Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 11:1 नीतिवचन 11:2 नीतिवचन 11:3 नीतिवचन 11:4 नीतिवचन 11:5 नीतिवचन 11:6 नीतिवचन 11:7 नीतिवचन 11:8 नीतिवचन 11:9 नीतिवचन 11:10 नीतिवचन 11:11 नीतिवचन 11:12 नीतिवचन 11:13 नीतिवचन 11:14 नीतिवचन 11:15 नीतिवचन 11:16 नीतिवचन 11:17 नीतिवचन 11:18 नीतिवचन 11:19 नीतिवचन 11:20 नीतिवचन 11:21 नीतिवचन 11:22 नीतिवचन 11:23 नीतिवचन 11:24 नीतिवचन 11:25 नीतिवचन 11:26 नीतिवचन 11:27 नीतिवचन 11:28 नीतिवचन 11:29 नीतिवचन 11:30 नीतिवचन 11:31



नीतिवचन 11:7 — दुष्ट मरते हैं तो उसकी आशा टूट जाती है
उत्पत्ति-युग के ज्ञान का मूलभाव है कि जीवन की निरन्तरता और आशा एक ही धुरी पर टिके रहते हैं। इस पद में दुष्ट (अधर्मी) व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी आशा कैसे चिरस्थायी नहीं रहती, इसका संदेश दिया गया है। यह कथन सिर्फ एक मृत्यु-क्षण की घटना नहीं, बल्कि उसकी जीवन-प्रवृत्ति के स्वभाव-geography को उद्घाटित करता है: ना तो धन, ना शौर्य, ना सामाजिक स्थिति गरीबी में नष्ट करती है—बल्कि मूल्य-आधारित दिशा उसकी अंतर्निहित आशा को विनष्ट कर देती है।
क्यों यह संदेश स्पष्ट करता है—ईश्वर और विश्वास का परिदृश्य
यहाँ 하나님 के न्याय-आलोक से एक कसौटी उभरती है: दुष्ट व्यक्ति की आशा, जो पृथ्वी पर सफलता के भौतिक मानदंडों पर टिकती है, मृत्यु के पीछे फीकी पड़ जाती है। इस पाठ से यह विश्वास मजबूत होता है कि सचमुच की आशा स्वर्गीय अनुदान है, न कि पाश्विक लाभ। परन्तु यह शास्त्र केवल दुष्ट के लिए नहीं है; यह सभी के लिए एक चेतावनी है कि जीवन-प्रवृत्तियों के चयन से हमारी अंतिम स्थिति तय होती है।
प्रमुख शब्दों/छवि-समझ
अन्य बाइबिल संदर्भ जो इस विचार को सुदृढ़ करते हैं
1) भविष्य-आशा बनाम वर्तमान-आशा: संदर्भ के अनुसार, दुष्ट सभ्यता की ठोस-आशा न होकर निराशा में बदल जाती है; साथ ही पवित्रता में विश्वास रखने वालों की आशा स्थिर रहती है (यह किर्थक संदेश कई उपदेशों में मिलती है।).
2) न्याय और दया के बीच का संतुलन: दुष्ट की मृत्यु पर उसका आदि-आशावाद ढहना बताता है कि परमेश्वर न्याय का दन्ड और दया दोनों का समन्वय करते हैं।
3) जीवन का मार्ग और अंतिम परिणाम: यह पद जीवन के निर्णयों के परिणामों पर प्रकाश डालता है—जो व्यक्ति सत्य के साथ चलता है, उसकी आशा निरंतर रहती है।
हाल के समय के लिए अनुप्रयोग
- चरित्र-निर्माण: धन, प्रभाव या सफलता से नहीं, बल्कि ईमानदारी, न्याय और प्रेम से जीवन-आशा बनाएं।
- संकट में धैर्य: कठिन समय में भी परमेश्वर की वाचा पर विश्वास बनाए रखें; आशा एक मजबूत नैतिक धुरी बनती है।
- समाजिक जीवन: दूसरों के लिए निष्कलंक आचरण और न्याय-संपन्न व्यवहार अपनाएं ताकि दूसरों की आशा भी बढ़े।
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके छोटा उल्लेख
- नीतिवचन 13:12 का संजोया विचार कि धैर्य-प्राप्ति देरी से भी आशा बनाये रखती है; टिके रहने से आमीनता मिलती है।
- भजन 27:13–14— भरोसा बनाये रखने का तेज; धीरज से परमेश्वर पर भरोसा करें।
- रोम 8:24–25— आशा के अधीन, चरितार्थ भविष्य की प्रतीक्षा; पुख्ता विश्वास।
यह पाठ एक सरल, पर गहन संदेश देता है: अगर 우리의 आस्था और जीवन-शैली ईश्वर के न्याय के अनुरूप है, तो हमारी आशा स्थिर रहती है, भले ही मृत्यु के बाद दुष्ट की स्थिति कैसी भी हो।
सार-संयोजन
नीतिवचन 11:7 जीवन-नैतिकता का आधार बनता है—धन या स्थिति से नहीं, बल्कि सत्य और न्याय की आस्था से। परिभाषा स्पष्ट करती है कि दुष्ट की आशा, जो इस पृथ्वी के भौतिक लाभ पर टिकती है, मृत्यु के साथ ध्वस्त हो जाती है; प्रेरणा यह है कि हम अपनी आशा को परमेश्वर के साथ जोड़े रखें और जीवन-यात्रा में सच्चे मूल्य बनाएं।
संदर्भ ग्रंथ से मिली छोटी-छोटी उद्धरण: "मानव-आशा व्यर्थ होती है" (उद्धरण के रूप में मैथ्यू हेन्री, अल्बर्ट बर्न्स व एडम क्लार्क से संबंधित तात्कालिक विचारों को संदर्भित किया गया है, परन्तु पूरी पंक्तियाँ यहाँ उद्धरण के रूप में नहीं दी गयीं।)