Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
2 इतिहास 1 2 इतिहास 2 2 इतिहास 3 2 इतिहास 4 2 इतिहास 5 2 इतिहास 6 2 इतिहास 7 2 इतिहास 8 2 इतिहास 9 2 इतिहास 10 2 इतिहास 11 2 इतिहास 12 2 इतिहास 13 2 इतिहास 14 2 इतिहास 15 2 इतिहास 16 2 इतिहास 17 2 इतिहास 18 2 इतिहास 19 2 इतिहास 20 2 इतिहास 21 2 इतिहास 22 2 इतिहास 23 2 इतिहास 24 2 इतिहास 25 2 इतिहास 26 2 इतिहास 27 2 इतिहास 28 2 इतिहास 29 2 इतिहास 30 2 इतिहास 31 2 इतिहास 32 2 इतिहास 33 2 इतिहास 34 2 इतिहास 35 2 इतिहास 36Verse
2 इतिहास 25:1 2 इतिहास 25:2 2 इतिहास 25:3 2 इतिहास 25:4 2 इतिहास 25:5 2 इतिहास 25:6 2 इतिहास 25:7 2 इतिहास 25:8 2 इतिहास 25:9 2 इतिहास 25:10 2 इतिहास 25:11 2 इतिहास 25:12 2 इतिहास 25:13 2 इतिहास 25:14 2 इतिहास 25:15 2 इतिहास 25:16 2 इतिहास 25:17 2 इतिहास 25:18 2 इतिहास 25:19 2 इतिहास 25:20 2 इतिहास 25:21 2 इतिहास 25:22 2 इतिहास 25:23 2 इतिहास 25:24 2 इतिहास 25:25 2 इतिहास 25:26 2 इतिहास 25:27 2 इतिहास 25:28



2 इतिहास 25:5 — तुरंत संदर्भ और पाठ का परिवेश
यह पाठ यहूदा के राजा Amaziah के शासनकाल के पहले चरणों का परिचय देता है। अमस्याह ने यहूदा और बिन्यामीन के सब मजबूत युवाओं को इकठ्ठा किया, जिससे वह पितरों के घरानों के अनुसार सहस्रपतियों और शतपतियों की गिनती कर सके। गिनती की शर्त यह थी कि उम्र बीस वर्ष या उससे अधिक हो। परिणामस्वरूप तीन लाख भाला चलानेवाले और ढाल उठानेवाले बड़े योद्धा मिलते हैं।
God या faith के पाठ से आलोक
यह भाग दिखाता है कि राज्य व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सेना-संरचना पर जोर देना सामान्य था। किंतु सच्चे विश्वास के संदर्भ में, यहूदा की सैन्य तैयारी को नीति-निष्ठता और आध्यात्मिक निर्देश से जोड़ना चाहिए। किताब के आगे बढ़ने पर पाठक देखता है कि अमस्याह की योजना में परमेश्वर की अनुमति, मार्गदर्शन और सहायता कितनी निर्णायक भूमिका निभाती है। यह बताता है कि ताकत भौतिक बल नहीं, बल्कि परमेश्वर के मार्गर्शन और आज्ञाओं के पालन से आती है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्ट व्याख्या
अन्य संदर्भों से संबंध
— 2 इतिहास 25 में राजा Amaziah की सैन्य तैयारी का आरंभात्मक चित्र। यह वही समय है जब परमेश्वर के निर्देश पाना और उनकी सहायता प्राप्त करना आवश्यक माना गया।
— इस अध्याय में आगे आने वाले प्रसंग बताते हैं कि परमेश्वर की इच्छा के विरुद्ध योजना लेने पर परिणाम कैसे होते हैं; इस पाठ से यह स्पष्ट होता है कि नीति-निर्माण और आशीषों का स्रोत परमेश्वर ही है।
प्रमुख टिप्पणियाँ (नई 합)
इस पाठ का मूल संदेश यह है कि प्रेरणा और शक्ति दोनों का स्रोत परमेश्वर है, परन्तु मानवीय योजना भी धर्म-निष्ठा और कर्तव्य-परायणता के साथ होनी चाहिए। अमस्याह ने सेना की संख्या बढ़ाकर एक ठोस बल बनाय, परंतु सफलता की अंतिम मुट्ठी परमेश्वर के आदेशों के पालन और उसकी कृपा से ही बनती है।
मैथ्यू हेनरी, अर्बन बर्न्स, एडम क्लार्क के संकेत
इस पंक्ति पर इन पुरानी टीका-कर्ताओं के प्रमुख बिंदु निम्न हैं: सेना की संख्या का इकट्ठा होना एक व्यवस्थात्मक कदम है, जो सामाजिक और धार्मिक संरचना के साथ जुड़ा हुआ है; परन्तु वास्तविक सुरक्षा और सफलता परमेश्वर के मार्गदर्शन पर निर्भर करती है।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण (जहाँ उपलब्ध):
“परमेश्वर के आशीर्वाद के बिना मनुष्य की बुद्धि जैसे वेंटिलेशन के बिना धनुष्क है।”
नोट: ऊपर दिया गया उद्धरण विशिष्ट रूप से Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शब्दों का सीधे उद्धरण नहीं है, बल्कि उनके प्रकार-क्रम के विचारों के अनुरूप है। यदि उपलब्ध हो, तो exact शॉर्ट उद्धरण नीचे दिए गए तीनों टीका-कर्ताओं से मिल सकता है।
आज के पाठक के लिए व्यवहारिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंस
— नीति बनाते समय परमेश्वर के मार्गदर्शन की आवश्यकता पर विचार, जैसे कि चयन और आगे की योजना में।
— आस्था और कर्म के संतुलन पर जोर, ताकि शक्ति के साथ विनम्रता और धैर्य बना रहे।
समाप्तिमा: इस पाठ से समझ में आता है कि परमेश्वर की अनुमति के बिना मानव-योजना अधूरी है; फिर भी उचित संरचना और प्रशासनिक कौशल से बेहतर परिणाम आ सकते हैं, यदि वे परमेश्वर के मार्गदर्शन के भीतर हों।