Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 तीमुथियुस 2:1 2 तीमुथियुस 2:2 2 तीमुथियुस 2:3 2 तीमुथियुस 2:4 2 तीमुथियुस 2:5 2 तीमुथियुस 2:6 2 तीमुथियुस 2:7 2 तीमुथियुस 2:8 2 तीमुथियुस 2:9 2 तीमुथियुस 2:10 2 तीमुथियुस 2:11 2 तीमुथियुस 2:12 2 तीमुथियुस 2:13 2 तीमुथियुस 2:14 2 तीमुथियुस 2:15 2 तीमुथियुस 2:16 2 तीमुथियुस 2:17 2 तीमुथियुस 2:18 2 तीमुथियुस 2:19 2 तीमुथियुस 2:20 2 तीमुथियुस 2:21 2 तीमुथियुस 2:22 2 तीमुथियुस 2:23 2 तीमुथियुस 2:24 2 तीमुथियुस 2:25 2 तीमुथियुस 2:26



पद का तात्पर्य और पृष्ठभूमि
2 तीमुथियुस 2:17 में प्रेषक पॉल उसकी शिक्षा-कथा के समय एक चेतावनी देता है कि गलत प्रचार कैसे फैल सकता है। यहाँ पर हुमिनयुस और फिलेतुस का नाम बतौर उदाहरण लिया गया है—वे ऐसे प्रचारक थे जो भटकाव की राह में चले गए और उनके शब्द “सड़े-घाव की तरह फैलते” हैं। यह वचन उस समय की चर्चाओं में निंदात्मक है जब कुछ लोग सचाई से दूर धारणाओं को तेज़ी से फैलाते हैं, जिससे विश्वासियों का पथ भटक सकता है।
यह तथ्य क्या बताता है—ईश्वर, विश्वास और प्रचार की प्रकृति
कथा का मूल पाठ यह है कि सत्य के बिना प्रचार कैसे नयी ग़लत धारणाओं को जन्म देता है और समूहों के विश्वास को नुकसान पहुंचाता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि ईश्वर की ओर से भेजी गई सच्ची शिक्षा बनाम मानवीय धारणाओं के बीच फर्क चाहिए। जैसे-जैसे गलत विचार फैलते हैं, चर्च के भीतर अस्थिरता और विघटन आ सकता है।
महत्वपूर्ण शब्दों की व्याख्या
अन्य सम्बद्ध वक्तव्य (cross-references) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
यह पाठ आज भी सच है: चर्च में सच और झूठ के बीच स्पष्ट भेद आवश्यक है। एक विश्वासी के लिए यह जरूरी है कि वह शिक्षण-स्वीकृति में स्मरण रखे कि अनुदेशों के पीछे प्रेरणा प्रभु-योजना होनी चाहिए, न कि व्यक्तियों की व्यक्तिगत प्राथमिकताएं। उद्धार की राह में, हमें सतर्क रहना है कि घृणात्मक या भड़काऊ भाषण से बचकर, पवित्रशास्त्र की सच्ची प्रस्तुति ही प्रचारित करें।
संक्षिप्त सार
2 तीमुथियुस 2:17 बताता है कि बिना सत्य के प्रचार कैसे फैल सकता है—हुमिनयुस और फिलेतुस जैसे उदाहरणों के जरिये। इसका उद्देश्य है चर्च को सच और विश्वास-योग्य शिक्षण की सुरक्षा; और आज भी यह चेतावनी उपयुक्त है कि गलत वचन समाज में कलह और भ्रम फैलाते हैं, जबकि सत्य वही है जो मसीह में है।
याद रखें: उपरोक्त विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणियों के अनुरूप समर्थित हैं—जहाँ भी संभव हो, उनके संक्षिप्त संकेत उद्धृत किए गए हैं (केवल विशिष्ट वाक्यों का उल्लेख): “सड़े-घाव की तरह फैलना” का चित्रण प्रचार के नुकसान को दर्शाने के लिए प्रयुक्त है।