2 इतिहास 26:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जकर्याह के दिनों में जो परमेश्‍वर के दर्शन के विषय समझ रखता था, वह परमेश्‍वर की खोज में लगा रहता था; और जब तक वह यहोवा की खोज में लगा रहा, तब तक परमेश्‍वर ने उसको सफलता दी।

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2 इतिहास 26:5 पद-दर-पद बाइबल टीका

पाठ का संक्षेप और संदर्भ

2 इतिहास 26 अध्याय में यूज़ेह राजाओं की इतिहासगत पथ-यात्रा दिखाई जाती है। इस खंड में मुख्य प्रेरक संदेश यह है कि परमेश्वर की खोज और उसकी राह पर दृढ़ निष्ठा रखने से mänुष्य को सफलता मिलती है। विशेष पंक्ति जकर्याह के काल की दृष्टि से बताती है कि जो परमेश्वर की दृष्टि और दर्शन को समझता है, वह उसकी खोज में लगा रहता है और जब वह ऐसा करता है, परमेश्वर उसे सफल बनाता है।

कथन का पाठ

जकर्याह के दिनों में जो परमेश्वर के दर्शन के विषय समझ रखता था, वह परमेश्वर की खोज में लगा रहता था; और जब तक वह यहोवा की खोज में लगा रहा, तब तक परमेश्वर ने उसको सफलता दी।

मुख्य आध्यात्मिक पाठशाला

इस पद के पीछे वह विचार है कि ईश्वर की खोज में क्षण-भर भी हेर-फेर नहीं होनी चाहिए। जो धर्मी व्यक्ति परमेश्वर के दर्शन पर दृढ़ रहता है, उसे जीवन की हर कठिनाई में भी सहायता मिलती है। यहाँ यह भी समझ आता है कि सफलता केवल साधनों की नहीं, बल्कि परमेश्वर की कृपा और मार्गदर्शन की देन है, जो तब प्रकट होती है जब मनुष्य सत्य और निष्ठा के साथ उसकी खोज में लगा रहता है।

पुल के समान तुलना: अन्य बाइबल पाठ

  • दाऊद के समय भी इसी दिशा की चर्चा है—परमेश्वर की खोज में निरंतरता से उपलब्धि मिलती है।
  • नहेम्याह में भी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद परमेश्वर की प्रेरणा पर भरोसा कर सामर्थ्य मिलती है।
  • नीति-शास्त्र के अनुसार यहोवा पर विश्वास करने वाले के लिए सदैव मार्ग खुलते हैं।

सहायक क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षेप

1) दाऊद का विश्वास—यही सिद्धांत कि परमेश्वर की खोज में दृढ़ रहने पर विजय मिलती है; 2) नहेम्याह—कठिन समय में भी परमेश्वर की सहायता पर निर्भर रहने से सफल बनना; 3) याकूब 1:12 जैसी भावना—धैर्य राजाओं के लिए वरदान बनता है जब वह धर्म के अनुसार चलता है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

- अपनी दिनचर्या में परमेश्वर की खोज को पहले स्थान दें: प्रार्थना, पठन-पाठन, और चरणबद्ध नैतिक निर्णयों में उसकी इच्छा को समझने की कोशिश करें।

- कठिनाई आए तो भी रास्ते में हार न मानें; दृढ़ता और विश्वास से आगे बढ़ें, क्योंकि परमेश्वर वही मार्गदर्शक है जो सचेत प्रयास पर भी कृपा बढ़ाता है।

- नयी दिशा में कदम उठाते समय दर्शन-समझ को दर्पण की तरह लें: क्या आपका लक्ष्य परमेश्वर की महिमा है, न कि अपने स्वार्थ का प्रकाश?

छोटी-सी समरी

यह संदेश स्पष्ट करता है कि जो परमेश्वर के दर्शन को समझकर उसकी खोज में लगा रहता है, ऐसी निष्ठा के कारण परमेश्वर उसे सफल बनाता है। यह पाठ हमारे छोटे-से गतिविधियों में भी ईश्वर को केंद्रित करने की मांग करता है—यही सच्ची सफलता की कुंजी है।

नोट्स पर आधारित व्याख्या

यह आलेख निकट-अर्थ में यही संकेत देता है: धार्मिक खोज और विश्वास-कार्य एक साथ चलते हैं; जब एक व्यक्ति अपनी दृष्टि को परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप बनाता है, तब उसका जीवन सफलता से परिपूर्ण होता है。

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 26:5 समानांतर पद और संबंधित वचन

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जब तक यहोयादा याजक जीवित रहा, तब तक योआश वह काम करता रहा जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है।

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और वह आसा से भेंट करने निकला, और उससे कहा, “हे आसा, और हे सारे यहूदा और बिन्यामीन, मेरी सुनो, जब तक तुम यहोवा के संग रहोगे तब तक वह तुम्हारे संग रहेगा; और यदि तुम उसकी खोज में लगे रहो, तब तो वह तुम से मिला करेगा, परन्तु यदि तुम उसको त्याग दोगे तो वह भी तुमको त्याग देगा।

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तू तब ही कृतार्थ होगा जब उन विधियों और नियमों पर चलने की चौकसी करेगा, जिनकी आज्ञा यहोवा ने इस्राएल के लिये मूसा को दी थी। हियाव बाँध और दृढ़ हो*। मत डर; और तेरा मन कच्चा न हो।

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