Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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2 इतिहास 12:15 पर टिप्पणी—पाठ का संदर्भ और अर्थ
यह अध्याय उत्तराधिकार के समय रवाम के उत्तराधिकारी रोबोहम के कारण हो रही राजसी अस्थिरता का समापन-चिह्न है। श्लोक 15 के संदर्भ में इतिहासकार यह बताता है कि रोबोहम का शासनकाल जैसा क्रम चल रहा था, वैसा ही अब भी रहा—परन्तु दाऊद की संतानों के इतिहास-ग्रंथों में जो भागीदारियाँ और वंशावलियाँ दी गई हैं, वे शुद्ध रूप से विरधान नहीं हो पातीं। यह पंक्तियाँ या तो संक्षेप में बताती हैं कि शास्त्रीय वंशावलियाँ कहाँ-कहाँ नहीं लिखी गईं, या यह संकेत करती हैं कि विशिष्ट रिकॉर्ड स्वयं शत्रुता और वैयक्तिक राज-युद्घों से प्रभावित थे।
मुख्य विचार
मुख्य थीम
संबद्ध पवित्र ग्रंथ के दृष्टांत
यह शास्त्रांश अन्य इतिहास-उद्धरणों के साथ विचार करने योग्य है जहाँ राजाओं के युग में इतिहास-लिपि के चयन और कड़ी जाँच की आवश्यकता पर बल दिया गया है। उदाहरणार्थ, राजा दाऊद के उत्तराधिकारी वंशावली से जुड़ी पंक्तियाँ जहाँ स्थिरता बनाये रखने के लिए रिकॉर्ड आवश्यक दिखते हैं।
यहां से सीखा जाने वाला व्यवहार
1) सत्ता के समय में भी अगर कुछ घटनाक्रम दूर रह जाएँ, तो भी परमेश्वर के उद्देश्य नहीं टूटते। 2) इतिहासकारों के लेखन में स्पष्टता और सत्य की खोज बनी रहती है, पर कभी-कभी साहित्यिक सीमाओं के कारण कुछ विवरण अधुरे रह जाते हैं। 3) हमारी आत्मा को धैर्य से समझना चाहिए कि प्रभु के नियम और वायदे जीवन की व्यापक रूपरेखा बनाते हैं, न कि हर छोटे-छोटे रिकॉर्ड से हमारे विश्वास की गति रुक जाए।
Related Cross-References (संक्षिप्त परिचय)
संक्षिप्त समापन
2 इतिहास 12:15 लेखक का यह संकेत है कि इतिहास-लेखन में कुछ विवरण नहीं लिखे गए या वैयक्तिक रिकॉर्ड सीमित रहे; परन्तु यह यह बताने के लिए पर्याप्त है कि राजाओं के युग में संघर्ष और सत्ता-चालें निरंतर चलती रहीं। हमारे लिए पर्याप्त संदेश यह है कि परमेश्वर की योजना के भीतर सत्य और धैर्य की आवश्यकता है, भले ही लेखन के पन्ने हर घटना को नहीं पकड़ पाते।
महत्वपूर्ण उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke): यदि उपलब्ध हों तो केवल शुद्ध पवित्र-ग्रंथ-आधारित संक्षिप्त पंक्तियाँ उल्लेखित होंगी; नीचे दिए गए उद्धरण पूर्ण-वाक्य के रूप में उद्धृत नहीं हैं, केवल संदर्भ के रूप में संकेतित हैं।
Matthew Henry ने समय-समय पर प kings का इतिहास समझाते हुए कहा है कि राजाओं के युग में रिकॉर्ड-लेखन की सीमाएँ रहती हैं, और ये सीमाएँ परमेश्वर के कार्यक्रम को नहीं चलित करतीं। उद्धरण-उद्धृत नहीं.
Albert Barnes और Adam Clarke ने भी यही विचार प्रस्तुत किया है कि ऐतिहासिक विवरणों में कुछ घटनाओं का अभिलेख न रहना, इतिहास की व्यवस्थित समीक्षा को प्रभावित नहीं करता, क्योंकि परमेश्वर के योजनापूर्ण कार्य का उद्देश्य व्यापक रहता है। उद्धरण-उद्धृत नहीं.