Old Testament
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यशायाह 10:25 — तुरंत उत्तर और क्रोध का शमन
परिचय-स्थिति: यह पाठ यशायाह kitab के मध्य भाग में आया है जहाँ परमेश्वर के गैहिक निर्णयों और लोगों के लिए उसकी न्याय-योजना का स्पष्टीकरण मिलता है। यहाँ यहूदियों के विरुद्ध अस्सूरी शक्ति के विरुद्ध परमेश्वर की जलन और क्रोध का संकेत है, जो कुछ क्षणों में शमन होकर स्थिर होगा। भगवान का यह क्रोध अंतिम नहीं, बल्कि उद्धार के लिए शिक्षाप्रद प्रक्रिया का भाग है।
पाठ का मुख्य संदेश: परमेश्वर की जलन और क्रोध के समयबद्ध शमन
यह पंक्ति बताती है कि परमेश्वर की जलन और क्रोध कुछ समय के लिए रहता है, परन्तु तब वह अपने सत्यानाश करने के बाद शांति और व्यवस्था स्थापित करेगा। “थोड़ी ही देर है” का आशय है कि दुष्टत्व की अवधि सीमित है, और क्रोध के बाद भी उद्धार का मार्ग खुला रहेगा। यह संदेश विश्राम के बजाय चेतावनी का भी है कि क्रूर शक्तियाँ अविराम नहीं चलेंगी — परमेश्वर का निर्णय चक्रीय नहीं, बल्कि न्यायपूर्ण क्रम में आता है।
गस्वर-वाक्य और महत्वपूर्ण शब्द
संदर्भ-युक्ति (Cross-references)
यह बहुधा प्रकाशित पूर्वानुमान से जुड़ता है कि परमेश्वर समय-समय पर न्याय करता है, फिर उद्धार का कार्य करता है।
इन संदर्भों में साफ संकेत मिलता है कि परमेश्वर की जलन समय पर समाप्त होकर अपनी योजनाओं को पूर्ण करता है—न्याय के साथ उद्धार भी साथ आता है।
प्रेम-आधारित नैतिक-शिक्षा और आज का अनुप्रयोग
1) ईश्वर के क्रोध का उद्देश्य पाप के परिणामों को रोकना है, जिससे लोग फिर से सत्य और पवित्रता की ओर लौटें। 2) अभी भी हमारे समय में भी बुराई सीमित है—हम आश्वस्त रहें कि विपत्ति हल होने के बाद परमेश्वर शांति देंगे। 3) अपने दिल को उनकी आवाज के लिए तैयार रखें: यदि आप पाप के कारण दबाव में हैं, तो पुरानी जलन के बजाय उद्धार का मार्ग अपनाएँ।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (Public-domain टिप्पणीकारों) और संक्षेप
यशायाह 10:25 पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की सामान्य समालोचनात्मक दृष्टि से एकीकृत विचार इस प्रकार हैं: परमेश्वर की जलन और क्रोध की प्रकृति दयालु उद्धार के लिए प्रेरित होती है; घड़ी समय पर क्रोध समाप्त होकर शांति और पुनःस्थापना आती है। Henry और Clarke के समान विचार में यह कहा गया है कि परमेश्वर का न्याय पाप के अंत की चेतावनी है, जो तब परिवर्तन के अवसर पैदा करता है। Barnes इस क्रम में यह जोड़ते हैं कि बिना परिवर्तन के क्रोध स्थायी नहीं रहता, क्योंकि परमेश्वर इच्छुक है कि लोग repent करें और शांति से रहें। यदि उपयुक्त हो तो नीचे के उद्धरणों से संकेत मिलते हैं: “क्रोध तब तक रहता है जब तक परिवर्तन नहीं होता।” (उद्धरण केवल ठीक वही शब्द जहां उपलब्ध हों; पूर्ण टेक्स्ट नहीं दिए जा रहे हैं)
निष्कर्ष रूप में, यह पाठ हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की जलन और क्रोध एक समय-बंधी प्रक्रिया है जो अधर्म के अंत की तैयारी करती है और उसके बाद शांति, न्याय और उद्धार की गति चालू हो जाती है।