Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 16:7 का संक्षिप्त परिचय और संदर्भ
नीतिवचन 16:7 कहता है कि जब किसी का चाल-चलन यहोवा को प्रसन्न लगता है, तब वह भी उसके शत्रुओं को उसके साथ सम्मिलित कर देता है। यह एक ऐसी अनुभूति है जिसमें पथ के अनुरूप आचरण का ईश्वर के पक्ष में परिवर्तनकारी प्रभाव स्पष्ट होता है। यह पद अक्सर नीतिवचन के नैतिक-व्यवहारिक सिद्धांतों के साथ जुड़ा मिलता है, जिसमें परमेश्वर की कृपा और न्याय दोनों का संतुलन दर्शाया गया है: मनुष्य की शुद्ध नीति से ईश्वर के साथ और दुनिया के साथ संबन्ध सुधरते हैं।
मुख्य अर्थ
यह वाक्य बताता है कि ईश्वर मानव के आचरण के प्रति प्रतिक्रिया करता है। जब व्यक्ति सच्चे दिल से यहोवा को मानता है और उसके मार्ग पर चलता है, तब ईश्वर न सिर्फ उसे आशीष देता है, बल्कि उसकी enemies—यानी उसे से विरोध रखने वालों—को भी उस के साथ समझौता/मेल-जोड़ देता है। इसका तात्पर्य यह है कि परमेश्वर की कृपा, उसकी योजना और धैर्य से वह स्थिति बदल देता है ताकि सत्य और वैभावना के मार्ग पर चलना आसान हो जाए।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबंधित बाइबली बातें (क्रॉस रेफरेंसेस)
व्यावहारिक विवेक
जो लोग यहोवा के मार्ग पर चलते हैं, वे अपने आचरण के कारण न केवल अपने जीवन में संतोष पाते हैं, बल्कि उनके शत्रु भी पथ-परिवर्तन की संभावना में आ जाते हैं। यह कृपा केवल बाहरी जीत नहीं है, बल्कि दिल की शांति और नैतिक शक्ति है जो रिश्तों में स्थिरता लाती है।)
संक्षिप्त समापन
नीतिवचन 16:7 यह बताता है कि ईश्वर के साथ चलने का प्रभाव न केवल हमारे साथ, बल्कि हमारे शत्रुओं के साथ भी संबंधों में स्पष्ट रूप से दिखता है। यह एक आश्वस्त करने वाला पाठ है कि धर्मी आचरण और ईश्वर की कृपा मिलकर, एक समाज में न्याय और शांति स्थापित कर सकती है।
कथन-उद्धरण (महत्वपूर्ण स्रोत)
नीति-टिप्पणियों के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के खुले-प्रचारित विचारों में संकल्पना साझा की गयी है। उपलब्ध उद्धरणों में उनके विश्लेषण की पंक्तियाँ इस प्रकार हैं: “When a man's way pleaseeth the Lord, he maketh even his enemies to be at peace with him.” (प्रेरित विचार) — यह सार उद्धृति के रूप में प्रयुक्त है ताकि पाठक को मूल भावना समझ में आये।