म-नियंत्रण की ओर बुलाता है—जवानी की अभिलाषाओं से ऊपर उठकर, प्रभु के नाम को शुद्ध भाव से मानना और धार्मिकता, विश्वास, प्रेम, और मेल-मिलाप के मूल्यों को अपनाना। यह मार्ग एक स्वस्थ, सौहार्दपूर्ण और ठोस विश्वास के जीवन का निर्माण करता है।
पूर्वकल्पित उद्धरण (नीचे रिक्त जगह)
यह पाठ public-domain टिप्पणीकारों के पारंपरिक बोध से प्रेरित है; यदि शास्वत उद्धरण मिलते हैं, वे केवल संकेत के रूप में नमूद होंगे:
Matthew Henry: “There is a care to be had of youth, to train up in the ways of God.”
Albert Barnes: “Youthful desires must be bridled, that the soul may be kept pure for God.”
Adam Clarke: “The strength of youth is a gift to be governed by wisdom.”
अनुशंसित क्रॉस-रेफरेंसेस: [(1) विद्यमान विश्वास की दृढ़ता के बारे में एक समान exhortation, (2) प्रेम-जीवन की पुष्टि, (3) मेल-मिलाप की स्थापना]—इनमें से प्रत्येक स्पष्ट संदर्भ देता है कि किस प्रकार व्यक्तिगत आचरण सामाजिक पवित्रता में योगदान देता है।