Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 57:20 का संधारणीय अर्थ
पर्व के निश्कर्ष में यशायाह यह बताने का प्रयास करते हैं कि धरती पर दुष्टों की स्थिति स्थिर नहीं है—वे समुद्र की लहरों के समान खाली-चल और अशांत हैं। दुष्ट वह स्थिरता नहीं पाते; उनका जीवन अशांत जल-कीचड़ से भरा रहता है। यह वही विचार है जो "यहू. 1:13" के संदर्भ में भी जुड़ा है, जहाँ दुष्ट जीव-चरित्र के विपरीत परमेश्वर की पवित्रता और न्याय पर ज़ोर आता है।
मुख्य अर्थ
यह आयत दुष्टों के अस्थिर आचरण की प्रकृति को उजागर करती है। वे उनआत्मिक स्थिरता से चूकते हैं जिसकी निर्माण इनके भीतर नहीं है—वे स्थायित्व, शांति और नैतिक एकरूपता नहीं पाते। दुष्ट जीवन की लहरों के समान उथल-पुथल है, और उनका जल मैल-कीचड़ बनकर लौटता है। यह परमेश्वर के सामने उनके मनोभाव की नज़र से है, न कि पृथ्वी पर दिखते भौतिक दशाओं से।
केंद्रीय कथन और तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पाठ और उनके अर्थ
इसी पंक्ति के साथ अन्य चरित्रगत पाठ यह समझाते हैं कि दुष्ट क्यों अस्थिर रहते हैं और कैसे उनका अंत शुद्धचित्त जीवन से भिन्न रहता है। यशायाह के संदर्भ में यह संदेश यह है कि परमेश्वर न्याय के साथ अशुद्धता को समाप्त करता है, और उनके लिए शांति तब आती है जब वे परमेश्वर के साथ लौटते हैं।
अनुप्रयोग और प्रायोगिक विचार
क्रॉस-रेफरेंसेस (संकेत मात्र, पूर्ण वाचा नहीं)
यशायाह 57:20-21 से संबंध रखने वाले विचार पर विचार करें: दुष्टों की अभेद्यता और परमेश्वर की शांति के बीच संबंध। यहूदा 13 पर भी ध्यान देंजो दुष्टों की स्थिरता से परे एक चेतावनी के रूप में उद्धृत है। साथ ही कहीं-कहीं पर भिन्न क्षेत्रों में न्याय और उद्धार के बिंदुओं को भी जोड़ा गया है ताकि यह समझ सके कि कैसे परमेश्वर की सच्चाई अस्थिरता को समाप्त करती है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
Yशायाह 57:20-21 यह बताता है कि दुष्टों की अस्थिरता और मैला-कीचड़ भरा जल जीवन के सच-नियमानुसार नहीं टिकता। परमेश्वर के साथ लौटना और उसकी शांति में आना ही स्थिरता का मार्ग है।
उद्धरण-योग्य स्पष्ट बिंदु: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के किसी स्पष्ट उद्धरण यदि उपलब्ध हो तो उसे नीचे उद्धृत करें—परंतु यहाँ केवल उनके सिध्दांतगत अवलोकनों की समीकृत प्रस्तुति है।
Cross-reference notes: यशायाह 57:20–21 आदि कृपया ध्यान दें कि दुष्टों की अस्थिरता उनकी प्रकृति से है, और परमेश्वर की शांति-प्राप्ति स्थिरता का स्रोत है.