2 इतिहास 26:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

उनके अधिकार में तीन लाख साढ़े सात हजार की एक बड़ी सेना थी, जो शत्रुओं के विरुद्ध राजा की सहायता करने को बड़े बल से युद्ध करनेवाले थे।

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2 इतिहास 26:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 इतिहास 26:13 — संदर्भात्मक परिदृश्य

यूदा के राजा during Uzziah के काल में शत्रु-सज्जित सेना का उल्लेख आता है: एक विशाल सेना जिसमें तीन लाख साढ़े सात हजार सैनिक थे, जो राजा की सहायता के लिए बड़े बल से युद्ध करने के लिए तैयार थे। यह विवरण उस समय के राजसी सामर्थ्य और राज्य की रक्षा की चिंता को दर्शाता है।

ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से मिलने वाला संकेत

यह वाक्य न केवल सैन्य शक्ति की चर्चा है, बल्कि यह दिखाता है कि परमेश्वर के लोग किन परिस्थितियों में भी भरोसा और धैर्य बनाए रखते हैं। राजा की सेना की विशालता देखते ही मनुष्य भ्रमित हो सकता है, परन्तु विश्वास提示 देता है कि परमेश्वर की योजनाएँ मानव की शक्ति से बड़ी हैं। ऐसे समयों में परमेश्वर के साथ किए गए आशीर्वाद और निर्देश ही असल रक्षा बनते हैं।

महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या

  • : राज्य-प्रधान की आस्था और नेतृत्व का संकेत—यह दल-बल होने के बावजूद राजा को परमेश्वर के निर्देश की आवश्यकता याद दिलाता है।
  • : शारीरिक सामर्थ्य बनाम परमेश्वर की सहायता—शक्ति के स्रोत का सही चयन दिखाता है कि युद्ध-अध्याय में परमेश्वर की अनुमति और मार्गदर्शन क्यों आवश्यक है।

संदर्भित वचनों से सम्बद्ध विचार

इस अध्याय में अन्य संदर्भों से मेल खाता है कि परमेश्वर अपनी रक्षा और विजय के लिए अलग-अलग तरीकों से सहायता भेजता है, भले ही सेना विशाल हो। उदाहरण के लिए, राजा के समय की कुछ घटनाओं में परमेश्वर का संरक्षण और मार्गदर्शन स्पष्ट रूप से उद्धारक भूमिका निभाते हैं।

पूर्व-संवेदी टिप्पणियाँ (सम्बंधित पाठ)

- इतिहास 25–29 अध्यायों में विविध राजाओं के साथ परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं और देह-स्वरूप रक्षा के उदाहरण मिलते हैं।

- प्रस्थान 14 और अन्य में कबूल भीतर परमेश्वर की शक्ति के सामने मानव शक्तियाँ निष्क्रिय पड़ जाती हैं।

- शब्द-चित्र और अवसरों के लिए न्याय और आशीष के दायरे में परमेश्वर की योजना उजागर होती है।

आज के संदर्भ में उपयोग

इस वाक्य से प्रेरणा मिलती है कि परमेश्वर के प्रेरित नेताओं को शक्ति का स्रोत ईश्वर से ही मानना चाहिए। प्रकृति-समर्थन और मानवीय संसाधनों के बावजूद, अंततः विश्वास-आधार पर निर्णय लेना और परमेश्वर की इच्छा के अनुसार कदम उठाना ही सफल मानव-जीवन का मार्ग है। कठिन समय में भी प्रार्थना, विनम्रता और धर्म-निष्ठा बनाए रखें ताकि परमेश्वर का सीधा मार्गदर्शन मिल सके।

संक्षिप्त मर्म

तीन लाख साढ़े सात हजार के विशाल बल के बावजूद पाठ यह स्मरण करवाता है कि शक्ति का स्रोत परमेश्वर की इच्छा और मार्गदर्शन है। राजा के कर्म और विश्वास की कसौटी यह है कि वह परमेश्वर के साथ-साथ अपनी सेना पर निर्भर न रहे, बल्कि परमेश्वर की सत्ता में अपनी रणनीतियों को तोड़े और उसके सुझाव स्वीकार करे।

सूत्र-संदर्भ (Brief cross-references with explanations)

cross-reference: (1) 2 इतिहास 26:5 — इतिहासकार का वर्णन कि उज्जाह ने परमेश्वर से दिलचस्पी बनाकर वही किया जो ईश्वर को भाता था; यह विश्वास-आधार का संकेत है।

cross-reference: (2) व्यवस्थाविधान 20:1 — बड़े युद्धों में यजन-निर्देशा का महत्व बताता है कि परमेश्वर के मार्ग के अनुसार ही लड़ना चाहिए।

cross-reference: (3) 1 शम 17:45-47 — युवा दाऊद की विषम परिस्थिति में परमेश्वर की सहायता का प्रमाण है कि युद्ध केवल शरीर-बल नहीं, परमात्मा की कृपा से जुड़ा है।

महत्वपूर्ण उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से मौजूदा शाब्दिक पंक्ति):

— "यद्यपि सेना विशाल है, परन्तु परमेश्वर आगे बढ़कर सहायता करता है और राजा को धैर्यपूर्वक मार्गदर्शन देता है।" (अर्थ-संक्षेप, समेकित टिप्पणी के रूप में)

नोट: मौलिक टिप्पणी-पत्रों से प्रत्यक्ष शब्द-संदेश उपलब्ध होने पर भी हिंदी पाठ के अनुसार संकलित सार प्रस्तुत किया गया है; ऊपर के उल्लेखित उद्धरण केवल समान विचार-व्यूह के रूप में दिए गए हैं, न कि पूर्ण उद्धरण।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 26:13 समानांतर पद और संबंधित वचन

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तब अमस्याह ने यहूदा को वरन् सारे यहूदियों और बिन्यामीनियों को इकट्ठा करके उनको, पितरों के घरानों के अनुसार सहस्‍त्रपतियों और शतपतियों के अधिकार में ठहराया; और उनमें से जितनों की अवस्था बीस वर्ष की अथवा उससे अधिक थी, उनकी गिनती करके तीन लाख भाला चलानेवाले और ढाल उठानेवाले बड़े-बड़े योद्धा पाए।

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जब रहबाम यरूशलेम को आया, तब उसने यहूदा और बिन्यामीन के घराने को जो मिलकर एक लाख अस्सी हजार अच्छे योद्धा थे इकट्ठा किया, कि इस्राएल के साथ युद्ध करे जिससे राज्य रहबाम के वश में फिर आ जाए।

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इनके पितरों के घरानों के अनुसार इनकी यह गिनती थी, अर्थात् यहूदी सहस्‍त्रपति तो ये थे, प्रधान अदनह जिसके साथ तीन लाख शूरवीर थे,

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