दानिय्येल 11:36 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“तब वह राजा अपनी इच्छा के अनुसार काम करेगा, और अपने आप को सारे देवताओं से ऊँचा और बड़ा ठहराएगा; वरन् सब देवताओं के परमेश्‍वर के विरुद्ध भी अनोखी बातें कहेगा। और जब तक परमेश्‍वर का क्रोध न हो जाए तब तक उस राजा का कार्य सफल होता रहेगा; क्योंकि जो कुछ निश्चय करके ठना हुआ है वह अवश्य ही पूरा होनेवाला है।

दानिय्येल 11:36 पद-दर-पद बाइबल टीका

क्यों यह पद मायने रखता है

दानिय्येल 11:36 एक निर्णायक पंक्ति है जो भविष्यवाणी के उस चक्र को स्पष्ट करती है जहाँ एक दुराचारी राजा अपनी आत्मकेंद्रित इच्छा के अनुसार चलकर सत्ता और देवी-देवताओं से ऊपर ठहरने का दावा करता है। यह पद शक्ति, घमंड और परमेश्वर के प्रतिवाद के विषयों पर प्रकाश डालता है और यह बताता है कि मानव इतिहास में कुछ घटनाएँ परमेश्वर के अनुमोदन के बिना भी सुस्पष्ट नियतचित् स्वीकार की जा सकती हैं—यदि परमेश्वर ने समय तक उसका नियंत्रण न किया हो।

मूल संदर्भ

दानिय्येल अध्याय 11 व्यापक राजनीतिक और धार्मिक संघर्षों का वर्णन करता है—विशेषकर उत्तर और दक्षिण के राजाओं के मध्य। इस विशेष आयत में वर्णित राजा समकालीन या अन्तिम-कालीन दुष्ट नेता का प्रतीक है, जो अपनी इच्छानुसार कार्य करता है और स्वयं को सभी देवताओं से ऊँचा कर बैठता है। पायानुसार यह वचन उस व्यापक छवि का हिस्सा है जहाँ बुराई की ऊँचाई एक सीमा तक चलेगी, पर परमेश्वर के क्रोध और न्याय की भी एक निश्चित सीमा होगी।

मुख्य संदेश

1) घमंड और आत्म-उत्थान: यह पद चेतावनी देता है कि औरंग-चढ़ी हुई सत्ता स्वयं को ईश्वर के ऊपर ठहरा सकती है।
2) विरुद्ध वक्तव्य: वह ‘‘अनौखी बातें’’ कहेगा—परमेश्वर की सत्ता, विधान और आराधना के विरुद्ध खुले रूप में प्रतिज्ञा।
3) समयबद्ध सफलता: वह तब तक सफल होगा जब तक परमेश्वर का क्रोध सक्रिय न हो—यह संकेत है कि बुराई की पीक अस्थायी और परमेश्वर की योजना के अन्तर्गत है।

सहायक बाइबिल विषय

- परमेश्वर का आरोपण और समय: मनुष्य की स्वतंत्र परम्पराओं और परमेश्वर के नियंत्रण के बीच संतुलन।
- विरोधी-नेता और मूर्तिपूजा: धार्मिक विरोध और लोकतंत्रिक ढाँचों में परमेश्वर के स्थान पर मनुष्य को स्थापित करने की प्रवृत्ति।
- आखिरी दिनों की चेतावनी और न्याय सुनिश्चितता: दुराचार कुछ काल तक बढ़ेगा पर ईश्वर की न्याय-कार्यवाही अनिवार्य है।

संबंधित संदर्भ और संक्षेप व्याख्या

  • 2 थिस्सलुनीकियों 2:3–4 — विरोधी (antichrist) के बारे में; वहाँ भी आत्म-उत्थान और पराकाष्ठा का वर्णन मिलता है।
  • प्रकाशितवाक्य 13:5–7 — प्राणी की शक्ति और उससे जुड़ी अस्थायी विजय का चित्रण, जो अंततः परमेश्वर के न्याय से नियंत्रित होगा।
  • नबियाँ: दान्येल 7 — दानिय्येल के दृष्टान्तों में प्रभुत्व करने वाली शक्तियों और परमेश्वर के राज्य की स्थापित अनुपस्थिति तथा पुनर्स्थापन का उल्लेख।

मथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स, एवं आदम क्लार्क के संक्षिप्त संकेत

मथ्यू हेनरी की सूक्ष्म टिप्पणियों में यह विचार मिलता है कि यह पद यह दिखाता है कि बुराई का कुछ समय के लिए बढ़ना परमेश्वर की परमरचना में समाहित है। अल्बर्ट बार्न्स ने इस पाठ को ऐसे दुराचारी नेताओं के व्यवहार पर लागू किया है जो खुले तौर पर धर्म और परमेश्वर का अपमान करते हैं। आदम क्लार्क ने इस तरह के शासक के अनिवार्य विफलता-पथ और परमेश्वर के अंततः हस्तक्षेप पर प्रकाश डाला। (यहाँ कोई शब्दशः उद्धरण संलग्न नहीं किया गया है।)

व्यावहारिक विचार और साधना

यह पद हमें निम्न परिप्रेक्ष्य देता है: व्यक्तिगत और सामूहिक जीवन में घमंड की पहचान और उसकी रोकथाम आवश्यक है। जब सामाजिक-राजनीतिक शक्ति धर्म और नैतिकता को दबाती है, तो भरोसा रखें कि परमेश्वर का न्याय देर से नहीं बल्कि निश्चित रूप से आएगा। साधना में प्रभु से विनती करें कि हमें ऐसे विचारों और कार्यों से बचाए जो स्वयं को परमेश्वर के स्थान पर स्थापित करने का मार्ग खोलते हैं।

निष्कर्ष: दानिय्येल 11:36 हमें चेतावनी और आश्वासन दोनों देता है—चेतावनी कि मनुष्य की सत्ता भोलेपन और आत्मपूजन तक जा सकती है, और आश्वासन कि परमेश्वर की न्याय-योजना उस आत्म-उत्थान को या तो सीमित कर देगी या उसका विनाश कर देगी।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

दानिय्येल 11:36 समानांतर पद और संबंधित वचन

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क्योंकि तुम्हारा परमेश्‍वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्‍वर और प्रभुओं का प्रभु है, वह महान पराक्रमी और भय योग्य परमेश्‍वर है, जो किसी का पक्ष नहीं करता और न घूस लेता है। (प्रेरि. 10:34, रोम. 2:11, गला. 2:6, इफि. 6:9, कुलु. 3:25, 1 तीमु. 6:15, प्रका. 17:14, प्रका. 19:16)

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बड़े बोल बोलने और निन्दा करने के लिये उसे एक मुँह दिया गया, और उसे बयालीस महीने तक काम करने का अधिकार दिया गया।

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जो विरोध करता है, और हर एक से जो परमेश्‍वर, या पूज्य कहलाता है, अपने आप को बड़ा ठहराता है, यहाँ तक कि वह परमेश्‍वर के मन्दिर में बैठकर अपने आप को परमेश्‍वर प्रगट करता है। (यहे. 28:2, दानि. 11:36-37)

दानिय्येल 11 (HINIRV) Verse Selection

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