Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 16:1 नीतिवचन 16:2 नीतिवचन 16:3 नीतिवचन 16:4 नीतिवचन 16:5 नीतिवचन 16:6 नीतिवचन 16:7 नीतिवचन 16:8 नीतिवचन 16:9 नीतिवचन 16:10 नीतिवचन 16:11 नीतिवचन 16:12 नीतिवचन 16:13 नीतिवचन 16:14 नीतिवचन 16:15 नीतिवचन 16:16 नीतिवचन 16:17 नीतिवचन 16:18 नीतिवचन 16:19 नीतिवचन 16:20 नीतिवचन 16:21 नीतिवचन 16:22 नीतिवचन 16:23 नीतिवचन 16:24 नीतिवचन 16:25 नीतिवचन 16:26 नीतिवचन 16:27 नीतिवचन 16:28 नीतिवचन 16:29 नीतिवचन 16:30 नीतिवचन 16:31 नीतिवचन 16:32 नीतिवचन 16:33



नीतिवचन 16:19 का संदर्भ और अर्थ
पद का तात्पर्य है कि घमण्ड या ऊंच-नीच के ढोंग से भरपूर लोगों के साथ व्यवहार करके लाभ उठाने की चाह से बचना चाहिए; इसके विपरीत दीन और नम्रता के साथ रहना सार्थक रहता है। यहाँ ईश्वर के प्रतिफलन का संबंध मानवीय दृष्टिकोण से दिखाया गया है—जो लोग अजेय धर्म के साथ विनम्र रहते हैं, वे सामाजिक दबदबा के बजाय आशीष और व्यवस्था में अधिक सुरक्षित रहते हैं।
पद में देवता और विश्वास का संकेत
यह पाठ सूचित करता है कि ईश्वर के राज्य में नम्रता और दीनता स्थिरता के स्रोत हैं। घमण्डियों की संगत से जोखिम उठता है क्योंकि वे दूसरों की भावनाओं और स्थितियों की परवाह कम करते हैं; जबकि दीन लोग दूसरों के साथ विनम्रता से पेश आते हैं और समुदाय के बीच में स्थिरता बनाए रखते हैं। यह ईश्वर की न्याय और करुणा पर आधारित जीवनशैली की ओर संकेत है: विनम्रता ईश्वर की कृपा से जुड़ती है और विपत्तियों के समय में भी संतुलन बनाए रहती है।
कुंजी शब्दों की सरल व्याख्या
संदर्भित पाठ और दृष्टांत
नीतिवचन यह बताता है कि विनम्रता लोगों के बीच सहयोग और स्थिरता लाती है, जबकि घमंड से टकराव बढ़ता है। अन्य समान विचार वाले पदों में यह भी कहा गया है कि ज्ञान और समझ से भरे हृदय के साथ विनम्र होना, ईश्वर की निकटता की ओर जाता है।
संलग्न संदर्भ: निकट के समान संदेश वाले छंद विनम्रता, धैर्य और दया की महत्ता को दोहराते हैं, जैसे उन स्थानों पर जहां प्रभु यीशु ने सेवक-भाव दिखाने का आह्वान किया है।
महत्वपूर्ण पद-आधार शब्द
यहाँ का केन्द्रित विचार है—विनम्रता एक आचरण है जो सामाजिक दबावों के विरुद्ध भी अपनी नैतिक दिशा बनाए रखती है और ईश्वर के राज्य की सुरक्षा को बढ़ाती है।
आज के लिए उपयोगी अनुप्रयोग
- कठिन सामाजिक परिवेश में भी विनम्र बने रहें; यह आपको स्पष्ट निर्णय लेने और गलतफहमी से बचाने में मदद करेगा।
- विपत्ति या आलोचना के समय धैर्य रखें; घमंड से बचकर दूसरों की बात सुनें ताकि समुदाय में विश्वास बना रहे।
- उपलब्धियों के बीच भी दीनता बनाए रखें—इससे लोग आपको सम्मान देंगे और ईश्वर की कृपा के मार्ग खुलेंगे।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके संकेत
1) यिर्मयाह 9:23–24 — चतुराई और घमण्ड से ऊपर उठकर ईश्वर की marvellous कृपा को समझना।
2) फसलों 4:2 — विनम्रता और कानून के प्रभाव के साथ व्यवहार की आवश्यकता।
3) मत्ती 23:12 — जो अपने आप को ऊँचा करते हैं, वे नीचे होते हैं; जो नीचे झुकते हैं, वे उन्नत होते हैं।
नोट: नीचे उद्धृत किसी भी पूर्ण पाठ को नहीं दोहराया गया है; केवल संबंधित संकेत और भाव स्पष्ट किए गए हैं।
उद्धृत और संदर्भित विचारधारा के अनुसार एक समग्र निष्कर्ष: विनम्रता वह दिशा है जो ईश्वर के राज्य के अनुरूप आपके व्यवहार को उदार, न्यायपूर्ण और शांत बनाती है।