Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 11:1 दानिय्येल 11:2 दानिय्येल 11:3 दानिय्येल 11:4 दानिय्येल 11:5 दानिय्येल 11:6 दानिय्येल 11:7 दानिय्येल 11:8 दानिय्येल 11:9 दानिय्येल 11:10 दानिय्येल 11:11 दानिय्येल 11:12 दानिय्येल 11:13 दानिय्येल 11:14 दानिय्येल 11:15 दानिय्येल 11:16 दानिय्येल 11:17 दानिय्येल 11:18 दानिय्येल 11:19 दानिय्येल 11:20 दानिय्येल 11:21 दानिय्येल 11:22 दानिय्येल 11:23 दानिय्येल 11:24 दानिय्येल 11:25 दानिय्येल 11:26 दानिय्येल 11:27 दानिय्येल 11:28 दानिय्येल 11:29 दानिय्येल 11:30 दानिय्येल 11:31 दानिय्येल 11:32 दानिय्येल 11:33 दानिय्येल 11:34 दानिय्येल 11:35 दानिय्येल 11:36 दानिय्येल 11:37 दानिय्येल 11:38 दानिय्येल 11:39 दानिय्येल 11:40 दानिय्येल 11:41 दानिय्येल 11:42 दानिय्येल 11:43 दानिय्येल 11:44 दानिय्येल 11:45



सारांश एवं परिचय
दानिय्येल 11:35 में भविष्यवाणी की जा रही है कि सच्चाई और विश्वास के बीच कठोर परीक्षण होंगे; कुछ बुद्धिमान लोग विश्वास के कारण अस्थायी रूप से गिरेंगे ताकि उनकी परीक्षा हो और वे शुद्ध होकर उजले हो जाएँ। यह वचन उस समय की स्थिर स्थिति को बताता है जब अत्याचार, परीक्षा और विभेद बने रहेंगे, परन्तु अन्त में परमेश्वर आपकी रक्षा का अंतिम निर्णय करेगा।
यह पद्य अध्याय में कहाँ बैठता है
दानिय्येल 11 सम्राटों, युद्धों और अंतिम काल के घटनाचक्र का विस्तृत वर्णन करता है। यह विशेष पद्य उन लोगों की दशा बताता है जो सत्य और विश्वास के मार्ग पर खड़े रहते हैं जब राजनीतिक तथा धार्मिक संकट चरम पर हों। यहाँ "बुद्धिमान" वे हैं जिनमें धर्मपरायणता और समझदारी है; उनका गिरना नित्यात्मक विफलता नहीं, बल्कि परख का माध्यम है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस वचन का प्रधान संदेश यह है कि परीक्षण का उद्देश्य परख और शुद्धिकरण है। परमेश्वर उन लोगों की परीक्षा होने देता है ताकि उनका चरित्र निर्मल हो और वे जागरूक, दृढ़ और शुद्ध बनें। गिरना अनिवार्यतः हार नहीं; यदि इसका परिणाम सुधार और शुद्धि हो तो वह दैवीय योजना का हिस्सा बनता है।
सम्बन्धित शास्त्रपद और तुलना
व्याख्यात्मक टिप्पणियाँ
पद्य में "गिरेंगे" का अर्थ संभवतः सामाजिक या आध्यात्मिक दबाव में अस्थायी चूक है, न कि अंतिम अपवर्जन। "जाँचे जाएँ" बताता है कि यह गिरना निरीक्षण और परख की स्थिति उत्पन्न करेगा। अंततः "निर्मल और उजले किए जाएँ" बताता है कि उन परखों से उनका चरित्र शुद्ध होगा और वे प्रकाश में खड़े होंगे। आयत यह भी कहती है कि यह दशा "अन्त के समय तक बनी रहेगी", यानी परीक्षणों की अवधि तक यह प्रक्रिया जारी रहेगी, परन्तु यह अनन्त नहीं है—"इन सब बातों का अन्त नियत समय में होनेवाला है"।
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke—संक्षिप्त उद्धरण/संदर्भ
Matthew Henry ने लिखा है कि परीक्षा का लक्ष्य अधिकारियों का परखना और नरमाई से उभरना है। Albert Barnes ने इस तरह के पदों को "व्यक्तियों के धर्म-चरित्र की परीक्षा" के रूप में व्याख्यायित किया। Adam Clarke ने भी इसी विचार का समर्थन करते हुए उल्लेख किया कि परख के द्वारा विश्वास की सच्चाई उजागर होती है। (उपरोक्त विचार सार्वजनिक-डोमेन व्याख्यकों की सामान्य व्याख्याओं का संक्षेप हैं; मैंने कहीं से भी लंबे उद्धरण नहीं दिया।)
व्यावहारिक अनुप्रयोग
1) व्यक्तिगत: जब कठिनाइयाँ आएँ, उन्हें सुधरने और विश्वास की जाँच के अवसर के रूप में लें; गिरावट पर लज्जित न हों, बल्कि पश्चात्ताप और सुधार की दिशा में अग्रसर हों।
2) सामुदायिक: चर्च और विश्वासिक समूहों को निंदा या परित्याग की जगह सहनशीलता और शुद्धि के मार्ग अपनाने चाहिए ताकि परखे हुए भाई-बहन फिर से उठकर प्रकाश में आ सकें।
3) आशा: वर्तमान संघर्ष अंततः एक नियत समय पर समाप्त होगा; यह विश्वास रखने वालों को धैर्य और आशा देने का वचन है।
निष्कर्ष
दानिय्येल 11:35 हमें सिखाता है कि परखें और अस्थायी गिरावटें दैवीय स्वच्छता के साधन हैं। बुद्धिमान वे हैं जो परख के समय में भी सुधार के लिए तैयार रहते हैं और परमेश्वर के ‘‘निर्धारित समय’’ पर पुनरुत्थान तथा उजागर होने की आशा बनाए रखते हैं। यह पद न तो निराशा का कारण है और न ही अव्यवस्थित भय का; बल्कि यह परखों के पार होने पर शुद्धि और अंतिम विजय का भरोसा देता है।