Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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2 इतिहास 26:1 2 इतिहास 26:2 2 इतिहास 26:3 2 इतिहास 26:4 2 इतिहास 26:5 2 इतिहास 26:6 2 इतिहास 26:7 2 इतिहास 26:8 2 इतिहास 26:9 2 इतिहास 26:10 2 इतिहास 26:11 2 इतिहास 26:12 2 इतिहास 26:13 2 इतिहास 26:14 2 इतिहास 26:15 2 इतिहास 26:16 2 इतिहास 26:17 2 इतिहास 26:18 2 इतिहास 26:19 2 इतिहास 26:20 2 इतिहास 26:21 2 इतिहास 26:22 2 इतिहास 26:23



अर्थ का प्रत्यक्ष बयान
यह पद कहता है कि उज्जियाह के जन्म से लेकर उसके प्रसिद्ध कार्यों तक का वर्णन आमोत्स के पुत्र यशायाह नबी ने किया है। सरल शब्दों में, यह बताता है कि इतिहास 26 में उज्जियाह के कार्यों को लिखित रूप में प्रस्तुत करने का स्रोत यशायाह है और वह लेखक है जो उन घटनाओं के पीछे के उद्देश्य और विवरण को रेखांकित करता है।
प्रसंग-विवरण
2 इतिहास 26 अध्याय में उज्जियाह की राजगद्दी पर चढ़ावट से लेकर उसके शासनकाल की विशेषताओं का उल्लेख मिलता है। यह पंक्तियाँ पवित्र इतिहास की मध्यस्थता में दर्शाती हैं कि वह राजा लंबे समय तक राजनीतिक और धार्मिक सुधारों के बीच से होकर गुज़रा। नबी यशायाह, जो उसी समय के थे, ने इन घटनाओं को सुरक्षित और क्रमबद्ध तरीके से लिखा।
व्याख्यात्मक बिंदु
छोटी तथा उपयोगी thematic सूची
अन्य सन्दर्भ जिन्हें देखें
— संदर्भ 1: राजा-रजवाड़ों के रूपांतरणों में नबी की भूमिका—यशायाह के लेखन से पाठक यह समझ पाते हैं कि कौन से घटनाकाल धार्मिक पुनर्जागरण के लिए संकेत देते हैं।
— संदर्भ 2: इतिहास की लेखन-धारा—यह दिखाता है कि कैसे एक नबी इतिहास को प्रेरक शिक्षा के साथ प्रस्तुत करता है, ताकि प्रचार और नैतिकता में संतुलन बना रहे।
— संदर्भ 3: परमेश्वर-आस्था बनाम बाहरी शासन—राजसी शक्तियों के भीतर आत्मा-संयोजन का महत्त्व उजागर होता है।
यहाँ से सीखने योग्य निष्कर्ष
- धर्म और राजनीति दोनों में परमेश्वर की दृष्टि केन्द्रित रहे, यह स्पष्ट है कि सचापना और धार्मिक सच्चाई का समन्वय ही स्थायित्व देता है।
- नबी की लेखनी इतिहास को प्रेरणा-स्रोत बनाती है, ताकि पीढ़ियाँ यह समझ सकें कि ईश्वर के उद्देश्य कितने नटखट और गहराई वाले हो सकते हैं।
संक्षिप्त अनुप्रयोग
अपने जीवन में आप भी देखें कि आप किस प्रकार अपने कार्यों की नैतिकता और पवित्रता का मिलान परमेश्वर के मानक से कर रहे हैं। अपने निर्णयों में धैर्य, विनम्रता और ईमानदारी बनाए रखें, ताकि आदर्श शासन में भी कर्तव्य का पालन संभव हो सके।
क्रॉस-रेफरेंस नोट
1) इतिहास 25–27 अध्यायों में राजाओं के चरित्र-चित्रण से संबंधित अन्य टिप्पणी; 2) नीतिवचन-तत्व जो राजा के नैतिक निर्णयों को दिशा देते हैं; 3) यशायाह के अन्य संदर्भ जो नबी की भूमिका और संदेश की प्रकृति को उजागर करते हैं।
मुख्य उद्धरण: यह टिप्पणी सूत्रों के सीधे पाठ की भाषा में नहीं है, पर लाइन-अप बताती है कि यशायाह ने उज्जियाह के कार्यों का रिकॉर्ड लिखा—यह वही संरचना है जिसे Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke ने सार्वजनिक-डोमेन प्रविष्टियों में वर्णित किया है।
यथार्थ उद्धरण संकेत: यदि उपलब्ध हों, तो उपरोक्त चारों टिप्पणीकारों के स्पष्ट उद्धरणों की पहचान नीचे के संदर्भों में दी जाएगी।