यिर्मयाह 9:14 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वरन् वे अपने हठ पर बाल नामक देवताओं के पीछे चले, जैसा उनके पुरखाओं ने उनको सिखाया*।

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यिर्मयाह 9:14 पद-दर-पद बाइबल टीका

यिर्मयाह 9:14 — Immediate Setting

यिर्मयाह मसीही वचनों के क्रम में प्रेषक यिर्मयाह यहूदा के लोगों के प्रति भगवान की वाणी को उद्धृत करता है। इस शास्त्र में यहूदियों के अविश्वास और मन के कड़वाहट का चित्रण है, जहाँ लोग न केवल मूर्तिप्रथा में लिप्त थे, बल्कि अपने हृदय में ईश्वर के प्रति रूढ़ भाषा और चालाकी के साथ नहीं चलते थे। इस चालाकी के विपरीत, verse 14 यह दर्शाता है कि वे तूफानों की तरह देवताओं की मूर्तियों के पीछे भागते हैं—बाल नामक देवताओं के पीछे — जो उनके पूर्वजों ने भी उन्हें सिखाया था।

क्या बताता है यह पाठ ईश्वर या विश्वास के बारे में

यह पाठ यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर का विरोधी नहीं बल्कि मानव के भीतर का विश्वास-हीनता है। वे अंधकार में चलते हैं, परन्तु वे यह नहीं देखते कि वे अपनी आत्माओं को मूर्ति-प्रसाद के वास्ते कष्ट दे रहे हैं। बाल नामक देवताओं के पीछे चलना एक प्रतीक है उन काइयां इष्टों के पीछे पीछे भागना जो न तो जीवित हैं और न ही उनका कोई सत्य उद्देश्य है। यह क्रिया यह दर्शाती है कि उद्धार के लिए केवल बाहरी रीति-रिवाज ही पर्याप्त नहीं होते; आंतरिक परिवर्तन आवश्यक है।

महत्वपूर्ण शब्दों/छबियाँ स्पष्ट करना

  • मूर्तिपूजा के देवताओं के लिए प्रयुक्त आम नाम; यहाँ यह उन मूर्तियों की अनुकरणीयता और आत्म-विश्वास की कमी को दिखाता है।
  • दृढ़ और कठोर निश्चय, जो स्वार्थ एवं अविश्वास में परिणत हो जाता है; यह एक नकारात्मक प्रकार की धारणाओं और प्रथाओं का परिचायक है।

संबंधित पद

यिर्मयाह 10:3-5 में भी मूर्तियों के प्रति अतृष्णा और उनके निरर्थकता की समीक्षा मिलती है; गलत पूजा के कारण वे लोग खो जाते हैं। यीशु मसीह के वक्तव्य में भी एक इशारा मिलता है कि सत्यकरण में आत्मिक परिवर्तन आवश्यक है, न कि कर्मकांडों की नकल।

यिर्मयाह 7:30-34 में भी मूर्ति-पूजा के परिणामस्वरूप डरावने परिणाम दिखते हैं, क्योंकि यह अनुचित विश्वास धीरे-धीरे राष्ट्र के सामर्थ्य को खो देता है।

आधुनिक अनुप्रयोग

आज भी हम यह पूछताछ कर सकते हैं कि क्या हम अपने हृदय में चरितार्थ विश्वास के बजाय बाहरी दिखावे पर टिके हैं। क्या हम पंरपरागत रीति-रिवाजों को निभाते समय अपने आत्मिक जीवन को बुलावा दे रहे हैं या नहीं? इस पाठ से सीख यह है कि ईश्वर का असली स्वागत तभी संभव है जब हमारा आचार-व्यवहार और विश्वास एकसाथ चलते हों—हृदय में ईश्वर से एक सच्ची निर्भरता और मूर्ति-प्रधानता से मुक्त जीवन।

Cross-references और उनका संक्षिप्त स्पष्टीकरण

यिर्मयाह 7:3-4 — बाहरी पवित्रता के साथ आंतरिक निष्ठा की कमी के जोखिम को चेतावनी देता है।

यिर्मयाह 10:3-5 — मूर्तिपूजा की व्यर्थता और अवास्तविकता पर प्रकाश डालता है; वास्तविक उपासना दिल से होती है।

यानी 1:11-12 — परमेश्वर के इरादे और भार का उल्लेख करते हुए, मूर्तियों के पीछे भागना नकारात्मक परिणाम देता है।

पाठ का संक्षिप्त सार

यह वाचक हमें स्पष्ट संकेत देता है कि परमेश्वर के साथ सच्चा संबंध हृदय की निष्ठा और जीवन के परिवर्तन में है, न कि केवल आचरणों की नकल में। बाल जैसे देवताओं के पीछे भागना याद दिलाता है कि मूर्तिपूजा आत्मा को नहीं, बल्कि आत्म-विश्वास और एकता घटाती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यिर्मयाह 9:14 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इस कारण कि परमेश्‍वर को जानने पर भी उन्होंने परमेश्‍वर के योग्य बड़ाई और धन्यवाद न किया, परन्तु व्यर्थ विचार करने लगे, यहाँ तक कि उनका निर्बुद्धि मन अंधेरा हो गया।

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