नीतिवचन 11:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जो धर्म में दृढ़ रहता, वह जीवन पाता है, परन्तु जो बुराई का पीछा करता, वह मर जाएगा।

पिछला पद
« नीतिवचन 11:18
अगला पद
नीतिवचन 11:20 »

नीतिवचन 11:19 पद-दर-पद बाइबल टीका

नीतिवचन 11:19 का सरल अर्थ

धर्म में दृढ़ रहा व्यक्ति आंतरिक रूप से जीवन का अनुभव पाता है, जबकि बुराई के पीछे भागने वाला अंततः मरने जैसी स्थितियों को स्वीकार करता है। यह नीतिवचन ईश्वर के पास लगाव और नैतिक पथ पर रहने की महत्ता को सशक्त ढंग से प्रस्तुत करता है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

नीतिवचन में प्रायः जीवन के चयन two रास्तों—धर्म के मार्ग और बुराई के मार्ग—के परिणामों की तुलना देता है। यहाँ “धर्म” से तात्पर्य ईश्वर के नियमों के अनुरूप जीवनयापन और धार्मिक-आचार में दृढ़ता है; “बुराई का पीछा” से अभिप्राय कर्मों के परिणामों को न समझकर बिना सोचे-समझे पथ परिवर्तन करना है। इस पद में यह स्पष्ट होता है कि आंतरिक स्थिति, नीयत और व्यवहार दोनो रूप से जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं।

व्याख्यात्मक अवलोकन

  • धर्म में दृढ़ रहने का परिणाम: जीवन। यह शाब्दिक और आत्मिक जीवन, दोनों का संकेत देता है— वर्तमान सफलता नहीं बल्कि ईश्वर के साथ स्थायी जीवन के आश्वासन का प्रमाण।
  • बुराई का पीछा: मर जाना। इसका आशय केवल शारीरिक मृत्यु नहीं, बल्कि आत्मिक अवनति और परमेश्वर से टूटे सम्बन्धों की स्थिति है, जो अंततः जीवन के अस्थिर चक्र की ओर ले जाती है।
  • नियमित दृढ़ता पर बल: हलके-फुल्के लक्षण नहीं, बल्कि निरंतर सत्यनिष्ठा और विवेकानुसार चुनावों पर स्थायित्व का महत्व दिखाई देता है।

थीमेटिक नज़रिया (संक्षेप)

  1. नैतिक धारा और जीवन का परिणाम
  2. हृदय की स्थिरता बनाम हिंसक पीछा
  3. ईश्वर-आधारित नैतिकता की दिशा

क्रॉस-रेफरेंसेज़ और संक्षिप्त व्याख्या

1) नीतिवचन 10:2 — धन-हानि से भी अधिक जीवन-संबंधी हित सत्य और धर्म में है; यह बताता है कि सही आचरण शुद्ध लाभ देता है।

2) भजन-संहिता 23:3 — परमेश्वर का मार्ग जीवित मार्ग है; उद्धार और संरक्षण उसी पर निर्भर है।

3) याकूब 1:14-15 — इच्छाओं की जड़ें मन में पनपती हैं और उनका परिणाम जीवन-नाश कर सकता है; सोचना-विचारकर चाल चलते रहना आवश्यक है।

संक्षिप्त व्यवहारिक निष्कर्ष

निष्कर्ष

इस verse का मूल संदेश है कि धर्म में दृढ़ रहने से जीवन का सच्चा आभास मिलता है, जबकि बुराई के पीछे भागना अंततः क्षय और मृत्यु की ओर ले जाता है। यह नीति-पंक्ति न केवल धार्मिक शिक्षा देती है, बल्कि हर दिन के छोटे-छोटे चुनावों में सही मार्ग अपनाने के लिए प्रेरित करती है।

टिप्पणी-संदर्भ: इस विचार को Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों से प्रेरित संकेत मिलता है—धर्म-संरक्षण और नैतिकता के परिणामों पर उनका समन्वित ज्यामितिक दृष्टिकोण क्लियर दृश्य कर देता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

नीतिवचन 11:19 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

नीतिवचन 10:16 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
नीतिवचन 10:16 (HINIRV) »
धर्मी का परिश्रम जीवन की ओर ले जाता है; परन्तु दुष्ट का लाभ पाप की ओर ले जाता है।

नीतिवचन 19:23 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
नीतिवचन 19:23 (HINIRV) »
यहोवा का भय मानने से जीवन बढ़ता है; और उसका भय माननेवाला ठिकाना पाकर सुखी रहता है; उस पर विपत्ति नहीं पड़ने की।

नीतिवचन 12:28 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
नीतिवचन 12:28 (HINIRV) »
धर्म के मार्ग में जीवन मिलता है, और उसके पथ में मृत्यु का पता भी नहीं।

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें