Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 11:29 का अर्थ
जो अपने घराने को दुख देता है उसका भाग वायु ही होगा; और मूर्ख बुद्धिमान का दास बन जाएगा। इस वचन में जीवन के दो रास्ते दिखते हैं: परिवार के भीतर कठिनाई पैदा करने वाला व्यक्त अपनी सामाजिक और आध्यात्मिक सुरक्षा खो सकता है, वहीं बुद्धिमान वे लोग हैं जो परिवार की शांति बनाए रखते हैं और दूसरों के लिए सहायता बनते हैं। भाग वायु होने से तात्पर्य है अस्थिर, क्षणिक, और खोया हुआ भाग।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नीतिवचन की पुस्तकों में परिवार, नैतिक आचार और सामाजिक व्यवहार से जुड़ी शिक्षाएँ प्रमुख हैं। इस पद में परिवार-प्रेम और दायित्वयुक्त आचरण की महत्त्वपूर्ण भूमिका है; जो व्यक्ति अपने घराने के लिए दुःख का कारण बनता है, उसे परिणामस्वरूप नाकामयाबी और हानि उठानी पड़ती है। यह एक ऐसी विवेकपूर्ण चेतावनी है जो परिवार और समाज दोनों के लिए संदेशन है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
3-4 दृष्टिकोण जो इस पाठ से मिलते हैं
अनुसंगत पाठ के उद्धरण (संदर्भ के अनुसार संक्षेप)
नीतिवचन में परिवारिक दायित्व और प्रेरित आचरण पर जोर दिया गया है। यह पाठ हमें यह सिखाता है कि दूसरों के लिए दुःख बनना, अंततः अपने ही लिए हानि है; परंतु धैर्य और समझदारी से चलना परिवार और समुदाय दोनों के लिए वरदानी है।
कन्फ्यूजन से बचने के लिए क्रॉस-रेफरेंस
– नीतिवचन 14:29: धैर्य और धीमे-धीमे निर्णय लेने से विवाद दूर होते हैं। – गुलजार 3:5 (उधृत नहीं किया गया बल्कि संदर्भ के अनुसार): कटुता के स्थान पर शांति और समझ जरूरी है। – कुल 1 पेडस्टल (नीतिवचन 17:1) जहां शांत रहने की महत्ता बताई गई है।
उल्लेखित क्रॉस-रेफरेंस इस बात को स्पष्ट करते हैं कि परिवार के भीतर शांति और संयम ही चिरस्थायी सामाजिक स्थिरता बनाते हैं।
संक्षिप्त व्यवहारिक निष्कर्ष
अपने घराने के भीतर प्रेम, संयम और जिम्मेदारी के साथ व्यवहार करें। मार्गदर्शक सिद्धांत: बात-बात में संयम, आलोचना में परिश्रम, और विवाद में सुनी-सुनाई संपूर्णता। अगर आप परिवार में स्थिरता बनाते हैं, तो आपकी प्रतिष्ठा और सुरक्षा बढ़ती है और वक्त के साथ आपका भाग भी बढ़ाता है।
नोट: नीचे उद्धृत तीन प्रसिद्ध पवित्र टिप्पणियाँ (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke) से संक्षेप विचार ग्रहण करें; भारी शब्दों में उद्धृत पूर्ण पंक्तियाँ नहीं दी गईं लेकिन उनके मौलिक विचार आपके मनन के लिए संक्षेप में रखे गए हैं.