दानिय्येल 11:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उस भीड़ को जीतकर उसका मन फूल उठेगा, और वह लाखों लोगों को गिराएगा, परन्तु वह प्रबल न होगा।

दानिय्येल 11:12 पद-दर-पद बाइबल टीका

दानिय्येल 11:12 — मुख्य interpretive point

यह पद उन शक्तिशाली संघर्षों की तस्वीर देता है जो मनुष्य की सीमा से बाहर की ताकतों के सामने उभरते हैं। भाषा में तेज स्पर्श है: “उस भीड़ को जीतकर उसका मन फूल उठेगा, और वह लाखों लोगों को गिराएगा, परन्तु वह प्रबल न होगा।” यह दर्शाता है कि अत्याचार कितना भी विशाल क्यों न हो, उसे अंततः मंगल की योजना और परमेश्वर की सत्ता के सामने हार माननी पड़ती है। गिरावट के बावजूद भी इस युद्ध-रस में एक ध्रुव सत्य है: देवमत्ता की असाधारण प्रदर्शनी के बावजूद धरती पर ईश्वर की योजना टिकाऊ है, और दानिएल के स्वप्नों में दिखे भाग्य की युक्तियों को पूर्णता नहीं मिलतीं।

पाठ-संदर्भीय संरचना

1) साहित्यिक संदर्भ: दानिय्येल के अध्याय 11 में राजा-राजाओं के संघर्ष स्पष्ट रूप से प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक दोनों रूपों में प्रस्तुत हैं। इस पद में एक युद्ध-घटना है जहां शक्ति-प्रकाशित व्यक्ति एक भीड़ को जीतता है और निर्बल प्रतीत होता है, परन्तु उसकी विजय स्थिर नहीं रहती।

2) सिद्धांतगत संदेश: परमेश्वर की तात्कालिक योजना के सामने मानव-शक्ति सीमित है; दानिय्येल की दृष्टि यह दिखाती है कि हास्यास्पद रूप से विशाल भीड़ भी अंततः प्रभु के समक्ष विवश होती है।

आत्मीय-धार्मिक महत्व

यह वचन विश्वास की दृढ़ता को प्रोत्साहित करता है: भले ही विरोधी कितने भी मजबूत क्यों न हों, परमेश्वर के विरुद्ध स्थापित सत्ता टिक नहीं पाती। साथ ही, यह चेतावनी देता है कि सत्ता-प्रमुख लोग कभी-कभी अच्छा-भला भी करते हैं, परन्तु उनके अधीनता की सीमा है; अन्ततः देव-योजना और न्याय की सीट संरक्षित रहती है।

पारिस्थितिक-संदर्भ से गहरे संबंध

- cross-reference 1: यूहन् 16:33 — यीशु बताता है कि विश्व में परेशानियाँ आयेंगी, परन्तु उसने कहा, मैं विजय देता हूँ; भावी संघर्षों के बीच विश्वासी धैर्य बनाए रखना चाहिए।

- cross-reference 2: दानिय्येल 2:44 — भविष्यवाणी कि परम-राज्य स्थिर और स्थायीय रहेगा; पृथ्वी पर मानवी सत्ता कितनी भी ऊँची हो, ईश्वर की चँभाई व्यवस्था के सामने टिक नहीं पाएगी।

- cross-reference 3: रोम 13:1-2 — हर उत्तराधिकारी सत्ता परमेश्वर द्वारा स्थापित है; मानव सत्ता अगर मिथ्या या दमनकारी हो, तो भी परमेश्वर की न्याय-व्यवस्था सर्वोपरि रहती है।

विचार-विमर्श के प्रश्न

  • इस वचन में आप किस तरह की शक्ति के सामने अपने विश्वास को स्थिर पाते हैं?
  • धर्मनिष्ठता और मानवीय महत्वाकांक्षा के बीच संतुलन कैसे बना रह सकता है?

संक्षिप्त निष्कर्ष

दानिय्येल 11:12 में दबदबा रखने वाली भीड़ के सामने भी भविष्य-उद्धार की बड़ी नीति स्पष्ट है: परमेश्वर के लिए शक्ति-मानवता का परीक्षण है, परन्तु वह प्रबल नहीं रहती। इस संदेश का अमूल्य भाग यह है कि विश्वासियों को अस्थिरताओं में भी भरोसा बनाये रखना चाहिए कि ईश्वर की योजना सर्वोपरि है और न्याय की विजय अंततः उसकी संगति में पूरी होती है।

उद्धरण-नोट

नीचे उद्धृत शब्द सीधे Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से नहीं हैं, पर उनके विचारों के अनुरूप सार-संवाद का समावेश किया गया है।

उद्धरण संकेत: इस पाठ पर प्रकाशित पारंपरिक टिप्पणियों में इन टिप्पणीकारों के विश्लेषणों के संलग्न अंश मिलते हैं, जिनमें दृश्य-व्याख्या और ऐतिहासिक-संदर्भ का संयोजन मुख्य है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

दानिय्येल 11:12 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब तेरे मन में अहंकार समा जाए, और तू अपने परमेश्‍वर यहोवा को भूल जाए, जो तुझको दासत्व के घर अर्थात् मिस्र देश से निकाल लाया है,

2 राजाओं 14:10 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 राजाओं 14:10 (HINIRV) »
तूने एदोमियों को जीता तो है इसलिए तू फूल उठा है। उसी पर बड़ाई मारता हुआ घर रह जा; तू अपनी हानि के लिये यहाँ क्यों हाथ उठाता है, जिससे तू क्या वरन् यहूदा भी नीचा देखेगा?”

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2 इतिहास 26:16 (HINIRV) »
परन्तु जब वह सामर्थी हो गया, तब उसका मन फूल उठा; और उसने बिगड़कर अपने परमेश्‍वर यहोवा का विश्वासघात किया, अर्थात् वह धूप की वेदी पर धूप जलाने को यहोवा के मन्दिर में घुस गया।

दानिय्येल 11 (HINIRV) Verse Selection

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