Old Testament
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हाग्गै 2:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
फिर सातवें महीने के इक्कीसवें दिन को यहोवा का यह वचन हाग्गै भविष्यद्वक्ता के पास पहुँचा,
हाग्गै 2:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हाग्गै 2:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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हाग्गै 1:1 (HINIRV) »
दारा राजा के राज्य के दूसरे वर्ष के छठवें महीने के पहले दिन, यहोवा का यह वचन, हाग्गै भविष्यद्वक्ता के द्वारा, शालतीएल के पुत्र जरुब्बाबेल के पास, जो यहूदा का अधिपति था, और यहोसादाक के पुत्र यहोशू महायाजक के पास पहुँचा

हाग्गै 2:10 (HINIRV) »
दारा के राज्य के दूसरे वर्ष के नौवें महीने के चौबीसवें दिन को, यहोवा का यह वचन हाग्गै भविष्यद्वक्ता के पास पहुँचा,

वचन का सीधा अर्थ
हाग्गै 2:1 का अभिप्राय यह है कि ngosuku सातवें महीने के इक्कीसवें दिन यहोवा का संदेश भविष्यद्वक्ता हाग्गै के पास पहुँचा। यह समय ईश्वर की ओर से संदेश पहुँचाने का निर्णायक क्षण था, जब यहूदियों को नए चरण की प्रेरणा मिली और मंदिर पुर्ननिर्माण की गति सुधरी।
संदर्भ-भूमिका
यह बाइबिल अध्याय हाग्गै के समय का है, जब यहूदियों ने चांस के बाद भी मंदिर नहीं बनवाया था और लोग अपने निजी घरों के निर्माण में मग्न थे। परमेश्वर ने हाग्गै के माध्यम से दो बार आवाज दी कि मंदिर की ईश्वर-उद्धार-योजना प्राथमिकता होनी चाहिए; यहाँ 2:1 की पंक्ति संकेत देती है कि एक नया संदेश एक विशेष तिथि पर पहुँचा है—यह एक क्रमिक और योजनाबद्ध उद्धोषणा का हिस्सा है।
व्याख्यात्मक निरीक्षण
मूल विचारधारा के साथ एक छोटा-सा रेक्ख
अन्यान्य पवित्र ग्रंथ से संगत संदर्भ
हाग्गै 1:15 — मंदिर निर्माण के पहले उत्साह और आश्वासनों की पुनरावृत्ति; यह दिखाता है कि समय-सारिणी में बाधाओं के बावजूद प्रेरणा कैसे पुनः उभरती है।
यिर्मयाह 29:10 — समय के क्रम और भगवान की योजना का संदर्भ देता है कि कब विश्राम और पुनर्निर्माण संभव हो।
एज़र 4:24 — पूर्ववर्ती बाधाओं के बावजूद परमेश्वर की योजना पूरी होने की अभिलाषा को व्यक्त करता है, जो यहूदियों के मंदिर-निर्माण के पुनरारम्भ के साथ जुड़ा है।
हिंदी पंक्ष-पंक्ति का संक्षेप
यह वचन यह दर्शाता है कि परमेश्वर का संदेश एक निर्धारित समय पर आता है, ताकि समुदाय फिर से धार्मिक उन्नति के मार्ग पर बढ़े और मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रेरणा जागृत हो।
व्यावहारिक takeaway
समुदाय के लिए सीख: सही समय पर सही कार्य शुरू करना, बाह्य योजनाओं के साथ आंतरिक आध्यात्मिक पुनःस्थापना भी प्राथमिक होनी चाहिए। दृढ़ता के साथ सतर्क रहते हुए, प्रभु की योजना के अनुसार कृतज्ञता और परिश्रम से एक साथ आगे बढ़ना चाहिए।