Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 16:1 नीतिवचन 16:2 नीतिवचन 16:3 नीतिवचन 16:4 नीतिवचन 16:5 नीतिवचन 16:6 नीतिवचन 16:7 नीतिवचन 16:8 नीतिवचन 16:9 नीतिवचन 16:10 नीतिवचन 16:11 नीतिवचन 16:12 नीतिवचन 16:13 नीतिवचन 16:14 नीतिवचन 16:15 नीतिवचन 16:16 नीतिवचन 16:17 नीतिवचन 16:18 नीतिवचन 16:19 नीतिवचन 16:20 नीतिवचन 16:21 नीतिवचन 16:22 नीतिवचन 16:23 नीतिवचन 16:24 नीतिवचन 16:25 नीतिवचन 16:26 नीतिवचन 16:27 नीतिवचन 16:28 नीतिवचन 16:29 नीतिवचन 16:30 नीतिवचन 16:31 नीतिवचन 16:32 नीतिवचन 16:33



नीतिवचन 16:5 का टिप्पणी—यहोवा के सामने घमंड और आत्म-गौरव
पद का संदर्भ: “सब मन के घमण्डियों से यहोवा घृणा करता है; मैं दृढ़ता से कहता हूँ, ऐसे लोग निर्दोष न ठहरेंगे।” यह नीतिवचन का एक स्पष्ट आह्वान है कि व्यक्तिगत महानता का दिखावा भी ईश्वर के समक्ष मानी नहीं जाती, क्योंकि घमण्ड आत्म-स्वार्थ और परमेश्वर-स्वीकृति की कमी को दर्शाता है। संदर्भ के अनुसार, ऐसी विशेषताएँ प्रत्यक्ष रूप से निर्भय नहीं दिखातीं कि व्यक्ति सचमुच भला है; बल्कि यह संकेत है कि वह यह नहीं समझ पाया कि उसकी स्थिति और सफलता परमेश्वर की कृपा पर निर्भर है, न कि उसकी अपनी श्रेष्ठता पर।
केंद्रीय अर्थ
यह verse यह स्पष्ट करता है कि घमण्ड, आत्म-गौरव और प्रभुवाहक रवैया ईश्वर की घृणा बन जाते हैं, भले ही बाहरी परिणाम अच्छे क्यों न हों। घमण्ड आत्म-केन्द्रित दिल की उपज है, जो ईश्वर के अद्वितीयता को मान्यता नहीं देती। परिणामस्वरूप, ऐसे लोग अक्सर अपनी स्थिति के कारण आत्म-नियंत्रण खो देते हैं या दूसरों के साथ असामान्य रूप से कठोर बन जाते हैं। यह सीखती है कि ईश्वर के नियमों के अनुरूप जीवन जीना तब संभव होता है जब मनुष्य अपनी कमजोरियों को स्वीकार करे और ईश्वर की कृपा पर निर्भर रहे।
दो-तीन मुख्य विषय
संबद्ध बाइबिल संकेत
फुटकर cross-references से मिलता-जुलता विचार:
व्यावहारिक विचार
व्यावहारिक जीवन में यह verse चेतावनी देता है कि सफलता के क्षणों में भी विनम्रता बनाए रखना चाहिए। टीम और समुदाय के बीच मानवीय गरिमा को बनाए रखने के लिए हमें अपनी क्षमताओं की सराहना करें, पर आत्म-गौरव के धारणाओं को काबू में रखें। एक सच्चे विश्वास भरोसे का अभ्यास यही है कि आप अपनी उपलब्धियों को परमेश्वर की कृपा और दूसरों की मदद के साथ जोड़े रखें।
संक्षिप्त निष्कर्ष
नीतिवचन 16:5 यह बताता है कि घमण्ड और आत्म-गौरव ईश्वर की दृष्टि में निंदनीय हैं और ऐसे लोग निष्क्रिय नहीं ठहरते। विनम्रता, ईश्वर-आस्था और दूसरों के सम्मान के साथ जीवन जीना वही रास्ता है जो परमेश्वर की कृपा और आशीषों को सुरक्षित रखता है।
विशेष उद्धरण (पवित्र-दृष्टि से)
पूर्व-पश्चिम के प्रसिद्ध पवित्र-वक्ता आयामों में से, Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्वतंत्र, सार्वजनिक डोमेन टिप्पणियों के सार इस प्रकार हैं: घमण्ड के विरुद्ध सतर्कता और विनम्रता की महत्ता को उन्होंने एक अभिन्न नैतिक कड़ी के रूप में रखा है; कुछ पंक्तियाँ उनकी तरफ से इस विषय पर नहीं दी गईं, पर उनके समेकित स्वभाविक रुझान इस पंक्ति के अर्थ में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होते हैं।
नोट: यहाँ किसी भी पूर्ण उद्धरण को सटीक रूप से प्रविष्ट नहीं किया गया है क्योंकि पाठ से उचित संदर्भ उद्धरण उपलब्ध नहीं है; यदि आप इन बाबत सीधे उद्धरण देखना चाहें, तो आप Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन कमेंट्री के भागों में तुलनात्मक अध्ययन कर सकते हैं।