Old Testament
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यिर्मयाह 9:3 पर टिप्पणी (HINIRV)
यह पद यिर्मयाह की उन गहराईयों का उद्घाटन करता है जहां समाज के भीतर धर्म और नैतिकता की कमी दिखती है। देश के लोग भाषण और चालचलन में झूठे हों, और सत्य के प्रति उनका रवैया व्यावहारिक रूप से असंवेदनशील हो जाए; यह भगवान के विरुद्ध संयत नहीं, बल्कि अराजकता का प्रमाण बन जाता है। यहाँ यिर्मयाह दिखाते हैं कि भ्रष्टाचार केवल व्यक्तिगत दोष नहीं, समाज की संरचना में समा चुका है।
कथन का अध्याय में स्थान
यिर्मयाह 9:3 में "अपनी-अपनी जीभ को वे धनुष के समान झूठ बोलने के लिये तैयार करते हैं" का तात्पर्य है कि लोग अपनी भाषा को भीषण और घातक हथियार की तरह बनाते हैं—झूठ, छल और बहकावे के लिए प्रयोग में लाते हैं। यहूदा और यरुशलेम के निवासियों में बढ़ती नैतिक गिरावट को दर्शाता है कि वे सत्य को दबाते हैं, और बुराई पर बुराई करते जाते हैं, जबकि वे परमेश्वर को जानते ही नहीं।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा
प्रमुख संदर्भ और उनके संकेत
इस पाठ की चोट सीधे दिल की क्रिया-व्यवहार और सामाजिक व्यवहार को सम्बोधित करती है, और अन्य जगहों पर भी पैगंबर यही चेतावनी देते हैं कि सत्य के बिना धर्म जीवन नहीं दे सकता।
Cross-reference 1: ఏह 59:4 — अन्यत्र यह दिखाता है कि नहीं झूठ से और न किसी प्रकार की छल-छवियों से उद्धार नहीं मिलता; सत्य के साथ संपर्क बनना आवश्यक है।
Cross-reference 2: मत्ती 15:18-19 — बोले हुए शब्दों का महत्व, क्योंकि भीतर के विचार बाहर के कर्म बन जाते हैं।
Cross-reference 3: यशायह 59:13-14 — समाज की भ्रष्टता के कारण न्याय के मार्ग अवरुद्ध होते हैं और सत्य के प्रति निष्क्रियता बढ़ती है।
वर्तमान पाठ के लिए व्यवहारिक अनुप्रयोग
1) अपनी बोलचाल की निगरानी करें: क्या शब्द जल्दबाजी, आलोचना या छल के कारण घातक नहीं हो रहे? सत्य और प्रेम के साथ बोलना सीखें।
2) समाज में सत्य की रक्षा करें: झूठी सूचना, गपशप या बहकावे का समर्थन न करें; सत्य के पक्ष में खड़े रहें, भले ही यह असुविधाजनक हो।
3) दिल को बदलें, भाषा बदलेगी: आंतरिक परिवर्तन से भाषा और व्यवहार में सुरक्षा, नैतिकता और दया विकसित होती है।
संक्षेप सार
यिर्मयाह 9:3 वह चेतावनी है कि झूठी भाषा और बुराई की निरंतर वृद्धि से समुदाय का सत्य-आचरण खत्म हो सकता है। परमेश्वर को जानना तो एक ऊँचाई है, पर उसे मूर्त रूप में सामने नहीं लाने पर यही जानकारियाँ व्यवहार में नहीं उतरतीं। इसलिए यहाया कि अंतःकरण में सत्य के नियम पुनः बनें और उनके अनुसार जीवनJoshua करें।
नोट: इस पाठ के विशिष्ट वार्ताल्यों में मैथ्यू हेनरी, ऐल्बर्ट बर्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डोमेन विवेचन से संक्षेप उद्धरण आवश्यक हो तो "घंटों" के भीतर हों—पर पूर्ण वाक्य नहीं, केवल संक्षिप्त संदर्भ संकेत।