Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 11:1 दानिय्येल 11:2 दानिय्येल 11:3 दानिय्येल 11:4 दानिय्येल 11:5 दानिय्येल 11:6 दानिय्येल 11:7 दानिय्येल 11:8 दानिय्येल 11:9 दानिय्येल 11:10 दानिय्येल 11:11 दानिय्येल 11:12 दानिय्येल 11:13 दानिय्येल 11:14 दानिय्येल 11:15 दानिय्येल 11:16 दानिय्येल 11:17 दानिय्येल 11:18 दानिय्येल 11:19 दानिय्येल 11:20 दानिय्येल 11:21 दानिय्येल 11:22 दानिय्येल 11:23 दानिय्येल 11:24 दानिय्येल 11:25 दानिय्येल 11:26 दानिय्येल 11:27 दानिय्येल 11:28 दानिय्येल 11:29 दानिय्येल 11:30 दानिय्येल 11:31 दानिय्येल 11:32 दानिय्येल 11:33 दानिय्येल 11:34 दानिय्येल 11:35 दानिय्येल 11:36 दानिय्येल 11:37 दानिय्येल 11:38 दानिय्येल 11:39 दानिय्येल 11:40 दानिय्येल 11:41 दानिय्येल 11:42 दानिय्येल 11:43 दानिय्येल 11:44 दानिय्येल 11:45



दानिय्येल 11:23 — संदर्भ के साथ टिप्पणी
यही आयत उस भाग में आती है जहाँ दानिय्येल भविष्य के राजा-राजाओं की राजनीति और चालाक चालों की गतिशीलता का अवलोकन कराते हैं। यहाँ एक दुष्ट समझौता या "वाचा" को तोड़कर आगे बढ़ने की प्रवृत्ति का उल्लेख है—जो कि राजनीतिक छल और भाग-दौड़ के साथ जुड़ा है। यह वाचा-भंग का दृष्टांत है: बाहरी गठबंधन बना लेना, फिर उसे आंतरिक चालाकी से समाप्त कर देना ताकि सत्ता बढ़े।
मुख्य अर्थ
इस वाक्य में कहा गया है कि वह, प्रतिद्वंद्वियों के साथ भी धोखा करेगा—वाचा बांधने पर भी नहीं झिझकेगा—और कुछ ही समय में अनेक लोगों को अपने साथ मिलाकर अत्यंत शक्तिशाली हो जाएगा। यह दर्शाता है कि दानिय्येल के समय की सत्ता-चालों में छल-धोखा एक सामान्य उपकरण बन गया था, ताकि सत्ता प्राप्त कर ली जाए या बनाए रखा जाए।
दो प्रमुख विषय
प्रासंगिक क्रॉस-रेफरेंसे
– दानिय्येल की किताब में ऐसी राजनीतिक चालाकी के उद्भव और परिणाम बार-बार आते हैं, जहाँ शक्तिशाली राजा अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए समझौते बनाते हैं (उदा. दानिय्येल 8 और 9 अध्यायों के अनुभव)।
– प्रस्तावनात्मक संकेत देता है कि मानव योजना के विपरीत, परमेश्वर की सत्ता और समय 모든 घटनाओं को निर्धारित करते हैं (स्तोत्र 33:10–11; व्यवस्थाओं में परमेश्वर के नियंत्रण के विचार)।
– नीतिवचन में भी यह विचार मिलता है कि धोखा से बचना और सत्य-विकास के लिए सतर्क रहना आवश्यक है (नीतिवचन 12:20; 26:28).
व्यावहारिक विचार
आज के पाठकों के लिए यह पाठ हमें चेतावनी देता है कि किसी भी प्रकार के समझौते में बुनी गई चालाकी अगर अच्छे के नाम पर हो, तब भी यह नीयत और परिणाम दोनों पर सवाल उठाती है। हमारे निर्णयों में ईमानदारी, क्षेत्रीय हितों से ऊपर सत्य और न्याय की प्राथमिकता होनी चाहिए। परमेश्वर की योजना और समय کے अनुसार चलना ही स्थिर और विश्वसनीय सुरक्षा प्रदान करता है।
संक्षिप्त समापन
दानिय्येल 11:23 का यह वचन बतलाता है कि सत्ता की चाह में लोग कभी-कभी छल-छद्म अपनाते हैं, पर परमेश्वर के नियंत्रण के बाहर नहीं हैं। यह हमें स्मरण कराता है कि धर्मी जीवन वही है जो ईमानदारी और दृढ़ वफ़ादारी के साथ आगे बढ़े, भले ही राजनीतिक वातावरण कितना ही कुचक्र भरा क्यों न हो।
संक्षिप्त उद्धरण (जो dokład Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से मिलते हैं)
उद्धृत स्रोतों के संक्षिप्त संकेत: Matthew Henry और Albert Barnes तथा Adam Clarke के विचारों में यही ध्वनि है—धोखे से बचना, परिश्रम से सुरक्षा और परमेश्वर की निरंतरत्तर योजना की महत्ता।