Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 तीमुथियुस 4:6 बाइबल पद की व्याख्या
1 तीमुथियुस 4:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यदि तू भाइयों को इन बातों की सुधि दिलाता रहेगा, तो मसीह यीशु का अच्छा सेवक ठहरेगा; और विश्वास और उस अच्छे उपदेश की बातों से, जो तू मानता आया है, तेरा पालन-पोषण होता रहेगा।
1 तीमुथियुस 4:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 तीमुथियुस 4:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 पतरस 2:2 (HINIRV) »
नये जन्मे हुए बच्चों के समान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो*, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ,

कुलुस्सियों 3:16 (HINIRV) »
मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने-अपने मन में कृतज्ञता के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।

1 तीमुथियुस 1:10 (HINIRV) »
व्यभिचारियों, पुरुषगामियों, मनुष्य के बेचनेवालों, झूठ बोलनेवालों, और झूठी शपथ खानेवालों, और इनको छोड़ खरे उपदेश के सब विरोधियों के लिये ठहराई गई है।
1 तीमुथियुस 4:6 का सार और संदर्भ
इस पद में पौलुस टिके रहते हुए यीशु मसीह के सेवक के रूप में तुझे जो मार्गदर्शन देने को कहता है, वह दिखाई देता है: यदि तू भाइयों को इन बातों की सुधि दिलाता रहेगा, तो मसीह यीशु का अच्छा सेवक ठहरेगा; और विश्वास और उस अच्छे उपदेश की बातों से, जो तू मानता आया है, तेरा पालन-पोषण होता रहेगा।
पृष्ठभूमि और अर्थ
पत्र की यह पंक्ति पहली तीमुथियुस को लिखी गई है, जब विश्वास के समुदाय में सचेत और सक्षम मार्गदर्शकों की आवश्यकता थी। पूछा गया लक्ष्य यह है कि यीशु के काम को लगन से आगे बढ़ाते हुए धार्मिकीकरण नहीं, बल्कि सुसंरचना और स्पष्ट शिक्षण द्वारा मसीह के उपदेशों को संरक्षित किया जाए। यहाँ “सुधि दिलाने” का आशय है शिक्षित करना, चेतावनी देना और सत्य को दृढ़ करना—ताकि विश्वासियों के जीवन का ढांचा मजबूत रहे।
Interpretive observations
कठिनाई और सहायता
शिष्य के रूप में, तीमुथियुस को सतत सावधानी रखने की जरूरत है—जो बातें वह मानता है, उन्हें व्यवहार में ढालना और उन संदेशों को जीवन को साक्ष्य बनाना। इससे वह “अच्छा सेवक” की कसौटी पर खरा उतरता है, தேவाधार्मिक तुलनाओं में नहीं, बल्कि क्रियाशील सत्य में।
संक्षिप्त थीम्स
संबंधित पद उदाहरण
1) तिथि 4:16— विश्वास और व्यवहार में संगतता से चर्च में प्रेरणा बढ़ती है।
2) तीमुथियुस 3:14–15— परिवार और शिष्यत्व के मार्गदर्शन से स्थिर विश्वास बनता है।
3) मत्ती 28:19–20— शिक्षण के लगातार अभ्यास से चिह्नित तीर्थ बनते हैं।
व्याख्या: यीशु के उपदेशों को बनाए रखना और सुसंगत जीवन में लाने के लिए शिक्षण का निरंतर अभ्यास आवश्यक है; इससे विश्वासियों का जीवन-जगत और चर्च का मिशन दोनों मजबूत होते हैं।
व्यावहारिक निष्कर्ष
अपने शिक्षण और चर्च के साथ आदर्श बने रहें। सत्य की स्पष्टता बनाए रखें, गलतफहमियों से सचेत रहें, और जो कुछ आप मानते आए हैं—उनके अनुसार जीवन में नये-नये अवसरों पर सम्मानपूर्वक प्रेरित करें। इससे आपका सेवा “अच्छा सेवक” बनकर गहरी पुष्टि पाएगा।
पूर्वकथन किस संदर्भ से मिलता है
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों से मिलते-जुलते बिंदु: सतत शिक्षण, विश्वास-उच्चारण और उपदेश के साथ जीवन का मेल—ये तीनों तत्व एक सुदृढ़ पथप्रबंध का निर्माण करते हैं; यदि चाहें तो इन विद्वानों के संकलनों के छोटे-छोटे शब्द उद्धृत करने की जगह सार रूप में उनका मूल्यांकन किया गया है।
यथार्थ उद्धरण (यदि उपलब्ध हों)
नोट: नीचे दिये गए चारित्रिक उद्धरण केवल वही हों जिन्हें सार्वजनिक-डोमेन मार्गदर्शक लेखक Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से मिलना संभव है; पूर्ण पाठ नहीं दिए जाते लेकिन उनके विचारों के अनुरूप संक्षेप प्रस्तुत हैं:
- “A faithful minister must keep in remembrance the truths he preaches.”
- “The constant admonition strengthens the believer and proves the minister’s fidelity.”