2 इतिहास 26:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उज्जियाह राजा मरने के दिन तक कोढ़ी रहा, और कोढ़ के कारण अलग एक घर में रहता था, वह यहोवा के भवन में जाने न पाता था। और उसका पुत्र योताम राजघराने के काम पर नियुक्त किया गया और वह लोगों का न्याय भी करता था।

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2 इतिहास 26:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

पूर्व पाठ का प्रत्यक्ष संदर्भ और स्थिति

यह इतिहास किताब 2 इतिहास 26:21 में उज्जियाह राजा के अंतःस्थित अनुभव का उल्लेख है। राजा उज्जियाह कोढ़ से ग्रस्त होकर एक अलग घर में रहा, और इसलिए वह यहोवा के भवन तक पहुँच नहीं सका। उसका पुत्र योताम राजगृह के काम पर नियुक्त किया गया और लोगों के साथ न्याय भी करता रहा। यह स्थिति यह बताती है कि एक राजसी सत्ता और पवित्र सेवा के बीच परमेश्वर की योजना में कुछ विघटन आते हैं, लेकिन परमेश्वर की नीति और शासन का संचालन बना रहता है।

ईश्वर या विश्वास के बारे में टेक्स्ट क्या बताता है

इस पाठ से स्पष्ट संकेत मिलता है कि परमेश्वर के सम्मान और सेवा के कार्य राजा की शारीरिक स्थिति या सत्ता के कारण बाधित नहीं होते। उज्जियाह के रोग के कारण उसका पवित्रस्थान में प्रवेश कम हो गया, पर उसकी सत्ता और राज्य की व्यवस्था एक नई दिशा में जाती है। यह हमारे विश्वास के लिए यह संदेश देता है कि परमेश्वर के plan में भौतिक साधनों की कमी कभी-ना-कभी आ सकती है, पर परमेश्वर की वाणी और धर्मकार्य का क्रम चलता रहता है। साथ ही, यह भी दिखाता है कि परमेश्वर न्यायप्रिय है—राजा की कमी के समय भी व्यवस्था चलती रहती है और योग्य उत्तराधिकारी या सहयोगी सेवा देता है।

शब्दों व चित्रों की स्पष्टता

- कोढ़: भूषण के समान शारीरिक रोग जो राजा के अधिकारों को सीमित करता है। यह चित्र बनता है कि पाप या दायित्वों के कारण एक प्रमुख व्यक्ति का संपर्क पवित्र स्थानों से कट सकता है।
- “घर में रहा”: सामाजिक-धार्मिक आयोजन से बाहर रहने की स्थिति, जिससे पवित्र कार्य में भागीदारी बाधित होती है।
- “राजघराने के काम पर नियुक्त” and “न्याय भी करता रहा”: प्रत्यक्ष सत्ता-कार्य में कमी के बावजूद प्रशासनिक दायित्वों का अंत तक निर्वहन होता है—यह दिखाता है कि परमेश्वर के प्रबंध में विविध भूमिकाएं और उत्तरदायित्व एक साथ चलते हैं।

संबद्ध अंश (cross-references) — संक्षिप्त विचार

  • उद्धार और उपचार की दिशा: इसी प्रकार के अध्यायों में पाप के कारण रोग का प्रभाव दिखाया गया है, परन्तु जब आत्मा का संबद्ध बनता है, प्रभु की कृपा से पुनः स्थिति सुधरती है।
  • विधायिक व्यवस्था में परिवर्तन: राजा की बीमारी से प्रशासनिक व्यवस्था का संक्रमण दिखाई देता है—यह प्रायः दिखाता है कि परमेश्वर के जन्मजात योजना में हर भूमिका एक समय पर आती है।
  • पवित्र सेवा और अधिकार: यहुधी-राजाओं के समय पवित्र भवन तक पहुँच की असुविधा के बावजूद सामाजिक-न्याय में संतुलन बना रहता है।

प्रयुक्त पवित्र-उद्धरण (मूर्त अंश केवल आवश्यक होने पर)

यह पाठ सीधे Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के पूर्ण उद्धरणों का उदाहरण नहीं देता; यदि आवश्यक हो, तो उनके संक्षिप्त पंक्तिबद्ध विचारों का सार नीचे संचित है:

- Henry का तात्पर्य है कि परमेश्वर किसी राजा के दोष या रोग से सत्ता के अपराध को नहीं घटाते; बल्कि उनका उद्देश्य राष्ट्र के लिए मार्गदर्शन को सुनिश्चित करना होता है।

आज के लिए अनुप्रयोग

- कठिनाई चाहे रोगी स्थिति हो या आंतरिक कमजोरी, परमेश्वर के राज्य का क्रम अचल रहता है। हमारे खड़े रहने की जगह बदल सकती है, पर विश्वास-आधारित न्याय और प्रशासनिक दायित्व अंततः बनाए जाते हैं।

- आध्यात्मिक दृष्टि से चुनौतियाँ आने पर भी सामुदायिक उत्तरदायित्वों की पूर्ति जारी रहती है; रोग या बाधा के बावजूद ईश्वर के कार्य में भागीदारी संभव है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 26:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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लैव्यव्यवस्था 13:46 (HINIRV) »
जितने दिन तक वह व्याधि उसमें रहे उतने दिन तक वह तो अशुद्ध रहेगा; और वह अशुद्ध ठहरा रहे; इसलिए वह अकेला रहा करे, उसका निवास स्थान छावनी के बाहर हो। (लूका 17:12)

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“इस्राएलियों को आज्ञा दे, कि वे सब कोढ़ियों को, और जितनों के प्रमेह हो, और जितने लोथ के कारण अशुद्ध हों, उन सभी को छावनी से निकाल दें;

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गिनती 12:15 (HINIRV) »
अतः मिर्याम सात दिन तक छावनी से बाहर बन्द रही, और जब तक मिर्याम फिर आने न पाई तब तक लोगों ने प्रस्थान न किया।

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