Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 11:19 का सरल अर्थ
धर्म में दृढ़ रहा व्यक्ति आंतरिक रूप से जीवन का अनुभव पाता है, जबकि बुराई के पीछे भागने वाला अंततः मरने जैसी स्थितियों को स्वीकार करता है। यह नीतिवचन ईश्वर के पास लगाव और नैतिक पथ पर रहने की महत्ता को सशक्त ढंग से प्रस्तुत करता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नीतिवचन में प्रायः जीवन के चयन two रास्तों—धर्म के मार्ग और बुराई के मार्ग—के परिणामों की तुलना देता है। यहाँ “धर्म” से तात्पर्य ईश्वर के नियमों के अनुरूप जीवनयापन और धार्मिक-आचार में दृढ़ता है; “बुराई का पीछा” से अभिप्राय कर्मों के परिणामों को न समझकर बिना सोचे-समझे पथ परिवर्तन करना है। इस पद में यह स्पष्ट होता है कि आंतरिक स्थिति, नीयत और व्यवहार दोनो रूप से जीवन की दिशा निर्धारित करते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमेटिक नज़रिया (संक्षेप)
क्रॉस-रेफरेंसेज़ और संक्षिप्त व्याख्या
1) नीतिवचन 10:2 — धन-हानि से भी अधिक जीवन-संबंधी हित सत्य और धर्म में है; यह बताता है कि सही आचरण शुद्ध लाभ देता है।
2) भजन-संहिता 23:3 — परमेश्वर का मार्ग जीवित मार्ग है; उद्धार और संरक्षण उसी पर निर्भर है।
3) याकूब 1:14-15 — इच्छाओं की जड़ें मन में पनपती हैं और उनका परिणाम जीवन-नाश कर सकता है; सोचना-विचारकर चाल चलते रहना आवश्यक है।
संक्षिप्त व्यवहारिक निष्कर्ष
निष्कर्ष
इस verse का मूल संदेश है कि धर्म में दृढ़ रहने से जीवन का सच्चा आभास मिलता है, जबकि बुराई के पीछे भागना अंततः क्षय और मृत्यु की ओर ले जाता है। यह नीति-पंक्ति न केवल धार्मिक शिक्षा देती है, बल्कि हर दिन के छोटे-छोटे चुनावों में सही मार्ग अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
टिप्पणी-संदर्भ: इस विचार को Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणियों से प्रेरित संकेत मिलता है—धर्म-संरक्षण और नैतिकता के परिणामों पर उनका समन्वित ज्यामितिक दृष्टिकोण क्लियर दृश्य कर देता है।