यशायाह 57:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि जो महान और उत्तम और सदैव स्थिर रहता, और जिसका नाम पवित्र है, वह यह कहता है, “मैं ऊँचे पर और पवित्रस्‍थान में निवास करता हूँ, और उसके संग भी रहता हूँ, जो खेदित और नम्र हैं, कि, नम्र लोगों के हृदय और खेदित लोगों के मन को हर्षित करूँ।

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यशायाह 57:15 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य व्याख्या संकेत (Yeshayahu 57:15)

यशायाह 57:15 में परमेश्वर अपने प्राकृतिक स्थल और उसी के साथ-साथ, उस विशाल गरिमा के भीतर रहते हुए भी खेदित और नम्र लोगों के साथ निकटता बनाए रखने की प्रतिज्ञा करते हैं। अभीष्ट सत्य यह है कि परमपिता का सर्वोच्च स्थान आकाश-भूमि में नहीं बल्कि उस हृदय में है जहाँ नम्रता और तिनके-से टूटे-फूटे हृदय रहते हैं, ताकि वह वहाँ स्थिर रहे और वहाँ सुवासित कर सके।

पांडित्यपूर्ण संदर्भ (संदर्भ-विकास)

हेवन-चिद्र में भारी गहराई के साथ, इस वचन में यह दर्शाया गया है कि परमेश्वर का स्थान ऊँचा और पवित्र है, पर वह अपने निवास को नम्र और दुखी लोगों के साथ बाँटने को तैयार है। यह न सिर्फ दैवी महिमाओं की जगह है पर मानस-आत्मा की लगन, करुणा और उद्धार की दिशा भी है। यह वचन इस विचार को पुष्ट करता है कि पवित्रता में भी जागरूक सहानुभूति है—एक ऐसा सम्बद्ध स्थान जहां पीड़ा-युक्त हृदयों को शांति और नवीन जीवन मिलता है।

केंद्रीय दार्शनिक-आध्यात्मिक अर्थ

इस पद का मूल संदेश यह है कि परमेश्वर की महिमा महान है, पर वह उद्धार को सामान्य मानव परिस्थिति के अनुरूप, नम्रता और चिन्ता के साथ जोड़ते हैं। वह “ऊँचे पर और पवित्रस्थान में निवास” करते हुए भी उन्हीं लोगों के बीच रहते हैं जो आँसू बहाते हैं, जिन्हें चुभती हुई परिस्थितियाँ सालती हैं। यह दर्शाता है कि ईश्वर के राज्य में ऊँचाई और दयालुता एक साथ चलते हैं—पवित्रता की ऊँचाई और करुणा की निकटता।

धार्मिक संदेशों के साथ क्रॉस-रेफरेंसेस

  • यशायाह 66:2 — यह बताता है कि परमेश्वर उन लोगों को देखता है जो नम्र हैं और पलकों को झुकाते हैं, उनके कर्मों के अनुसार नहीं बल्कि उनकी निजे-भवना के अनुरूप है। यह वचन पुष्टि करता है कि नम्रता परमेश्वर के निकटस्थ रहने का मार्ग है।
  • मत्ती 5:3 — “निम्न-हृदय” लोकों के लिए परमेश्वर का राज्य है; यह क्रिया-धारणा इस आयतन से मेल खाती है कि नम्रता और खेदित हृदय का परमेश्वर के साथ निकट संबंध है।
  • यहेयो 1:14 — परमेश्वर के गुणों में पवित्रता के साथ मानवीय करुणा की अभिव्यक्ति; यह दिखाता है कि पवित्रता जन-चिन्ता के साथ जुड़ती है।

आत्म-चिंतन के लिए प्रश्न

  • क्या मैं अपने दैनिक जीवन में परमेश्वर की पवित्रता को मानते हुए दूसरों के दुख में सहभागी हूँ?
  • कैसे मैं अपने मन को नम्र बनाकर प्रभु के निकट आ सकूँ और वहाँ से निकटता अनुभव करूँ?

संक्षिप्त निष्कर्ष

यशायाह 57:15 परमेश्वर की महानता और उसकी पवित्रता के साथ-साथ उसकी करुणा को एक सूत्र में बताता है: वह ऊँचे स्थान पर है और फिर भी खेदित-नम्र हृदयों के साथ रहता है। यह संदेश हमें आश्वस्त करता है कि दिव्य गौरव और सुलह-भाव एक साथ उपलब्ध हैं—उसके पास आओ, टूटे हृदयों के लिए राहत है।

संदर्शक उद्धरण (public-domain commentators)

एडम क्लार्क, मैथ्यू हेनरी और ऑल्बर्ट बार्न्स के चिर-परिचित विवेचन में दिखता है कि परमेश्वर की ऊँचाई उसकी दयालुता के साथ संतुलित है; उनके विचारों से मिला यह संदेश हिंदी पाठक के लिए सरल और गहराई वाला बनकर आता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 57:15 समानांतर पद और संबंधित वचन

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