Old Testament
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सभोपदेशक 5:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और वह किसी बुरे काम में उड़ जाता है; और उसके घर में बेटा उत्पन्न होता है परन्तु उसके हाथ में कुछ नहीं रहता।
सभोपदेशक 5:14 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 5:14 समानांतर पद और संबंधित वचन
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हाग्गै 2:16 (HINIRV) »
उन दिनों में जब कोई अन्न के बीस नपुओं की आशा से जाता, तब दस ही पाता था, और जब कोई दाखरस के कुण्ड के पास इस आशा से जाता कि पचास बर्तन भर निकालें, तब बीस ही निकलते थे।

मत्ती 6:19 (HINIRV) »
“अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो; जहाँ कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं, और जहाँ चोर सेंध लगाते और चुराते हैं।

सभोपदेशक 2:26 (HINIRV) »
जो मनुष्य परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा है, उसको वह बुद्धि और ज्ञान और आनन्द देता है; परन्तु पापी को वह दुःख भरा काम ही देता है कि वह उसको देने के लिये संचय करके ढेर लगाए जो परमेश्वर की दृष्टि में अच्छा हो। यह भी व्यर्थ और वायु को पकड़ना है*।
सभोपदेशक 5:14 — संदर्भ में संक्षिप्त व्याख्या
यह पद सभोपदेशक की उस चर्चा का हिस्सा है जहाँ लेखक सांसारिक असफलताओं और न्याय की अनिश्चितता पर विचार करता है। यह वचन उन पुरुषों का अंकन करता है जिनका जीवन 'बुरे काम' से सराबोर है; फिर भी वे संतानोत्पत्ति का आनंद पाते हैं, परन्तु संसारिक संपत्ति या प्रेरित परिणाम नहीं पाते — उनके हाथ खाली रहते हैं। यह वचन वैचारिक रूप से असंतुलन और जीवन के अनदेखे परिणाओं पर प्रकाश डालता है।
मुख्य अर्थ
यह पद बताता है कि कुछ लोग जो अपने जीवन में पाप या बुरे कर्म करते हैं, फिर भी वैवाहिक या जैविक सफलता प्राप्त करते हैं—उनके घर में संतान जन्म लेती है—परन्तु उनके प्रयास, लाभ या हस्तक्षेप का स्थायी फल उनसे नहीं रहता। यहाँ लेखक ने जीवन के बनावटी क्षणों और दीर्घकालिक परिणामों के बीच टकराव को रेखांकित किया है: बाहरी दिखावा या क्षणिक सुख सदा अर्थपूर्ण या टिकाऊ नहीं होता।
मुख्य विषय
संदर्भित पद और सम्बन्ध
सभोपदेशक 3 और 8 में भी जीवन की विडम्बनाओं और समयों के अनुसार होने वाली घटनाओं पर चर्चा है; वहां भी यह विचार मिलता है कि किसी कर्म का फल तुरंत या प्रत्यक्ष नहीं दिखता। (सभोपदेशक 3:1-8 के विचार इस पद के परिप्रेक्ष्य को विस्तारित करते हैं।)
भजन संहिता में प्रत्यक्ष न्याय और परिणामों की तसल्ली नहीं मिलती; कई भजनों में पापी के क्षणिक सुख और अंतिम भाग्य के बीच अंतर पर ध्यान है—यहां से मिलती-जुलती चर्चा समझी जा सकती है।
व्यावहारिक प्रतिबिंब
इस पद की व्याख्या हमें सतर्क करती है कि बाह्य रूप से मिले सुख या सामाजिक उपलब्धि आत्मसंतोष का आखिरी पैमाना नहीं है। परिवारवृद्धि या क्षणिक सफलता को ईश्वरीय या नैतिक प्रतिबद्धता के बराबर नहीं मानना चाहिए। वास्तविक विवेक यह है कि हम कर्मों के नैतिक प्रभावों और उनके दीर्घकालिक परिणामों पर ध्यान दें। जब जीवन में असंगति दिखे—जैसे कि पाप के बावजूद संतान या अस्थायी लाभ—तो वह हमें अपने उद्देश्य, संबंध और उत्तरदायित्व पर नए सिरे से विचार करने के लिए प्रेरित करे।
छोटा सार और समेकित टिप्पणी
सभोपदेशक 5:14 यह सिखाता है कि बाहरी सफलताएँ और पारिवारिक प्रसन्नताएँ स्वयं में जीवन का परम मानदण्ड नहीं हैं, खासकर जब वे बुरे मार्ग से प्राप्त हों। लेखक जीवन के सतही और गहरे परिणामों के बीच फर्क दिखाता है और पाठक से आह्वान करता है कि वह अपने कर्मों के स्थायी प्रभावों को समझे।
संक्षिप्त उद्धरण और संदर्भित टिप्पणियाँ
मैथ्यू हेनरी की शैली में विचार करते हुए, वे अक्सर कहते हैं कि जीवन की अस्थिरताएँ और ईश्वर की न्यायसंगत व्यवस्था मनुष्य की सीमित दृष्टि से छिपी रहती हैं; परन्तु यहाँ कोई शाब्दिक उद्धरण शामिल नहीं किया गया है। अलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की टिप्पणियों में भी इसी तरह का तर्क दिखाई देता है कि सभोपदेशक बौद्धिक निरीक्षण से जीवन के विरोधाभासों को उजागर करते हैं।