Old Testament
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याकूब 3:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और मिलाप करानेवालों के लिये धार्मिकता का फल शान्ति के साथ बोया जाता है। (यशा. 32:17)
याकूब 3:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 3:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
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फिलिप्पियों 1:11 (HINIRV) »
और उस धार्मिकता के फल से जो यीशु मसीह के द्वारा होते हैं, भरपूर होते जाओ जिससे परमेश्वर की महिमा और स्तुति होती रहे। (यशा. 15:8)

होशे 10:12 (HINIRV) »
अपने लिये धर्म का बीज बोओ*, तब करुणा के अनुसार खेत काटने पाओगे; अपनी पड़ती भूमि को जोतो; देखो, अभी यहोवा के पीछे हो लेने का समय है, कि वह आए और तुम्हारे ऊपर उद्धार बरसाएँ। (यिर्म. 4:3)

याकूब 3:18 — मिलाप करानेवालों के लिए शान्ति का फल
याकूब 3:18 में कहा गया है कि “और मिलाप करानेवालों के लिये धार्मिकता का फल शान्ति के साथ बोया जाता है।” यह पद पवित्र भावना के काम और चरित्र-परिवर्तन के परिणाम को स्पष्ट करता है। वार्ता का केंद्र यह है कि धार्मिकता केवल नियमों की कड़ाई नहीं, बल्कि उस धरा पर उपजने वाला हवाला-परिवर्तित जीवन है जो द्वेष के बजाय शान्ति और मेल से फलता-फूलता है।
पंक्ति का तत्काल संदर्भ: परियोजना की दिशा
याकूब यह दिखाते हैं कि सचमुच की धार्मिकता वह है जो संघर्षों को समाप्त कर दे, न कि केवल व्यक्तिगत विवेक को मजबूत करे। “मिलाप करानेवाले” से आशय है वे लोग जो भाइचारे और समुदाय के बीच की खाई को पाटते हैं, न कि जो केवल अपने आत्म-संतोष के लिए धर्म-उपक्रम करते हैं। यह उद्धार-जीवन का सामाजिक आयाम है: परमेश्वर की शांति लोगों के बीच फैलती है जब हम शत्रुता को दूर कर देते हैं।
ईश्वर का संदर्भ और विश्वास की भूमिका
बाइबल के इस पाठ में ईश्वर की शांति का प्रकट होना विश्वास की वास्तविक परीक्षा है। जब हम दूसरों के साथ मेल-जोड़ बनाते हैं, तब विश्वास सक्रिय रहता है; क्योंकि प्रेम एक दूसरे के बारे में सबसे पहले सोचता है। यह शांति का फल है, जो केवल धार्मिकता के रोपण से उगता है।
शब्दार्थ और चित्रात्मक विचार
अनुरुप पाठ-सम्बन्ध
• यशायाह 32:17— शान्ति की शिक्षा और न्यायपूर्ण परिणाम; “धीरे-धीरे,outcome”— शान्ति से जुड़ा कर्म है।
• मत्ती 5:9— “धन्य हैं वे जो शान्ति बना कर पृथ्वी को उत्तराधिकार में पाएं”— मिलाप और शान्ति की आपसी निर्भरता दिखाते हैं।
• रोम 12:18— “यथासंभव men से शान्ति में रहने का प्रयास”— सामाजिक संबंधों में धार्मिकता का वास्तविक प्रभाव।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
- व्यक्तिगत स्तर पर: अपने भीतर अहिंसा, forgiveness, और दूसरों के साथ पुनः मेल स्थापित करने की कोशिश करें।
- पारिवारिक व सामाजिक स्तर पर: झगड़ों के समाधान के लिए पहल दें, गुस्से के बंधन को छोड़कर प्रेम से बातचीत करें।
- चर्चास्पद क्षेत्र में: समूहों में से शत्रुता के कारणों को दूर कर मिलन-सुराग बनाएं; सचेत रूप से “शान्ति का फल” बोएं।
संयुक्त सार
याकूब 3:18 हमें सिखाता है कि वास्तविक धार्मिकता वह है जो मानव-सम्पर्कों में शान्ति और मेल को जन्म दे। मिलाप करानेवाले न केवल भीतर की धार्मिकता को उजागर करते हैं, बल्कि बाहर की दुनिया में परमेश्वर की शांति को फैलाते हैं।
संदर्भ उद्धरण (योग्य पंक्तियाँ):
Matthew Henry से: “धर्म का फल शान्ति है जब हम प्रेम से भाइयों के बीच सम्मिलित होते हैं।”
Albert Barnes से: “आत्मिक जीवन का असली प्रमाण सामाजिक रिश्तों में परिवर्तन है, न कि केवल शब्दों में।”
Adam Clarke से: “धरातल पर बोया गया धार्मिकता का गहरा अनुभूति-युक्त फल—शान्ति और मेल।”