Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
यशायाह 1 यशायाह 2 यशायाह 3 यशायाह 4 यशायाह 5 यशायाह 6 यशायाह 7 यशायाह 8 यशायाह 9 यशायाह 10 यशायाह 11 यशायाह 12 यशायाह 13 यशायाह 14 यशायाह 15 यशायाह 16 यशायाह 17 यशायाह 18 यशायाह 19 यशायाह 20 यशायाह 21 यशायाह 22 यशायाह 23 यशायाह 24 यशायाह 25 यशायाह 26 यशायाह 27 यशायाह 28 यशायाह 29 यशायाह 30 यशायाह 31 यशायाह 32 यशायाह 33 यशायाह 34 यशायाह 35 यशायाह 36 यशायाह 37 यशायाह 38 यशायाह 39 यशायाह 40 यशायाह 41 यशायाह 42 यशायाह 43 यशायाह 44 यशायाह 45 यशायाह 46 यशायाह 47 यशायाह 48 यशायाह 49 यशायाह 50 यशायाह 51 यशायाह 52 यशायाह 53 यशायाह 54 यशायाह 55 यशायाह 56 यशायाह 57 यशायाह 58 यशायाह 59 यशायाह 60 यशायाह 61 यशायाह 62 यशायाह 63 यशायाह 64 यशायाह 65 यशायाह 66Verse
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यशायाह 10:32 — तत्कालीन संदर्भ में परिचय
यह पाठ पूर्ववर्ती क्रियाओं के क्रम में एक צפוןजनित आक्रमणकारी के मार्ग-निर्देशन का भाग है, जो नोब के निकट अपनी स्थिति बनाते हुए सिय्योन-यरूशलेम की पहाड़ियों की ओर बढ़ेगा. उद्धरण में उल्लेखित शब्दों से स्पष्ट है कि प्रभु का न्याय और राज्य-योजना दिखती है; परमेश्वर के Sovereign विकल्पों में से एक कदम के रूप में यह धमक trois-चिह्न बनता है—हाथ ऊपर उठाकर और धमकाते हुए ध्वनि करना.
ईश्वरीय उद्देश्य और विश्वास का पाठ
यह अंश हमें बताता है कि परमेश्वर अपने निर्णयों से सत्ता-पूरित होता है, और जब उसका वचन किसी जगह पर पहुँचता है, तब वहाँ ताकत और प्रभाव बना रहता है. लिखा गया है कि वह “नोब में टिकेगा”—यानी एक निश्चित लक्ष्य के लिए उपयुक्त स्थिरता ग्रामित करेगा, और साथ ही सिय्योन और यरूशलेम पर उसने हाथ उठाकर धमकाने की मुद्रा धारण की. इसका अर्थ है कि प्रभु के न्याय के हाथ कभी निष्क्रिय नहीं रहते; वे अपने चुने हुए नगरों और ढांचे की रक्षा के लिए शक्ति प्रदर्शित करते हैं.
शब्दार्थ और चित्रण स्पष्ट करना
संबद्ध संदर्भ मार्ग
ये verses अन्यायपूर्ण सत्ता के विरुद्ध परमेश्वर की सत्ता-सम्मुखता पर प्रकाश डालते हैं:
इन संदर्भों से समझ आता है कि प्रभु अपनी योजना के अनुसार सुरक्षा, न्याय और उद्धार के लिए मार्ग बनाते हैं, भले ही निर्बल दिखाई दें.
आज के दिन के लिए अनुप्रयोग
1) नकारात्मक परिस्थितियों में भी प्रभु के नियन्त्रण और सुरक्षा पर भरोसा रखें; वे संघर्ष के बीच में भी अपनी जगह बनाते हैं।
2) संघर्ष-यातनाओं के समय अपने शहर, परिवार और समुदाय के लिए प्रार्थना और नैतिकता से खड़े रहें, क्योंकि प्रभु सत्ता में है और वह हमारे पथ को आशीष देता है।
3) प्रभु ke आदेशों को मानना और उनके उद्देश्य को समझना—चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत हों, विश्वास यही कहता है कि परमेश्वर न्याय और उद्धार लाते हैं.
सार-संयोजन
यशायाह 10:32 में परमेश्वर की सत्ता, सुरक्षा और न्याय का समन्वय प्रकट होता है। वह नोब में टिकेगा, ताकि सिय्यौन-यरूशलेम की पहाड़ियों पर उसका हाथ उठाकर प्रभाव दिखाई दे—जो उसके प्रतिज्ञा-नगरों के लिए उद्धार और निर्देशन का संकेत है. Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलन से निकले बुनियादी विचार इस तरह मिलकर एक समेकित दृष्टिकोण बनाते हैं: परमेश्वर अपने निर्णयों से ठोस मार्ग बनाते हैं; विश्वासीजनजन अपने दायित्वों को निभाकर उसकी महिमा को सामने लाते हैं, और इतिहास-प्रसंग में उसकी न्यायसत्यता बनी रहती है.
उद्धरण-ध्यान: “परमेश्वर अपने निर्णयों के अनुसार कार्य करते हैं”—Albert Barnes (संकेत-उद्धरण), “God is sovereign in His government”—Adam Clarke के विवेचन में सामान्यतः यही भाव उभरता है; लक्ष्य पाठ में उद्धरण-रेखा के रूप में संक्षेपित है ताकि पाठक सही दिशा में समझ सकें.