Old Testament
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हाग्गै 2:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
“यहूदा के अधिपति जरुब्बाबेल से यह कह: मैं आकाश और पृथ्वी दोनों को हिलाऊंगाकँपाऊँगा, (मत्ती 24:29, लूका 21:26)
हाग्गै 2:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हाग्गै 2:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
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जकर्याह 4:6 (HINIRV) »
तब उसने मुझे उत्तर देकर कहा, “जरुब्बाबेल के लिये यहोवा का यह वचन है: न तो बल से, और न शक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा होगा, मुझ सेनाओं के यहोवा का यही वचन है।

एज्रा 5:2 (HINIRV) »
तब शालतीएल का पुत्र जरुब्बाबेल और योसादाक का पुत्र येशू, कमर बाँधकर परमेश्वर के भवन को जो यरूशलेम में है बनाने लगे; और परमेश्वर के वे नबी उनका साथ देते रहे*।

हाग्गै 1:1 (HINIRV) »
दारा राजा के राज्य के दूसरे वर्ष के छठवें महीने के पहले दिन, यहोवा का यह वचन, हाग्गै भविष्यद्वक्ता के द्वारा, शालतीएल के पुत्र जरुब्बाबेल के पास, जो यहूदा का अधिपति था, और यहोसादाक के पुत्र यहोशू महायाजक के पास पहुँचा
हाग्गी 2:21 पर दृष्टिकोण: आकाश और पृथ्वी हिलाने की घोषणा
मुख्य निहितार्थ: यह पद परमेश्वर के सार्वभौमिक राज्य और उद्धार की योजना के निर्णायक कदम की घोषणा करता है। यहूदा के जलूसपति जरूबल के प्रति ईश्वर की शक्ति और सत्ता को दर्शाता है: वह संसार के स्वामी के रूप में सब कुछ हिला-डुला देगा ताकि उसके उद्देश्य पूरे हों। यह उद्घोष נתनात्मक है—प्रभु के निर्णायक हस्तक्षेप से राष्ट्र-राज्यों और उनके प्रसिद्ध स्थलों के ढांचे का अंत और परमेश्वर के अद्वितीय 중심त्व का उद्घाटन होता है।
पाठ-संदर्भ में साहित्यिक संदर्भ
यह संदर्भ Haggai–प्रकाशन के समय का है जब यहूदा में दोबारा अस्थायी मंदिर बन रहा था। इस घटना में परमेश्वर की प्रेरणा और अनुमति स्पष्ट है कि भले ही मानव योजनाएं आधुनिक समय तक दीर्घकालीन हों, परमेश्वर की योजना सर्वोपरि है। अन्य ग्रंथों मेंयथा मत्ती 24:29 तथा लूका 21:26 में भी प्राकृतिक आक्रांतियाँ और आकाश-स्तर की घटनाओं के उल्लेख से यह संकेत मिलता है कि अंत के समय परमेश्वर का राज्य दृढ़ होगा और सभी मानव-निर्भरता एक क्षण के लिए भी विश्वसनीय नहीं होगी।
स्थूल theological significance
1) सत्ता का एकता-पूर्ण प्रदर्शन: आकाश और पृथ्वी दोनों का हिलना यह देता है कि परमेश्वर अपने समस्त सृजन-राज्य के प्रभु हैं।
2) उद्धार-योजना की तेजस्विता: मंदिर-संरचना के पुनर्निर्माण के संदर्भ में यह घोषणात्मक वचन यह सुनिश्चित करता है कि ईश्वर की वाचा अपने समय पर पूर्ण होगी।
3) न्याय और अनुग्रह का संतुलन: यह चेतावनीभी है कि अवमानना या अधर्म के विरुद्ध ईश्वर की क्रोध-आहुतियाँ आधुनिक समय तक ठहर नहीं सकतीं, परन्तु विश्वास में रहने वालों के लिए आशा की कुंजी भी यही है कि God is faithful to fulfill His promises.
पवित्रशास्त्री-निरीक्षण (Cross-references)
प्रश्न-चिंतन के लिए
संक्षेप निष्कर्ष
हाग्गी 2:21 परमेश्वर की सार्वभौमिक सत्ता और समय-निर्णय का उद्धोष है। यह कहता है: मैं आकाश और पृथ्वी दोनों को हिला दूँगा—यानी मेरी महा-योजना में किसी मानव-योजना की अहम भूमिका न रहेगी। यह आश्वासन हमें यह बताता है कि परमेश्वर की योजना निरंतर और निडर है, और उसके समय पर, द्वारों के भीतर-विहगन भी पवित्र उद्देश्य पूरे होंगे।
टिप्पणियाँ: M. Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के संक्षिप्त शब्दों से अगर कोई उद्धरण मिले तो यहाँ उद्धृत किए जा सकते हैं, परन्तु पाठ-धारा में संक्षेप में समाहित किया गया है ताकि यह पाठ सीधे संदर्भित न होकर एकात्मक संकल्पना दे।