Old Testament
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सभोपदेशक 5:16 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यह भी एक बड़ी बला है कि जैसा वह आया, ठीक वैसा ही वह जाएगा; उसे उस व्यर्थ परिश्रम से और क्या लाभ है?
सभोपदेशक 5:16 पद-दर-पद बाइबल टीका
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सभोपदेशक 5:16 समानांतर पद और संबंधित वचन
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नीतिवचन 11:29 (HINIRV) »
जो अपने घराने को दुःख देता, उसका भाग वायु ही होगा, और मूर्ख बुद्धिमान का दास हो जाता है।

सभोपदेशक 1:3 (HINIRV) »
उस सब परिश्रम से जिसे मनुष्य धरती पर करता है, उसको क्या लाभ प्राप्त होता है?

1 शमूएल 12:21 (HINIRV) »
और मत मुड़ना; नहीं तो ऐसी व्यर्थ वस्तुओं के पीछे चलने लगोगे जिनसे न कुछ लाभ पहुँचेगा, और न कुछ छुटकारा हो सकता है, क्योंकि वे सब व्यर्थ ही हैं।
इस शास्त्री विचार का सरल अर्थ
सभोपदेशक 5:16 में कहा गया विचार यह है कि जीवन की उसकी नहीं, बल्कि नौकरशाही और निरर्थक कर्मों के पीछे समय गंवाने का फल वही रहता है—जो आया है वही जाएगा। इस वाक्य में सांसारिक व्यर्थ परिश्रम और असफल कर्मों का आलोचनात्मक निष्कर्ष है, कि धन-संपत्ति, सफलता या महत्त्वाकांक्षा के पीछे भागना अंततः खाली हाथ लौटना है यदि जीवन उद्देश्य ऊपर से स्पष्ट नहीं है।
संवाद का पार्श्व-प्रसंग
यह वचन सभोपदेशक के समूचे संदेश का एक हिस्सा है, जहाँ वह जीवन के अस्थायित्व और साधनों की शास्त्रीय विफलताओं पर प्रकाश डालता है। पुस्तक के प्रारम्भिक भागों से ही वह यह स्थापित करता है कि सब कुछ एक दिन क्षीण और लुप्त हो सकता है; अतः बुद्धि का लक्ष्य परमेश्वर के साथ संबंध और नियत उद्देश्य को पहचानना है, न कि सांसारिक लाभों की दौड़।
व्याख्यात्मक विचार
कथन-गत विचार: हन्टे-टेकिंग (आउटकम) और दैनंदिन जीवन
कोई भी सफलता या संपदा उसे स्थायी नहीं बनाती; इसलिए सत्य यह है कि जीवन के उच्चतम मूल्य परमेश्वर के भय और विवेकित जीवन में है। यह कल्याण केवल वर्तमान परिस्थितियों से नहीं मापा जाता, बल्कि नीतिगत और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से परखा जाना चाहिए।
गम्भीर Cross-References (संक्षेप व्याख्या)
1) प्रेरित हो जाना—सभोपदेशक 1:2-3: संसारिक उपलब्धियाँ कितनी भी बढ़ीं, जीवन की वास्तविक意义 उन्हीं से नहीं मिलती; सच्चा लाभ परमेश्वर के ज्ञान और भय में है।
2) भटकाव से बचना—सभोपदेशक 4:8: एक व्यक्ति जीवन-यात्रा में एकाकी नहीं, पर आर्थिक-यात्रा भी उसे संतुष्टि नहीं देती; समुदाय और नैतिकता से मूल्य बनते हैं।
3) कर्म का उद्देश्य—वचन 12:13-14: भय परमेश्वर के साथ जीवन का मर्म है, कर्म का सही मार्ग वही देगा जो स्थायी और सार्थक हो।
ऐतिहासिक टिप्पणीकारों से संकलित संकेत
मैथ्यू हेनरी, अॅल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क ने इस प्रकार के मूलभूत नीतिगत संदेशों पर बल दिया है: जीवन के भीतर क्रम और उद्देश्य की कमी व्यर्थ परिश्रम बढ़ाती है; सही दृष्टि परमेश्वर के भय और धार्मिक जीवन के अभ्यास में है। (सार-संयुक्त व्याख्या)
यदि आप इन समालोचकों के ठोस उद्धरण ढूंढ़ रहे हों, तो वे इस प्रकार हैं (संरक्षित उद्धरण, पूर्ण पाठ नहीं):
त्वरित क्रियान्वयन सुझाव
निष्कर्षतः, यह वचन हमें स्मरण कराता है कि जीवन के हर परिश्रम का कारण और दिशा परमेश्वर के विश्वसनीय उद्देश्य से जुड़ना चाहिए; तभी व्यर्थता दूर होगी और जीवन में स्थायित्व और शांति पाएँगे।