2 इतिहास 26:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु जब वह सामर्थी हो गया, तब उसका मन फूल उठा; और उसने बिगड़कर अपने परमेश्‍वर यहोवा का विश्वासघात किया, अर्थात् वह धूप की वेदी पर धूप जलाने को यहोवा के मन्दिर में घुस गया।

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2 इतिहास 26:16 पद-दर-पद बाइबल टीका

अर्थ का सीधे-साफ सार

2 इतिहास 26:16 में कहा गया है कि उदयन राजा यूतिवरि की मूर्ति और सामर्थ्य के अहंकार में आकर उसने यहोवा के मन्दिर में धूप जलाने का प्रयास किया, जो कि न क्या किया गया, बल्कि यह स्पष्ट करता है कि सफलता और प्रभाव ने उसकी दिमागी संरचना को विकृत कर दिया।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यूहया के समय के अन्य राजाों के विपरीत आहुजा और मूर्तिपूजा की प्रवृत्ति में वृद्धि देखी जाती है। जब यहोशापत के शासन के बाद इकबाल बढ़ती है, तो राजा उदयाह (यूतेज़) ने अपनी शक्ति और सफलता के कारण परमेश्वर के निर्देशों को भुला दिया। परमेश्वर के तेल से सिंहासन पर बैठना कुछ समय तक उसे स्वार्थी निर्णयों के लिए प्रेरित करता है, और अंततः वह मंदिर में प्रवेश कर धूप जलाने जैसा पाप करता है जो केवल याजकों के लिए मान्य था।

विश्लेषणात्मक अवलोकन

  • आत्मविश्वास बनाम स्वामित्व की खाई: सफलता से उभरे आत्म-गर्व ने उसे परमेश्वर के स्थान तक बढ़ा दिया, जो विनाश का कारण बना।
  • धर्म–कायदे की पंक्तियाँ टूटना: मंदिर में प्रवेश कर धूप जलाना एक संरचित व्यवस्था का उल्लंघन है; यह यहूदा के धार्मिक संस्थानों के प्रति उसकी अविश्वास का संकेत है।
  • परमेश्वर की सीमा: परमेश्वर उन लोगों से भी न्याय करता है जो अपने अधिकार का दुरुपयोग कर His ordained boundaries को पार करते हैं।

थीमगत प्रमुख बिंदु (संक्षेप)

संबद्ध पात्र पाठ और उनके संकीर्ण निष्कर्ष

विज्ञानिक पाठों के संदर्भ में, नीचे के अनुमानित क्रॉस-रेफरेंसेज़ से यह स्पष्ट होता है कि:

  • 2 इतिहास 25–27 की अगली घटनाओं में समान पाप की पुनरावृत्ति से बचने की चेतावनी मिलती है।
  • नीतिवचन की शिक्षाओं में यह दिखता है कि राजाओं का परमेश्वर के प्रति उत्तरदायित्व अधिक गंभीर होता है।

स्पष्टता के लिए संक्षेप: यह अध्याय हमें याद दिलाता है कि सामाजिक सत्ता और आध्यात्मिक अनुष्ठानों के बीच संतुलन अत्यंत महत्वपूर्ण है; शक्ति का दुरुपयोग दैवीय व्यवस्था के प्रतिपादन के विरुद्ध है।

युक्त उपदेश और व्यवहारिक takeaway

  • हमारी सफलता क्या हमारे स्वार्थ की सीढ़ी बन जाए—याद रखें कि परमेश्वर को मान-सम्मान पहले है।
  • आत्म-गौरव के समय सावधानी रखें; नियमों के भीतर रहना ही सुरक्षा है।
  • विधि-पालन और परमेश्वर-आस्था के बीच संतुलन बनाये रखें; बाहरी दिखावे से भिन्न अंतःकरण की नीयत देखें।

क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षेप explanations)

परोक्ष संबंध—यहाँ कुछ सन्दर्भ जो धारणाओं को उजागर करते हैं:

  • समय-प्रबंध और गर्व का जोखिम: पुराने इतिहास के उत्तराधिकार में यह कहा गया है कि राजा-नायक अपने अवरोधों के कारण गिरते हैं; इसे समझना हमें अपने नि:स्वार्थ धर्म के प्रति सच्चे रहने की प्रेरणा देता है।
  • आह्वान और दायित्व: धार्मिक संस्थाओं के उचित नियंत्रण के साथ व्यक्तिगत आस्था का संतुलन आवश्यक है।

शाब्दिक उद्धरण संकेत (HINIRV से संबद्ध)

यह अनुभाग केवल संदर्भ के लिए है—आवश्यक के रूप में Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के सीधे उद्धरण ही शामिल किये जाते हैं (यदि उपलब्ध हों) और उनके संक्षिप्त उद्धरण ही उद्धृत हैं: यह पंक्ति स्वयं पाठ में उद्धृत नहीं है, परन्तु उनके योगदान से उत्पन्न विचारों का समन्वय प्रस्तुत किया गया है।

प्रस्तुत टिप्पणी में प्रयुक्त विचार Holmes-डायनेस्टी से प्रेरित सार्वजनिक डोमेन टीका-भूमिका से समेकित हैं, ताकि पाठक के लिए एक संगत, ग्रहणीय मार्गदर्शन बन सके।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 26:16 समानांतर पद और संबंधित वचन

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परन्तु हिजकिय्याह ने उस उपकार का बदला न दिया, क्योंकि उसका मन फूल उठा था*। इस कारण उसका कोप उस पर और यहूदा और यरूशलेम पर भड़का।

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तू कहता है, कि मैंने एदोमियों को जीत लिया है; इस कारण तू फूल उठा और डींग मारता है! अपने घर में रह जा; तू अपनी हानि के लिये यहाँ क्यों हाथ डालता है, इससे तू क्या, वरन् यहूदा भी नीचा खाएगा।”

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विनाश से पहले गर्व, और ठोकर खाने से पहले घमण्ड आता है।

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