Old Testament
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प्रकाशितवाक्य 13:11 – पृथ्वी की दूसरी पशु और उसकी चर्चा
इस पद में जो दूसरी पशु प्रतीकात्मक रूप से उभरता है, वह दिखाता है कि संसार के अंत के समय में Satan के प्रभाव से जुड़ा एक भ्रमकारी राजनैतिक-धार्मिक मशीन उभरेगा। यह पशु पृथ्वी से निकलता है और उसके मुँह में अजगर की तरह बोलना उसके deceptive ( engaṇt) स्वभाव को उजागर करता है; इसका उद्देश्य लोगों को सत्ता, चमत्कार और धर्म के दिखावे से मोहित करना है ताकि सच को ढककर गलत मार्ग को बढ़ावा मिले। यह ज्ञान-युग में भी चल रहा प्रभाव है, जहाँ शक्ति और दार्शनिक तर्कत्व से सच-झूठ के भेद को धुँधला किया जाता है।
मुख्य अर्थ
पुस्तकव्यवस्था में, इस पशु का अर्थ एक प्रकार के वैचारिक-धार्मिक-राजनीतिक प्रभाव का प्रतीक है जो प्राकृतिक रूप से नहीं, बल्कि प्रभावशाली भाषण, चमत्कारिक द्योतकत्व और बहकावे से लोगों को नियंत्रित करता है। यह अजगर की तरह बोलना भगवान के आगे घृणा नहीं, बल्कि स्वयं को सत्य के रूप में प्रस्तुत करना है ताकि लोग उसकी शक्ति में फँस जाएँ।
कुंजी विषय
संबद्ध अंशों के संदर्भ
— प्रेरितों के ग्रंथों में किसी समय पर ऐसी प्रवृत्ति का उल्लेख मिलता है जो धार्मिक पाखंड और सत्ता-चले जाने के लिए चमत्कारिक द्योतकत्व का इस्तेमाल करता है; यह संकेत देता है कि末य समय में सच-झूठ की परख कैसे कठिन हो जाएगी।
— अन्य पौरोहितिक टिप्पणियाँ दर्शाती हैं कि एक ऐसी शक्ति जो धर्म के नाम पर भौतिक शक्ति दिखाती है, अक्सर लोगों को सत्य से भटकाती है; विवेक बनाये रखना आवश्यक है।
व्यावहारिक चिंतन
आज के संदर्भ में यह verse हमें सच और दिखावे के बीच discernment सीख देता है। सामाजिक-राजनीतिक हस्तक्षेपों में superficialis ज्ञान और चमत्कारिक दावों से सावधान रहें, और परमेश्वर के वचन के भीतर स्थिर रहने की प्रेरणा लें। विश्वासियों के लिए यह कठिन समय में भी नैतिकता और सत्य के लिए खड़े होने का संदेश है।
संक्षेप
प्रकाशितवाक्य 13:11 बताता है कि अंत के समय धरातल से निकलने वाला दूसरा पशु लोगों को भ्रमित करने के लिए अजगर-भाषा और चमत्कार दिखावे का इस्तेमाल करेगा। यह हमारी आत्मिक जागरूकता, विवेक और सत्य की खोज को दृढ़ बनाता है ताकि हम ठण्ठ-धोखे में न फँसें।
परिचयात्मक संदर्भ
यहाँ पाठक Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के टुकड़ों के विचारों से प्रेरित एक संयुक्त विवेचन देख सकते हैं, जिसमें deception, वैचारिक-धार्मिक प्रभाव, और सच की आवश्यकता पर केंद्रित बिंदु होते हैं:
Matthew Henry ने कहा है कि यह दूसरा पशु परमेश्वर के सत्य का नहीं, बल्कि सत्ता और दिखावे का एक बहकाने वाला रूप है। Albert Barnes ने इसे मानव-निर्मित धार्मिक प्रणाली के दुष्प्रयोग के रूप में देखा है जो लोगों को सच से भटका देता है। Adam Clarke ने भी संकेत किया है कि यह संकेत करता है कि अंत के समय धर्म के नाम पर जो छल हो, उसे नर्क से नहीं, पर गलत मार्ग से सावधान रहना होगा।