Old Testament
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हाग्गै 2:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि सेनाओं का यहोवा यह कहता है, अब थोड़ी ही देर बाकी है कि मैं आकाश और पृथ्वी और समुद्र और स्थल सब को कँपित करूँगा। (मत्ती 24:29, लूका 21:26, इब्रा. 12:26-27)
हाग्गै 2:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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हाग्गै 2:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 12:26 (HINIRV) »
उस समय तो उसके शब्द ने पृथ्वी को हिला दिया पर अब उसने यह प्रतिज्ञा की है, “एक बार फिर मैं केवल पृथ्वी को नहीं, वरन् आकाश को भी हिला दूँगा।” (हाग्गै. 2:6, न्याय. 5:4, भज. 68:8)

यशायाह 10:25 (HINIRV) »
क्योंकि अब थोड़ी ही देर है कि मेरी जलन और क्रोध उनका सत्यानाश करके शान्त होगा

यहाग 2:6 — संदर्भ और स्पष्टता
यहोवा सेनाओं के परम ईश्वर का संदेष है कि अत्यंत क्षणभर के बाद बड़े बदलाव होंगे—आकाश, पृथ्वी, समुद्र और भूमि सब काँप उठेंगे। यह भविष्यवाणी हाग्गई के समय से जुड़ी है जब ईश्वर अपना वचन पूरा करने के लिए प्रतीक्षित कदम उठाते हैं। मत्ती 24:29, लूका 21:26 और इब्रानी 12:26-27 जैसे नए नियम के संदर्भ इस ताबड़तोड़ परिवर्तन की अग्रिम चेतावनी को पुष्ट करते हैं कि ब्रह्मांडिक हलचलें कुछ समय के भीतर होंगी।
मुख्य अर्थ
यह वाक्य यह सुनिश्चित करता है कि ईश्वर का निर्णय समय पर और सार्वभौम है: “थोड़ी ही देर बाकी है”—यानी अब आकाश और पृथ्वी की स्थिरता के भीतर अस्थायी अनिश्चितता है, परन्तु परमेश्वर के पूर्ण योजना के अनुसार अंततः वह सब ठहर जाएगा और सारे विश्व पर उसकी राज सत्ता स्थापित होगी। यह संदेश आस्था के प्रति विश्वासियों को आश्वस्त करता है कि कटु चढ़ावों के बीच भी ईश्वर की योजना कायम रहेगी।
तीन मुख्य विषय
संबंधित क्रॉस-रेफरेंसेस
• मत्ती 24:29 और लूका 21:26: इन संदर्भों में आकाश और पृथ्वी के काँपने का वर्णन बताता है कि末 समय में ईश्वर के शासन की महान धक्का-मैदान होगी; यह संकेत है कि सांसारिक सत्ता के स्थानांतरण की तैयारी हो रही है।
• इब्रानी 12:26-27: यहाँ का संदर्भ बताता है कि प्रकृति के कंपन से एक उच्च-आधारीय परिवर्तन आता है जो दिक़्कतों से परे ईश्वर की चोटी की आवाज़ को उजागर करता है।
• हजरत पतरस (कथा-संदर्भ): भविष्य के कड़े समय का ध्यान हमें पवित्र जीवन की गरिमा की ओर प्रेरित करता है कि हम दया और धर्म में टिके रहें।
व्यावहारिक विचार
यही औरों के लिए प्रेरणा है कि हमारी पृथक-स्थिति न रंग-रंगीन शॉर्टकट्स पर निर्भर हो, बल्कि परमेश्वर के भविष्य के योजनाओं पर टिके रहें। कठिन समय में भी हम ईश्वर की सच्चाई पर भरोसा रखें, और सामाजिक-आर्थिक उथल-पुथल के बीच नैतिकता और धार्मिकता को बनाए रखें।
संक्षेप
हाग्गई 2:6 यह स्मरण कराता है कि भगवान के समय में आकाश, पृथ्वी और समुद्र सब कुछ कांप उठेगा ताकि उसकी महिमा और न्याय स्थापित हो सके। यह भी कहता है कि हमारी अपेक्षा को दृढ़ बनाएं—क्योंकि संरचनात्मक परिवर्तन आएंगे, पर ईश्वर की योजना अचल है।