Old Testament
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यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66



यशायाह 2:11 का अर्थ
इस पद का सीधा सार यह है: परमेश्वर के सामने घमण्ड का सब बंधन टूट जाएगा; केवल यहोवा ही ऊँचे पर विराजमान रहेगा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यशायाह के अध्याय 2 का उद्देश्य भविष्य के दिनों में ईश्वर के राज्य की महिमा और मनुष्यों की घमण्ड की प्रतिक्रिया को दिखाना है। यह पृथ्वी के सामरिक शक्तियों के आधार पर मान-प्रतिष्ठाओं के ऊँचे-ऊँचे प्रतीकों के विरुद्ध एक अलौकिक सत्ता का उद्घोष है। विशेषकर वह दिन, जब विश्व के तत्त्ववादी-घमण्ड पराजित होंगे और केवल परमेश्वर ही सत्ता में होंगे।
व्याख्यात्मक विचार
संकेतित क्रिस्टल-प्लस cross-references
याला 2:17 (तुलनात्मक संदर्भ): नीचे रिया-घमण्ड के साथ ईश्वर के भय और पवित्रता की गूंज दिखती है; यह verse इस तथ्य को पुष्ट करता है कि दुष्ट-घूमाव समाज के ऊपर परमेश्वर का स्वरुप ही आख़िरकार सर्वोपरि होगा।
2 थिस्सलुनिकियों 1:9 (संदर्भ पाठ): दंड के स्वरूप में परमेश्वर-आकांक्षा और घमण्ड का अंतुदेश स्पष्ट होता है—जो परमेश्वर के साथ है वही सदा रहता है।
यशायाह 11:9 (कथा-योग): शांति और ज्ञान की स्थिति में मानव-घमण्ड खत्म होकर परमेश्वर का राज पूर्ण रूप से स्थापित होता है।
निष्कर्षपूर्ण विचार
इस पद का संदेश वर्तमान समय की आक्रांतिपूर्ण होड़ से ऊपर उठकर परमेश्वर की करुणा और व्यवस्था की ओर देखने का है। घमण्ड की प्रवृत्ति एक क्षणिक शोहरत देती है, पर अंतिम verdict परमेश्वर के हाथ में है। ईश्वर की महानता के सामने शुभ समाचार यह है कि वह एक विश्व-विकल्प के पीछे नहीं, बल्कि एक सार्वभौमिक शासन के साथ आता है।
संक्षिप्त उपयोगी बिंदु
संदर्भ उद्धरण (प्रकाशन-योग्य हिस्से)
यशायाह 2:11 के साथ यह शोधक सार यह है कि “केवल यहोवा ही ऊँचे पर विराजमान रहेगा”—यह वही विचार है जो अन्य मंचों के अनुरूप भी है कि परमेश्वर ही पूर्ण सर्वोपरि है।
नोट: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के स्पष्ट उद्धरण इस पाठ के लिए सीमित रूप से उद्धृत हैं और पूर्ण टेक्स्ट नहीं दिए जाते। यदि आवश्यक हो, तो विशिष्ट पंक्तियाँ संदर्भित comments से चयनित कर दी जाएंगी।