Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 11:18 का स्पष्टार्थ
इस वचन में कहा गया है कि दुष्ट व्यक्ति मिथ्या कमाई से लाभ उठाने का प्रयास करता है, परन्तु जो धर्म या धार्मिक-नैतिक बीज बोता है, उसे वास्तविक और निश्चित फल मिलता है। यह तुलना यह दर्शाती है कि कठोर अनुचित लाभ fleeting होता है, जबकि पुण्य कार्यों से दीर्घकालिक सुधर और आशीष मिलती है। पाठ में व्यवहारिक नैतिकता और जीवन-दृष्टि का संयोजन प्रस्तुत है: सफलता का असली माप उसका स्रोत क्या है और उसका उद्देश्य क्या है।
केंद्रित अर्थ
यहाँ दुष्टता और पवित्रता के बीच चयन के परिणाम स्पष्ट हैं। मिथ्या कमाई क्षणिक लाभ दे सकती है, पर उसका अंत असंतोष, गिरावट या दुष्कर परिणामों से होता है। इसके विपरीत, धार्मिक बीज बोना—यानी नैतिक, दयालु और पवित्र कर्म करना—आखिरकार लाभदायक और स्थिर फल देता है। यह जीवंत सिद्धांत है कि सही आचरण के साथ होने वाला लाभ अधिक मूल्यवान और टिकाऊ होता है, भले ही शुरूआती सफलता कैसी भी हो।
मुख्य विषय
संबंधित आयतें (cross-references)
यद्यपि इन संदर्भों में पूर्ण पाठ न हो, परन्तु ये विचार को समृद्ध करते हैं:
व्यावहारिक चिंतन
व्यक्ति के व्यवहार में नैतिक नैरत्व और ईमानदारी की डगर जीवन-निर्माण का आधार है। जो लोग छोटे-छोटे सही निर्णय लेते हैं—चाहे वे आर्थिक लाभ के साथ आये या न आये—वे बड़े आत्म-सम्मान और भरोसे की पूंजी जमा करते हैं। कठिन समय में भी सत्य व ईमानदारी के कदम स्थिर रहते हैं, जिससे समुदाय और व्यक्तिगत आंतरिक शांति बनी रहती है।
संक्षेप सार
नीतिवचन 11:18 भिन्न-भिन्न मार्गों की नैतिकता बताता है: दुष्ट मिथ्या कमाई तात्कालिक लाभ देती है पर अंत में हानि और अनिश्चितता लाती है; पृथ्वी-लोक के पुण्य कर्म, धार्मिक बीज बोना, अटल और स्थायी फल सुनिश्चित करता है। यह भविष्य के आशीर्वाद और आंतरिक संतोष के लिए एक स्पष्ट नैतिक मार्ग है।
इस टीका में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमैन टिप्पणीकारों के प्रेरक निष्कर्षों का संक्षिप्त संयोजित प्रभाव भी समाहित किया गया है: सत्य के मार्ग पर चलना वास्तविक लाभ देता है; अधर्म से कमाया गया धन क्षणिक हो सकता है, पर पथ-सत्य सदैव स्थायित्व देता है।