Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



मुख्य व्याख्या संकेत (Yeshayahu 57:15)
यशायाह 57:15 में परमेश्वर अपने प्राकृतिक स्थल और उसी के साथ-साथ, उस विशाल गरिमा के भीतर रहते हुए भी खेदित और नम्र लोगों के साथ निकटता बनाए रखने की प्रतिज्ञा करते हैं। अभीष्ट सत्य यह है कि परमपिता का सर्वोच्च स्थान आकाश-भूमि में नहीं बल्कि उस हृदय में है जहाँ नम्रता और तिनके-से टूटे-फूटे हृदय रहते हैं, ताकि वह वहाँ स्थिर रहे और वहाँ सुवासित कर सके।
पांडित्यपूर्ण संदर्भ (संदर्भ-विकास)
हेवन-चिद्र में भारी गहराई के साथ, इस वचन में यह दर्शाया गया है कि परमेश्वर का स्थान ऊँचा और पवित्र है, पर वह अपने निवास को नम्र और दुखी लोगों के साथ बाँटने को तैयार है। यह न सिर्फ दैवी महिमाओं की जगह है पर मानस-आत्मा की लगन, करुणा और उद्धार की दिशा भी है। यह वचन इस विचार को पुष्ट करता है कि पवित्रता में भी जागरूक सहानुभूति है—एक ऐसा सम्बद्ध स्थान जहां पीड़ा-युक्त हृदयों को शांति और नवीन जीवन मिलता है।
केंद्रीय दार्शनिक-आध्यात्मिक अर्थ
इस पद का मूल संदेश यह है कि परमेश्वर की महिमा महान है, पर वह उद्धार को सामान्य मानव परिस्थिति के अनुरूप, नम्रता और चिन्ता के साथ जोड़ते हैं। वह “ऊँचे पर और पवित्रस्थान में निवास” करते हुए भी उन्हीं लोगों के बीच रहते हैं जो आँसू बहाते हैं, जिन्हें चुभती हुई परिस्थितियाँ सालती हैं। यह दर्शाता है कि ईश्वर के राज्य में ऊँचाई और दयालुता एक साथ चलते हैं—पवित्रता की ऊँचाई और करुणा की निकटता।
धार्मिक संदेशों के साथ क्रॉस-रेफरेंसेस
आत्म-चिंतन के लिए प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यशायाह 57:15 परमेश्वर की महानता और उसकी पवित्रता के साथ-साथ उसकी करुणा को एक सूत्र में बताता है: वह ऊँचे स्थान पर है और फिर भी खेदित-नम्र हृदयों के साथ रहता है। यह संदेश हमें आश्वस्त करता है कि दिव्य गौरव और सुलह-भाव एक साथ उपलब्ध हैं—उसके पास आओ, टूटे हृदयों के लिए राहत है।
संदर्शक उद्धरण (public-domain commentators)
एडम क्लार्क, मैथ्यू हेनरी और ऑल्बर्ट बार्न्स के चिर-परिचित विवेचन में दिखता है कि परमेश्वर की ऊँचाई उसकी दयालुता के साथ संतुलित है; उनके विचारों से मिला यह संदेश हिंदी पाठक के लिए सरल और गहराई वाला बनकर आता है।