Old Testament
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याकूब 3:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी-बड़ी डींगे मारती है; देखो कैसे, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है।
याकूब 3:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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याकूब 3:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यिर्मयाह 9:3 (HINIRV) »
अपनी-अपनी जीभ को वे धनुष के समान झूठ बोलने के लिये तैयार करते हैं, और देश में बलवन्त तो हो गए, परन्तु सच्चाई के लिये नहीं; वे बुराई पर बुराई बढ़ाते जाते हैं, और वे मुझको जानते ही नहीं, यहोवा की यही वाणी है।

नीतिवचन 18:21 (HINIRV) »
जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं, और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा।

भजन संहिता 17:10 (HINIRV) »
उन्होंने अपने हृदयों को कठोर किया है; उनके मुँह से घमण्ड की बातें निकलती हैं।
याकूब 3:5 का मुख्य बिंदु: जीभ का उफान और उसकी प्रभावी शक्ति
याकूब के मानसिक चित्रण में जीभ एक छोटा अंग है, पर उसकी लगाम अगर नियंत्रित न हो तो यह बड़े पैमाने पर विनाश कर सकती है। इसी विचार से अध्याय 3 में जीभ के दुरुपयोग और नियंत्रण के लिए चेतावनी दी गई है। यह वचन हमें आंतरिक चरित्र के परीक्षण के बारे में सिखाता है कि हमारा बोलना हमारे विश्वास की गहराई को प्रकट करता है और यदि जीभ को छोड़ दिया जाए तो वह जीवन और अस्थिरता दोनों के लिए उत्प्रेरक बन सकता है।
पाठ्य संदर्भीय साहित्यिक संदर्भ
जीभ के आकार से बड़ा प्रभाव दिखाने वाले वचन को याकूब जल्द से जल्द एक उपमात्मक दृष्टि से प्रस्तुत करते हैं—एक छोटी चिंगारी कैसे बड़े जंगल को जला सकती है। यह रूपक पाठक को यह समझाने के लिए है कि हमारे बोले हुए शब्द, हर समय, आत्मा के नियंत्रण के अधीन नहीं रहते, तो नतीजा विनाशकारी हो सकता है।
पाठ की साहित्यिक और धार्मिक महत्त्व
याकूब का यह उपमात्मक तर्क हमें बताता है कि भाषण का नियंत्रण सफलता नहीं, बल्कि चरित्र की पवित्रता का परीक्षण है। यदि हम जीभ के दमन और आत्म-नियंत्रण के बारे में सक्रिय रहते हैं, तो हम अपनी उन्नति में बाधाओं को दूर कर सकते हैं और समुदाय के जीवन में अधिक प्रामाणिक शांति ला सकते हैं।
कैसे यह विचार बाइबिल के समग्र सन्देश से जुड़ते हैं
जीभ का नियंत्रण पुराने नियम और नव नियम दोनों में एक समान प्राथमिकता पाता है—बोलचाल में दया, सत्य और संयम की मांग। यीशु के teaching में भी शब्दों की जिम्मेदारी और विचारों की पवित्रता पर बल दिया गया है।
दो-तीन क्रॉस-रेफरेंसे
क्यों सन्दर्भ महत्वपूर्ण हैं: यह सम्बन्ध बताते हैं कि शब्द हमारे आचरण का दर्पण हैं और समुदाय में स्थायित्व के लिए दयालु, सत्य और संयमित भाषा आवश्यक है।
स्व-चिंतन के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
याकूब 3:5 यह स्मरण दिलाता है कि एक छोटा मूर्तिमान अंग—जीभ—गंभीर परिणाम दे सकता है यदि इसे शर्तों के बिना चलने दिया जाए। परन्तु आत्म-नियंत्रण, प्रेम और सत्य के साथ जीना जीभ के नियंत्रित होने का मार्ग है। समाज और आत्मा की उन्नति उसी दिन संभव हो सकती है जब वक्तव्य और व्यवहार एक-दूसरे से संगत हों।
पूर्व-प्रकाशित टिप्पणी से प्रेरणा (संक्षेप)
यह विचार Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke आदि के पारंपरिक भाष्य से उठे मूल विचारों के साथ एकीकृत किया गया है।
Henry कहते हैं कि जीभ की वाणी आंतरिक नवीनता की अकंठी है; Barnes संकेत देते हैं कि शब्दों का नियंत्रण जीवन के लिए मार्गदर्शक है; Clarke टिप्पणी करते हैं कि भाषा में संयम आत्मा की माप है। इन विचारों के समन्वय से स्पष्ट होता है कि जीभ का दमन है चरित्र की बुनियादी परीक्षा।