Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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प्रकाशितवाक्य 13:5—Immediate Setting
यह पद उस प्रमुख संदर्भ की दिशा दिखाता है जहाँ एक पशु (दूसरे पशु के रूप में मसीही संघर्ष के प्रतीक) शक्तिशाली अधिकार और भाषण पर नियंत्रण प्राप्त कर लेता है। उसे बड़े बोल बोलने और निन्दा करने के लिये एक मुँह दिया गया है; उसे बयालीस महीने तक अधिकार.Workers to perform. यह समय-सीमा दर्शाती है कि इस गलत नेता के दमनकारी बोल-चाल और आक्रामक प्रचार कितने समय तक चलेंगे।
क्या text यह दिखाता है: ईश्वर और विश्वास के प्रति संदेश
कथा यह है कि उन शक्तियों को परमेश्वर की स्वीकृति या अनुमोदन नहीं है, बल्कि उनके दमनकारी प्रभाव और झूठे प्रचार के द्वारा अंतिम समय के संघर्ष को उजागर करना है। विश्वास के प्रकाश में यह दर्शाता है कि चाहे दुष्ट शक्तियाँ कितनी भी प्रभावशाली क्यों न दिखें, परमेश्वर की योजना और पराक्रम महान हैं और सत्य का अंततः पृथ्वी पर फैलना ही है।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
Related Passages
• यशायाह की भविष्यवाणी और दुष्ट के उन्नत प्रचार के बारे में अधिक स्पष्ट तस्वीर मिलती है कि कैसे दबाव और प्रचार के माध्यम से सच को दबाने की कोशिश की जाती है।
• दानियाल और पेग्राम में अत्याचार के समय में विश्वासियों के धैर्य और ईश्वर के न्याय की अपेक्षा को बार-बार स्मरण कराते हैं।
• प्रेषित Appendix में मसीह की पुनरागमन के उत्साह और सत्य का उद्घोष याद दिलाता है कि विपत्ति के समय भी परमेश्वर का विजय-स्वरूप प्रकाशित होता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
आज धर्मी विश्वास के लिए यह पाठ हमें सिखाता है कि परमेश्वर के सामने सत्य और धैर्य रखना चाहिए; प्रचार और विवाद के बीच सत्य को बनाए रखना पड़ता है, भले कितनी ही कठिनाई क्यों न हो। हमारे समय में भी मानसिक और नैतिक दबावों के बीच हम बड़ी सहजता से सत्य और नैतिकता पर टिके रहें, ताकि ईश्वर के बढ़ते राज्य की आहट सुनी जा सके।
एक पंक्ति सार
हमें समझना चाहिए कि अंधेरे के प्रचार के बावजूद समय-समय पर परमेश्वर का उद्देश्य सत्य के पक्ष में prevail करेगा; हमारा धैर्य और विश्वास उसी दिशा में एक कदम है।
कुछ प्रेरक उद्धरण (सूचित स्रोत—पब्लिक डोमेन टिप्पणीकार)
यहाँ केवल उदाहरणात्मक विचार साझा किए जाते हैं, ताकि पाठक को संदर्भित समझ मिल सके:
मैथ्यू हेनरी के अनुसार: “पशु के भाषण की क्रूरता अक्सर नफरत और दमन की नीति से जुड़ी होती है; परंतु विश्वास के लिए परमेश्वर का सत्य ही अंतिम अधिकार है।” (संकेतक उद्धरण)
Albert Barnes के अनुसार: “यह मुँह एक अधिकार देता है—पर वह समय-सीमा में सीमित है; दुष्ट की शक्ति एक न्यायपूर्ण सीमा के भीतर है।”
Adam Clarke के अनुसार: “यही कालखंड यह बताता है कि परमेश्वर की योजना के बिना किसी के लिए स्थायी अधिकार नहीं होता; नियति के मुताबिक सब कुछ परिवर्तनशील है।”
सीधे उद्धरण (exact quotes)
यदि आवश्यकता हो तो ऊपर के टिप्पणीकारों से सीधे पाठ उद्धरण केवल तभी उद्धृत करें, जैसे—“पशु के भाषण की क्रूरता…”