Old Testament
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सभोपदेशक 5:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जब तू परमेश्वर के लिये मन्नत माने, तब उसके पूरा करने में विलम्ब न करना; क्योंकि वह मूर्खों से प्रसन्न नहीं होता। जो मन्नत तूने मानी हो उसे पूरी करना।
सभोपदेशक 5:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 5:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 76:11 (HINIRV) »
अपने परमेश्वर यहोवा की मन्नत मानो, और पूरी भी करो; वह जो भय के योग्य है*, उसके आस-पास के सब उसके लिये भेंट ले आएँ।

गिनती 30:2 (HINIRV) »
जब कोई पुरुष यहोवा की मन्नत माने, या अपने आप को वाचा से बाँधने के लिये शपथ खाए*, तो वह अपना वचन न टाले; जो कुछ उसके मुँह से निकला हो उसके अनुसार वह करे। (मत्ती 5:33)

भजन संहिता 66:13 (HINIRV) »
मैं होमबलि लेकर तेरे भवन में आऊँगा मैं उन मन्नतों को तेरे लिये पूरी करूँगा*,
सभोपदेशक 5:4 - मन्नत और कृतज्ञता का महत्व
यह अंश क्लेशी भरे जीवन के बीच परमेश्वर के साथ हमारी प्रतिनिधि साधना की एक ठोस और सरल सीख देता है: मन्नत करना और उसे पूरा करना—दोनों क्रम बनाकर चलते हैं। यहां मन्नत एक संकल्प है, पर उसका पालन निष्ठा और संयम का परीक्षण है। हम अक्सर अपनी इच्छाओं के अनुसार तुरंत फल चाहते हैं; पर यीशु से प्रेरित साहित्य తెలిసిందే कि परमेश्वर की योजना में देरी भी साक्षात्कार बन सकती है, जब तक हम धैर्य और ईमानदारी से अपने वायदे निभाते हैं।
कथन का पाठ और संदर्भ
5:4 में प्रस्तुत कहा गया है कि “जब तू परमेश्वर के लिये मन्नत माने, तब उसके पूरा करने में विलम्ब न करना; क्योंकि वह मूर्खों से प्रसन्न नहीं होता। जो मन्नत तूने मानी हो उसे पूरी करना।” यह पंक्ति एक ठोस व्यवहारिक निर्देश है: प्रार्थना या प्रतिज्ञा के समय अपनी संकल्प को दृढ़ करना, और फिर उसका पालन करना। मन्नत वह मार्ग है जो व्यक्ति को ईश्वर के साथ प्रत्यक्ष संबंध में लाता है, परंतु उसका वास्तविक परीक्षण तब होता है जब इंतजार और कठिनाइयाँ सामने आएँ।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
1) प्रभु की इच्छा में संकल्प और गतिविधि: मन्नत केवल शब्द नहीं, बल्कि एक आस्था-व्यवहार है जिसमें व्यक्ति अपने दायित्व को समझकर उसे निभाता है।
2) धैर्य के साथ वादा पूरा करना: परमेश्वर विलम्ब कर सकता है, पर उसकी पूर्णता विश्वसनीय है; इसलिए हमें अपनी प्रतिज्ञाओं के साथ स्थिर और ईमानदार रहना चाहिए।
3) गैर-उत्साह मूर्खता से बचना: परमेश्वर मूर्खों की प्रसन्नता नहीं चाहते; वे नहीं जो केवल बोलते हैं, बल्कि जो सही समय पर सही कार्य करते हैं।
सम्बंधित बाइबल संदर्भ
जीवन पर लगाव योग्य अनुप्रयोग
कथन का सार
यह verse हमें बताता है कि मन्नतें केवल उच्चारण नहीं, बल्कि एक बद्ध प्रतिज्ञा हैं जिन्हें जीवंत विश्वास और सत्यनिष्ठा के साथ निभाना चाहिए। परमेश्वर को हमारी ईमानदारी पसंद है; इसलिए वह हमारे धैर्य और धारणाओं के साथ काम करता है।
शीर्ष संदर्भों का छोटा अवलोकन
हार्दिक_cross_refs: याकूब 5:12, रोमियों 12:12, नीतिवचन 20:25 — ये सभी संकेत देते हैं कि प्रार्थना और प्रतिज्ञा को समय और व्यवहार से सहयोगित करना चाहिए, ताकि आस्था फल दे सके।
नोट: इस आलेख में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke जैसी सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से सीधे उद्धरण तब शामिल होंगे केवल अगर उपलब्ध हों। यहाँ आवश्यक सार को आधुनिक हिंदी पाठ के अनुरूप ढाला गया है ताकि पाठक आसानी से समझ सकें।