Old Testament
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प्रकाशितवाक्य 13:12 का हिन्दी टिप्पणी (HINIRV)
यह पद पत्र पर एक निर्दिष्ट चिह्न देता है: पृथ्वी पर एक दूसरा पशु जो पहले पशु के साथ सम्बद्ध है, उसके सामने सब काम करता है और पृथ्वी व उसके निवासियों को पहले पशु की पूजा करने के लिये प्रेरित करता है। यह भाग सोच-विचार कर दिखाता है कि कैसे प्रतिशोध और विस्मय के साथ एक साम्राज्य/components, जो पूर्ववर्ती सत्ता पर निर्भर है, एक नए पर आधिपत्य स्थापित कर लेता है, भले ही वह पहले पशु के घावों की पुनर्स्थापना से जुड़ा हो।
मुख्य अर्थ
यह verses पहले पशु की शक्ति और उसके प्रभाव की सीमाओं को उजागर करता है। दूसरे पशु के पास “पूजा कराना” और “सार्वभौम अधिकार” का प्रभाव है, जिससे लोग पहले पशु के अधिकार को मानते हैं और उसके भेदी चोटों के बावजूद उसकी सत्ता को स्वीकार करते हैं। यह दिखाता है कि परमेश्वर की योजना के विपरीत भी मानव-निष्ठा कैसे दिखती है—जिन्हें वास्तविक सत्ता के बिना भी idol worship और ऐसा व्यवहार आ सकता है।
3 प्रमुख विषय
क्रॉस-रेफरेंसेज (संक्षेप में)
• दानिशों की दृष्टि से यहूदियों के अंत की पूर्व-सूचना के साथ संगति में आता है कि कैसे एक शक्तिशाली उद्धारक/पशु एक विश्वास-समुदाय को अपने नियंत्रण में ले लेता है।
• दूसरी पवित्र पुस्तक में भी विश्वास और महिमा के भ्रामक असंतुलन पर विचार मिलता है कि कैसे प्रत्यक्ष चमत्कार और मर्यादा के बाहर की शक्ति लोगों को परिष्कृत करती है।
व्यावहारिक विचार
हम में से हर एक के लिए यह संकेत है कि हमें अपनी आस्था की जाँच करनी चाहिए: क्या हम किसी ऐसी स्थिति के तले आ जाते हैं जो प्रचारित शक्ति के नाम पर वास्तव में प्रभु के बजाय अपने फायदे बुनती है? आत्म-न्याय, सत्संगति और संसार-प्रतिबद्धता से परे ईमानदारी से परमेश्वर के मार्ग को ढूंढना चाहिए।
संक्षेप
यह verse दिखाता है कि सत्ता और पूजा का संयोजन किस तरह चरम जोखिम पैदा कर सकता है: एक शक्तिशाली सत्ता जो अपने समर्थकों के भरोसे पर जीवित रहती है, और लोग उसे ही सत्य मान लेते हैं। प्रकाशन का यह भाग हमें सतर्क करता है कि वास्तविक श्रद्धा किस ओर है और किस उपाय से हम परमेश्वर के क्लेम में रहते हैं।
उद्धृत विद्वानों से तब की प्रमुख की पंक्तियाँ (संक्षेप में):
मैथ्यू हेन्सी (Matthew Henry) और ऐल्बर्ट बार्न्स (Albert Barnes) तथा ऐडम क्लार्क (Adam Clarke) के सार्वजनिक-डायमैरिक विचारों के संन्यास से प्राप्त सामान्य संकेतों के अनुसार, इस भाग में सत्ता, चमत्कार और मानवीय श्रद्धा के संग्राम को देखने का एक स्पष्ट दृश्य मिलता है।
अनुवाद पर टिप्पणी: यह अनुवाद, HINIRV, पाठ की पंक्तিবद्ध संरचना के अनुरूप है—परमेश्वर की योजना से विपरीत चलती मानवीय सत्ता के आकर्षण को उजागर करती है।