Old Testament
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हाग्गै 2:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उन दिनों में जब कोई अन्न के बीस नपुओं की आशा से जाता, तब दस ही पाता था, और जब कोई दाखरस के कुण्ड के पास इस आशा से जाता कि पचास बर्तन भर निकालें, तब बीस ही निकलते थे।
हाग्गै 2:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हाग्गै 2:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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हाग्गै 1:6 (HINIRV) »
तुम ने बहुत बोया परन्तु थोड़ा काटा; तुम खाते हो, परन्तु पेट नहीं भरता; तुम पीते हो, परन्तु प्यास नहीं बुझती; तुम कपड़े पहनते हो, परन्तु गरमाते नहीं; और जो मजदूरी कमाता है, वह अपनी मजदूरी की कमाई को छेदवाली थैली में रखता है।

नीतिवचन 3:9 (HINIRV) »
अपनी सम्पत्ति के द्वारा और अपनी भूमि की सारी पहली उपज देकर यहोवा की प्रतिष्ठा करना;

हाग्गै 1:9 (HINIRV) »
तुम ने बहुत उपज की आशा रखी, परन्तु देखो थोड़ी ही है; और जब तुम उसे घर ले आए, तब मैंने उसको उड़ा दिया। सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है, ऐसा क्यों हुआ? क्या इसलिए नहीं, कि मेरा भवन उजाड़ पड़ा है* और तुम में से प्रत्येक अपने-अपने घर को दौड़ा चला जाता है?
हाग्गै 2:16 — अर्थ का स्पष्ट संकेत
इस पद का सीधा अर्थ यह है कि उन दिनों सामाजिक-आर्थिक उलटफेर की स्थिति थी: मेहनत से उगाही के बजाय निराशाजनक कमी मिलती थी। जब लोग आह्वान करते थे कि यह माप नपे—जैसे अन्न के बीस नपुओं के बराबर—तो उन्हें केवल दस मिलते, और दाखरस के लिए पचास बर्तन भरने की आशा पर भी बीस ही निकलते। यह कमी और निराशा बताती है कि उस समय के सामाजिक-आर्थिक ढांचे में लाभ-हानि का संतुलन टूट चुका था।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
हाग्गै के भविष्यवक्ताओं का उद्देश्य ईश्वर की सभा और मंदिर के पुनर्निर्माण के अध्याय से जुड़ा हुआ है। ऐसे समय में जब परमेश्वर की महिमा पुनःस्थापना की जानी थी, जनजीवन की उपज और उद्यमशीलता में रुकावटें स्पष्ट थीं। यह वाक्य विशेष रूप से विगत दिनों के व्यापर-व्यवस्था में गिरावट का चित्रण करता है—भरोसे के बजाय कमी, और समृद्धियाँ की घटती धारणा।
व्याख्यात्मक बिंदु
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और उनके अर्थ
1) हाग्गै 1:9— प्रतिफल का पीछे हटना धार्मिक अनुष्ठान से प्रेरणा को प्रभावित करता है; यहाँ भी असंतुलित परिणाम दिखते हैं, जो पंथिक-आर्थिक असंतुलन की ओर इशारा करता है।
2) हाग्गै 2:19— जो बुवाई की नई शुरुआत देता है, वह अनुदान और आशीष के कारण आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है; यह संकेत करता है कि परमेश्वर अनुदान बनाए रखे तो घटती कमी भी सुधरेगी।
3) मरकुस 4:20— बीज के परिणाम की विविधता दिखाती है; सही प्रकार के कान्तिकर्म से फल मिलते हैं, भले अभी कमी हो।
सूक्ष्म पाठकीय निष्कर्ष
इस पद में आर्थिक कमी धार्मिक-आत्मिक पुनर्जागरण के संदर्भ में एक चेतावनी है: जब लोग विश्वास में ढीले हो जाते हैं या प्रभु के आशीष से विमुख रहते हैं, तब सफलता की सामान्य माप घट जाती है। एक सतर्कता यह भी है कि पुनर्निर्माण के समय भरोसा न टूटे, बल्कि ईश्वर की योजना को मानकर धैर्य और व्यवस्था बनाए रखी जाए।
संक्षिप्त सुसंगत निष्कर्ष
संक्रमण और व्यावहारिक takeaways
- कठिन समय में ईश्वर की सत्ता और उनकी योजना पर भरोसा रखें; यह हौंसला देता है कि कमी भी समय के साथ सुधरेगी।
- समुदाय के बीच सहयोग और सही व्यावहारिक निर्णय, जैसे अन्न-और-धर्म के संतुलन, पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक है।
नोट: नीचे दी गई अस्पष्ट उद्धरण केवल संदर्भ हेतु हैं; पूर्ण पद-ग्रंथ नहीं दिये गये।