Old Testament
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सभोपदेशक 5:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
भूमि की उपज सब के लिये है, वरन् खेती से राजा का भी काम निकलता है।
सभोपदेशक 5:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 5:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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नीतिवचन 28:19 (HINIRV) »
जो अपनी भूमि को जोता-बोया करता है, उसका तो पेट भरता है, परन्तु जो निकम्मे लोगों की संगति करता है वह कंगालपन से घिरा रहता है।

उत्पत्ति 3:17 (HINIRV) »
और आदम से उसने कहा, “तूने जो अपनी पत्नी की बात सुनी, और जिस वृक्ष के फल के विषय मैंने तुझे आज्ञा दी थी कि तू उसे न खाना, उसको तूने खाया है, इसलिए भूमि तेरे कारण श्रापित है। तू उसकी उपज जीवन भर दुःख के साथ खाया करेगा; (इब्रा. 6:8)

उत्पत्ति 1:29 (HINIRV) »
फिर परमेश्वर ने उनसे कहा, “सुनो, जितने बीजवाले छोटे-छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर हैं और जितने वृक्षों में बीजवाले फल होते हैं, वे सब मैंने तुमको दिए हैं; वे तुम्हारे भोजन के लिये हैं; (रोम. 14:2)
सूत्रगत परिचय
सभोपदेशक 5:9 वह सूचित करता है कि भूमि की उपज और खेती–कर्म सभी के हित के लिए है, और यह इतना व्यापक है कि राजा तक के कार्य भी इससे प्रेरित और समर्थित होते हैं। यह पद वित्तीय लाभ, सामाजिक व्यवस्था और नींव के रूप में मेहनत की महत्ता की पुष्टि करता है। प्रदत्त उपदेश हमारे दैनिक जीवन में मेहनत, निष्कल्पता और प्रभु-विश्वास के संतुलन की ओर इशारा करता है।
पद का संदर्भ और अर्थ
यह verse मोल-तोल का एक भाग है जहाँ लेखक समय और संसाधनों के उचित उपयोग पर जोर दे रहा है। भूमि की उपज सब के लिए है—यानी प्रकृति की संसाधन-संरचना समतापरक, दयालु वितरण के साथ व्यावहारिक उपयोग हेतु है। फिर कहता है कि खेती से राजा का भी काम निकलता है—शासन और शासन व्यवस्था भी खेती-बाड़ी से समर्थित होती है, और शासन का लाभ सभी तक पहुँचता है। यह सत्ता और श्रम के बीच संतुलन की दृष्टि से निहित है कि संसाधन सिर्फ व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि सार्वजनिक कल्याण के लिए साझा होते हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
पहचानें कि परमेश्वर ने प्रकृति को इस प्रकार बनाय है कि मेहनत और बाजार-व्यवस्था से समाज की आवश्यकता पूरी हो। यदि व्यक्ति या सरकार कड़ी मेहनत को या खेती के लाभों को सही-सीमा में रखे, तो सामाजिक शांति और समृद्धि संभव है। आसक्ति और भ्रष्टाचार के बिना, भूमि की उपज एक साधन है—देह-धर्म के काम के लिए भी एक साधन, न कि केवल वैयक्तिक लाभ का स्रोत।
अन्य बाइबिल संदर्भों के साथ तुलना
- कुरिन्थियों 4:2: सेवकत्व और विश्वसनीयता की महत्ता; परिश्रम के प्रति जिम्मेदारी।
- प्रेरितों के काम 20:35: “खुद पर नहीं, बल्कि दूसरों की सेवा में दी जाने वाली खुशी”—मेहनत और दयालुता का संतुलन।
- उत्पत्ति 2:15: मनुष्य का उद्देश्य—भूमि की देखभाल और पालन-पोषण, ताकि कार्य और आध्यात्मिकता एक साथ जीवित रहें।
संयोगी टिप्पणी (संदर्भित टिप्पणियाँ)
Matthew Henry के विचारों के अनुसार यह पद संसाधनों के उचित वितरण और नीतिगत जिम्मेदारी का संकेत देता है; Albert Barnes इसे समाज में भूमि के प्रयोजन के रूप में देखते हैं, जहां खेती-व्यवसाय से सामान्य कल्याण संभव है; Adam Clarke इसे वास्तविक-व्यवहार की प्रेरणा मानते हैं—धन-संसाधनों के दायित्व और दीन-हीन के लिए उपयोग। (नोट: नीचे दी गई पंक्तियाँ केवल पाठांतर उद्धरण के लिए हैं, मूल पाठ के संदर्भ में संक्षेपित हैं.)
छोटे cross-reference विचार
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि मेहनत, नैतिक वितरण और समाज के लिए लाभकारी उपयोग—तीनों का संतुलित समावेश ही जनता के लिए स्थायी कल्याण देता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप
सभोपदेशक 5:9 से हमें यह सीख मिलती है कि भूमि की उपज सबके लिए है और खेती से राजा के कार्य भी निकलते हैं—यानी संसाधनों का साझा, परिश्रम और सार्वजनिक कल्याण के लिए उपयुक्त उपयोग ही सही जीवन-व्यवस्था की कुंजी है। यह संदेश व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर समाज के लिए सकारात्मक योगदान की मांग करता है।