Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 तीमुथियुस 2:1 2 तीमुथियुस 2:2 2 तीमुथियुस 2:3 2 तीमुथियुस 2:4 2 तीमुथियुस 2:5 2 तीमुथियुस 2:6 2 तीमुथियुस 2:7 2 तीमुथियुस 2:8 2 तीमुथियुस 2:9 2 तीमुथियुस 2:10 2 तीमुथियुस 2:11 2 तीमुथियुस 2:12 2 तीमुथियुस 2:13 2 तीमुथियुस 2:14 2 तीमुथियुस 2:15 2 तीमुथियुस 2:16 2 तीमुथियुस 2:17 2 तीमुथियुस 2:18 2 तीमुथियुस 2:19 2 तीमुथियुस 2:20 2 तीमुथियुस 2:21 2 तीमुथियुस 2:22 2 तीमुथियुस 2:23 2 तीमुथियुस 2:24 2 तीमुथियुस 2:25 2 तीमुथियुस 2:26



2 तीमुथियुस 2:20 का पार्श्व-सम्भाषण: बड़े घर की चीज़ें
पद का आरम्भिक दृश्य: पौलुस अपने शिष्य तीमुथियुस को चेतावनी और प्रेरणा दे रहा है कि ईश्वर के लिए सेवक बनने के विविध प्रकार के लोग कैसे व्यवहार करते हैं। वाक्य यह बताता है कि ईश्वर के घर में विविध प्रकार के पात्र हैं—सोने-चाँदी के बर्तनों जैसी पवित्रता और उपयोगिता के मानक के अनुरूप, बनाम ऐसे क्षण जहाँ कुछ नीरस या निम्न स्तरीय बर्तनों का प्रयोग भावनात्मक या नैतिक अवरोधों के लिए किया जाता है। यह दृश्य परमेश्वर-विश्वास के भीतर नभ-भूमि के बीच के विविधता को साफ बताता है: हर प्रकार के बर्तन मौजूद हैं, परन्तु प्रयोजन और प्रतिष्ठा के अनुसार उनका आदर या अवमानना निर्धारित होता है।
इस टेक्स्ट में ईश्वर या विश्वास के बारे में क्या खुलासा है
यह पाठ विश्वास-जीवन में पवित्रता और उपयोगिता के सम्बन्ध को उजागर करता है। परमेश्वर के घर में हर प्रकार के बर्तन होने से यह संकेत मिलता है कि ईश्वर विभिन्न लोगों को आयाम-आयाम में बुलाते हैं और उनका उद्देश्य भी अलग-अलग हो सकता है। परंतु जो “तय” और “पवित्र” बनकर रहते हैं, वे अधिक धार्मिक उपयोग के लिए उपयुक्त माने जाते हैं। यह विचार ईश्वर के हाथ में व्यक्तियों के प्रयोजन और शिक्षा-प्रकृति को महत्व देता है—जो भरोसे के साथ बने रहते हैं, उन्हें सेवा के उच्चतम अवसर मिलते हैं; अन्यथा उनका उद्देश्य परिवर्तनशील, लगभग औपचारिक रह सकता है।
महत्वपूर्ण शब्दों या छवि-समझाइयाँ
अन्य पवित्र संदर्भ (क्रॉस-रेफरेंस) और उनके संक्षिप्त संबंध
इन क्रॉस-रेफरेंस का अभिप्राय है कि विश्वास-परिवर्तन में योग्यता और उद्देश्य का समन्वय आवश्यक है — उच्च और निम्न दोनों प्रकार के पात्र परमेश्वर के उद्देश्य में विशिष्ट भूमिका निभाते हैं, परन्तु पवित्रता और योग्यता के मानक को बनाए रखना अनिवार्य है।
आज के जीवन में उपयोग/आचरण
1) आत्म-चयन और तैयारी: अपने विश्वास-जीवन को सोने-चाँदी के बर्तनों जितना पवित्र रखें—यानी वह आचरण जो ईश्वर की महिमा के लिए उपयुक्त हो।
2) सेवा के अवसर: अपने तरीके से—चाहे नेतृत्व हो या सहायक भूमिका—हर एक को ऐसा किया जाना चाहिए जो परमेश्वर के उद्देश्य के अनुकूल हो।
3) नम्रता और उपयोगिता: भिन्न प्रकार के बर्तनों के प्रति सम्मान रखें; सभी को उचित स्थान और सम्मान दें, ताकि समुदाय में प्रेम और स्थिरता बनी रहे।
समेकित निष्कर्ष: परमेश्वर के घर में विविधतायें हैं, पर पवित्रता और उपयोगिता के मानक एक होते हैं। व्यक्ति की आस्था और व्यवहार यह निर्धारित करते हैं कि वह किस प्रकार परमेश्वर के कार्यों में श्रेष्ठता पाता है।
पूर्व-प्रेरणा उद्धरण (ऐतिहासिक संतों से चयनित संक्षेप विवरण): - Matthew Henry के ठहराव: “The great house has vessels of both gold and earth; some for honour, and some for dishonour.” (संक्षेप सार) — विशिष्ट वाक्यांश का पूर्ण उद्धरण उपलब्ध होने पर उद्धृत सार यहां सम्मिलित किया गया है। - Albert Barnes: पवित्रता के साथ प्रयोजन का संयोजन—उच्च-मानक के बर्तनों के लिए उच्च दायित्व। - Adam Clarke: उपयोगिता और सम्मान के निर्णायक नियम—केवल पवित्रता से प्रेरित कर्म परमेश्वर के कार्यों के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।