Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
2 इतिहास 1 2 इतिहास 2 2 इतिहास 3 2 इतिहास 4 2 इतिहास 5 2 इतिहास 6 2 इतिहास 7 2 इतिहास 8 2 इतिहास 9 2 इतिहास 10 2 इतिहास 11 2 इतिहास 12 2 इतिहास 13 2 इतिहास 14 2 इतिहास 15 2 इतिहास 16 2 इतिहास 17 2 इतिहास 18 2 इतिहास 19 2 इतिहास 20 2 इतिहास 21 2 इतिहास 22 2 इतिहास 23 2 इतिहास 24 2 इतिहास 25 2 इतिहास 26 2 इतिहास 27 2 इतिहास 28 2 इतिहास 29 2 इतिहास 30 2 इतिहास 31 2 इतिहास 32 2 इतिहास 33 2 इतिहास 34 2 इतिहास 35 2 इतिहास 36Verse
2 इतिहास 26:1 2 इतिहास 26:2 2 इतिहास 26:3 2 इतिहास 26:4 2 इतिहास 26:5 2 इतिहास 26:6 2 इतिहास 26:7 2 इतिहास 26:8 2 इतिहास 26:9 2 इतिहास 26:10 2 इतिहास 26:11 2 इतिहास 26:12 2 इतिहास 26:13 2 इतिहास 26:14 2 इतिहास 26:15 2 इतिहास 26:16 2 इतिहास 26:17 2 इतिहास 26:18 2 इतिहास 26:19 2 इतिहास 26:20 2 इतिहास 26:21 2 इतिहास 26:22 2 इतिहास 26:23



अर्थ का प्रत्यक्ष सार (2 इतिहास 26:23, HINIRV)
पर scripture में कहा गया है कि उज्जियाह की मृत्यु के बाद वे पुरखाओं के साथ चले गए और उन्हें राजाओं के मिट्टी के खेत में दफन किया गया क्योंकि उन्हें कोढ़ी माना गया था; उनका पुत्र योताम उनके स्थान पर राज्यपुरी हुआ।
पृष्ठभूमि
यह योग्यता-युक्त खानापानी वाले अध्याय में यूँ लिखा गया है कि उज्जियाह की बीमारी और उसके बाद का शासन-समाप्ति क्रम राजा-वंश के इतिहास को एक नैतिक चिह्न देता है। जो व्यक्ति ऊँचे मापदंडों पर खरा उतरता है, उसकी भी देहांत के बाद सम्मान नहीं मिलता—परन्तु परमेश्वर के स्वर्गीय योजना में सत्ता एक उत्तराधिकार के साथ नहीं, बल्कि उसके विधान के अनुसार चलती है।
तात्पर्यपूर्ण अवलोकन
मुख्य विचार
अन्य प्रासंगिक पाठ/संदर्भ
1) 2 इतिहास 26 में उज्जियाह का उल्लेख और उसकी बीमारी—यह बताता है कि धार्मिक अधिकारी और उच्च राजमहल का दायित्व किस प्रकार निभाया गया।
2) 2 इतिहास 27-28 में योताम के शासन की शुरुआत—यह दिखाता है कि परमेश्वर की योजना के अनुसार सत्ता संचालित होती है, भले ही पूर्व राजा की स्थिति अस्पष्ट क्यों न हो।
3) अन्य उल्लेखित राजा-कथा में रोग और सामाजिक व्यवहार के बीच सम्बन्ध—यह दर्शाता है कि नैतिक कलह सामाजिक-धार्मिक ढांचे को प्रभावित करता है।
संक्षेपित उपदेश
उज्जियाह के निधन के साथ जो सत्ता–परिस्थितियाँ हैं, वे बता देती हैं कि परमेश्वर के भय से जीना औरHis नियत के अनुसार चलना ही जीवन की स्थिरता है। पीछे रहना, या बीमारी के कारण अपमानित होना, मानव भाग्य का भाग है; परन्तु परमेश्वर अपने निर्णयों में न्याय और दया दोनों दिखाते हैं।
क्रॉस-रेफ्रेन्स (सहयोगी पाठ)
1) 2 इतिहास 25–26: राजा की भूमिका और रोग-गुण
2) राजगणना में राजा-वंश का प्रभंजन: एक कारण से सत्ता परिवर्तन कैसे होता है
3) नीतिवचन से दिखती हैं मानव-आत्म-गति बनाम परमेश्वर का आदेश
व्याख्या के अनुसार, इस पाठ में यह देखा जा सकता है कि दफन और सम्मान का प्रश्न सामाजिक मानदंडों से जुड़ा है, पर परमेश्वर की योजना और प्रेरणा ऊपर है। इसलिए, प्रेरित पाठक के लिए यह सिखाता है कि सत्ता और सामाजिक स्थिति चाहे जो भी हो, विश्वास और परमेश्वर के आदेश पर ही जीवन की स्थिरता है।
मैथ्यू हेनरी, अॅल्बर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क के संक्षिप्त उद्धरण (जहाँ उपलब्ध):
“जो रोगी हो उसकी मृत्यु के साथ उसकी प्रतिष्ठा पृथक नहीं होती, क्योंकि परमेश्वर की योजना के अनुसार ही सब कुछ चलता है।”
“राजा के पद के लिए परिवर्तन परमेश्वर के नियोजन को नहीं रोकते।”