Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
2 इतिहास 1 2 इतिहास 2 2 इतिहास 3 2 इतिहास 4 2 इतिहास 5 2 इतिहास 6 2 इतिहास 7 2 इतिहास 8 2 इतिहास 9 2 इतिहास 10 2 इतिहास 11 2 इतिहास 12 2 इतिहास 13 2 इतिहास 14 2 इतिहास 15 2 इतिहास 16 2 इतिहास 17 2 इतिहास 18 2 इतिहास 19 2 इतिहास 20 2 इतिहास 21 2 इतिहास 22 2 इतिहास 23 2 इतिहास 24 2 इतिहास 25 2 इतिहास 26 2 इतिहास 27 2 इतिहास 28 2 इतिहास 29 2 इतिहास 30 2 इतिहास 31 2 इतिहास 32 2 इतिहास 33 2 इतिहास 34 2 इतिहास 35 2 इतिहास 36Verse
2 इतिहास 25:1 2 इतिहास 25:2 2 इतिहास 25:3 2 इतिहास 25:4 2 इतिहास 25:5 2 इतिहास 25:6 2 इतिहास 25:7 2 इतिहास 25:8 2 इतिहास 25:9 2 इतिहास 25:10 2 इतिहास 25:11 2 इतिहास 25:12 2 इतिहास 25:13 2 इतिहास 25:14 2 इतिहास 25:15 2 इतिहास 25:16 2 इतिहास 25:17 2 इतिहास 25:18 2 इतिहास 25:19 2 इतिहास 25:20 2 इतिहास 25:21 2 इतिहास 25:22 2 इतिहास 25:23 2 इतिहास 25:24 2 इतिहास 25:25 2 इतिहास 25:26 2 इतिहास 25:27 2 इतिहास 25:28


मुख्य व्याख्या का केंद्र बिंदु
2 इतिहास 25:26 का यह संदर्भ एक संपूर्ण इतिहास-पत्र का उद्धरण है जिसमें राजा असीम्याय (अमस्याह) के कार्य और यहूदा-इस्राएल के राजाओं की पुस्तकों के अभिलेखों की पुष्टि मिलती है। यहाँ लेखक बताता है कि कुल मिलाकर यह घटनाएँ उसी इतिहास-ग्रंथ में दर्ज हैं, जिनके भीतर उनके लाए गए फैसलों और प्रयत्नों का मूल्यांकन किया गया है। इस वाक्य का उद्देश्य यह है कि पाठक जान ले कि औचित्य, योग्यता और कर्तव्य से संबंधित घटनाओं का संपूर्ण रेकॉर्ड अन्य पुस्तकों में भी सुरक्षित है; इतिहास-क्रिया एकत्रित रूप में और सत्यापित तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी_CONTEXT)
यह पंक्ति इतिहास-उपाख्यानों के समांतर एक स्रोत-संदर्भ की तरह है। यह दर्शाता है कि इतिहास के कई हिस्से एक दूसरे से सम्बद्ध हैं—यहूदाओं के राजाओं के इतिहास की रेखा में अमस्या का शासन, और इस्राएल के राजाओं के रिकॉर्ड—जो एक-दूसरे को पुष्ट करते हुए समग्र चित्र बनाते हैं। यह मूलतः पाठक को याद दिलाता है कि इतिहास का सच बहुआयामी है, और जिन घटनाओं के बारे में लिखा गया है, वे पहले से ज्ञात अभिलेखों में भी दर्ज हैं।
धार्मिक महत्व ( theological_significance )
यह उद्धरण यह संकेत देता है कि परमेश्वर की योजना में विभिन्न राजाओं के दौर भी एक व्यापक क्रम का हिस्सा हैं। अगर किसी राजा के अच्छे या बुरे कार्य का रिकॉर्ड दूसरे पन्नों में भी आता है, तो यह ईश्वर की न्यायपूर्ण स्मरण शक्ति और स्मृतियों के संग्रह की गवाही देता है। पाठक यह देख सकता है कि उचित संरक्षण और समन्वय के साथ इतिहास का सच एकदम स्पष्ट रहता है।
पाठ्य-विवेचन (Cross-References and Connections)
मनन के प्रश्न (Reflection Questions)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह वाक्य बताता है कि पुराने अभिलेख एकत्रित और सत्यापित रूप में एकत्रित रहते हैं। अमस्या जैसे राजा के कार्यों का उल्लेख उनके समय के इतिहास के साथ-साथ अन्य अभिलेखों में भी मिलता है, जिसका अर्थ यह है कि परमेश्वर-योजना में घटनाओं का एक स्पष्ट, समन्वित क्रम है। इतिहास का सत्य एक पुख्ता आधार है, जिस पर विश्वसनीय विश्वास–निर्माण संभव होता है।
एक त्वरित क्रॉस-चेक सूची
पढ़ने के लिए सुझाव देने वाले छोटे संकेत:
नोट: नीचे दी गई उद्धृत पंक्तियाँ Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट अनुवादित या संक्षिप्त वाक्यों के सीधे उद्धरण के रूप में शामिल हैं तो वे केवल संक्षेप में हवालाकृत किये गए हैं।
उद्धृत विचार (कब्बेल) उद्धरण यदि उपलब्ध हों: “...वह इतिहास की पंक्तियाँ भी…”