Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 16:18 का अर्थ
अभिधानिक रूप से कहा गया सत्य: गर्व विनाश की राह खोलता है और ठोकर खाने से पहले घमण्ड उभर कर सामने आता है। इसका सीधा तात्पर्य यह है कि आत्म-गौरव और आत्म-निश्चय की अति आत्मविश्वास अच्छे निर्णयों को मार डालती है, क्योंकि आपसी विवेक और सावधानी घट जाती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नीतिवचन में अक्ल-बुद्धि का मूल्य, नैतिक विवेक और ईश्वर के प्रति सही भय प्रमुख विषय हैं। इस पद में प्रतिष्ठा-प्रलोभन और आत्म-आत्मविश्वास के पीछे छिपे खतरे दिखते हैं, जो समाज में और हमारे आचरण में अल्पकालिक लाभ के पीछे दीर्घकालिक दुख दे सकते हैं। मार्गदर्शक धारा में ज्ञान और विनम्रता ही सुरक्षा का मूल मंत्र होते हैं।
व्याख्यात्मक विचार
सार्वभौमिक संदर्भ
इस वाक्यांश का मूल संदेश अन्य नीतिकथनों में भी मिलता है: अधिक घमण्ड तब लगता है जब सफलता मिलती है, किन्तु समय के साथ वह पतन का कारण बन सकता है। यहाँ विचार यह है कि सफलता के साथ नम्रता और सचेतता बनाए रखी जाए।
क्रॉस-रेफरेंसेज
1) निर्गमन 3:14-15 से प्रेरणा मिलती है कि ईश्वर का नाम और चेतना प्रेरित करती है कि व्यक्ति अपने अहंकार को नियंत्रित करे, ताकि वह ईश्वर के साथ संबन्ध बनाए रखे।
2) यिर्मयाह 9:23-24 में बताया गया है कि मनुष्यमान की महानता तो ज्ञान, विवेक और भक्तिभाव में है, न कि boasting में।
3) याकूब 4:6 में कहा गया है कि परमेश्वर दयालु होने के कारण grace देता है, परन्तु घमण्ड के विरुद्ध वह विरोधी साबित होता है; इसलिए दया के साथ विनम्रता अपनानी चाहिए।
व्यावहारिक निष्कर्ष
- सफलता पाते समय भी नम्रता का रखरखाव करें; आपके निर्णयों में विवेक और परामर्श को प्राथमिकता दें।
- गलतफहमी से बचने के लिए आत्म-आलोचना और सीखने की इच्छा रखें।
- ईश्वर के मार्ग का भय और सम्मान रखें; घमण्ड में न फँसें, क्योंकि यह गिरावट का शुरूआती संकेत है।
अनुमानित स्रोत-प्रकाश
प्रस्तावित दार्शनिक संरचना एकत्रित रूप से प्रसिद्ध पवित्र-व्याख्याओं से प्रेरित है। नीचे दिए गए संक्षिप्त उद्धरण केवल संदर्भिक रूप से संकलित हैं:
“घमण्ड विनाश का मार्ग है; विनम्रता ही बुद्धिमत्ता का साथी है।”
संश्लेषित निष्कर्ष
नीतिवचन 16:18 यह सिखाता है कि आचरण में संयम, नम्रता और ईश्वर-आस्था ही वास्तविक शक्ति हैं। सफलता और ज्ञान के साथ घमण्ड न बिठाएँ; सत्य का मार्ग अपनाकर ही जीवन में स्थिरता और सुरक्षा पाई जा सकती है।