Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 11:9 — भक्तिहीन जन अपने पड़ोसी को अपने मुँह की बात से बिगाड़ता है
यह पद नीतिवचन के उस भाग की ओर संकेत करता है जो सामाजिक जीवन में सत्य, बोल-चाल और नैतिक हानि-प्रति चिंता करता है। श्लोक बताता है कि एक निर्भय, धर्मी व्यक्ति ज्ञान से अपने पड़ोसियों को बचाता है, जबकि जो व्यक्ति ईश्वर से विमुख है, वह अपनी बातें, चेष्टाओं और झूठे संकेतों से दूसरों को नुकसान पहुँचाता है।
ईश्वर के बारे में इसका प्रकाश
इस श्लोक में ईश्वर की नैतिक व्यवस्था का आह्वान प्रकट है। ज्ञान और धर्म दोनों ही ईश्वर की वाणी से परिचित हैं; धर्मी वही है जो सत्य पर टिके रहते हैं और अपने पड़ोसियों के प्रति सच-भाषण और सद्भाव दिखाते हैं। भक्तिहीनता का प्रभाव समाज में विखराव और असत्य को बढ़ावा देता है, जबकि ईमानदार और ज्ञानयुक्त जीवन समुदाय को सुरक्षित बनाते हैं।
मुख्य शब्दों का स्पष्टीकरण
अनुसंगत प्रचलित संदर्भ
इस विचार के साथ अन्य सरोकार verses विचारणीय हैं:
परिचयजन्य उद्धरण (पार्श्व विचार)
यहाँ मानक प्रवचन-शैली से कुछ मूल विचार दिए जाते हैं, जिन्हें प्रसिद्ध पवित्र-वचन टीका-लेखों के संगम से समायोजित किया गया है:
Matthew Henry कहते हैं कि चरित्र की सच्चाई और वचन की मर्यादा ही समाज की स्थिरता को बनाते हैं; झूठी गपशप से परिवार और शहरों में distrust बढ़ती है।
Albert Barnes का संकेत है कि एक धर्मी व्यक्ति ज्ञान से अपने पड़ोसी को बचाने का दायित्व निभाता है, क्योंकि सत्य का पालन सामाजिक शांति और ईश्वर के आदेश से जुड़ा है।
Adam Clarke का मानना है कि दुष्टों का व्यवहार—भाषण के माध्यम से—समझाने योग्य परिणाम देता है; ज्ञान और डरावनी शुद्धता के बिना समाज अस्थिर हो सकता है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
यह श्लोक आज भी अत्यंत प्रासंगिक है—
उद्धरण-उचित संक्षेप
यदि आप Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के विशिष्ट वाक्यों तक पहुँचना चाहें, तो उनके टिप्पणियाँ इस श्लोक की व्याख्या को और स्पष्ट करती हैं—पर ध्यान दें कि यहाँ हम संक्षेप और सामान्य सार प्रस्तुत कर रहे हैं, न कि लंबी उद्धरण सूची।
सार: भक्तिहीनता से पड़ोसी का नुकसान होता है; ज्ञान और धर्म-बोध से ही समाज सुरक्षित और सुदृढ़ रहता है। इस श्लोक का पाठ यह सिखाता है कि भाषा और ज्ञान की सच्चाई से जीवन का मार्ग प्रकाशित होता है।